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Weather Alert-दीपवाली के पहले बारिश व ठंड को लेकर मौसम विभाग की नयी जानकारी आयी सामने, बढ़ेगी परेशानी


वाराणसी. दीपवाली से पहले बारिश व ठंड लेकर मौसम विभाग की नयी जानकारी सामने आयी है। मौसम विभाग के अनुसार फिर से बरिश का दौर शुरू होने वाला है। पानी बरसने के बाद कड़ाके की ठंड पडऩे लगेगी। दीपवाली पर मौसम विभाग की भविष्यवाणी सही साबित हुई तो इस बार दीपावली पर अच्छी ठंड पडऩे लगेगी।
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IMD Forecast
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यूपी में अक्टूबर से ही मौसम शुष्क बना हुआ है। दिन में तेज धूप खिली रहती है तो रात व भोर में हल्की ठंडक महसूस हो रही है। न्यूनतम व अधिकतम तापमान में 10 से 12 डिग्री सेल्सियस का अंतर हो रहा है। प्रदूषण के चलते वातावरण में धुंध बढ़ गयी है जिसके चलते भी लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। ऐसे में बारिश हो जाती है तो धुंध कम हो जायेगी और लोगों को आराम मिल जायेगा। मौसम विभाग की माने तो पूर्वी यूपी में फिर से बारिश का दौर शुरू होने वाला है। कही पर हल्की तो कही पर मध्यम बारिश होने की संभावना है। मौसम में यह बदलाव १८ अक्टूबर से आरंभ हो जायेगा। इसके बाद १९ व २० अक्टूबर को पानी बरस सकता है।
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जानिए क्यों हो सकती है बारिश
बंगाल की खाड़ी व अरब सागर में निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है जिससे नमी वाली हवाएं आ रही है। इसके चलते बारिश का अधिक प्रभाव पूर्वी यूपी के क्षेत्र पर पड़ेगा। वाराणसी, प्रयागराज, रायबरेली, आजमगढ़, जौनपुर, प्रतापगढ़, गोरखपुर आदि जिलों में बारिश से लेकर मध्यम बारिश हो सकती है जहां पर बारिश नहीं होगी। वहां पर आसमान में बादल छाये रहेंगे। बारिश होने से पहले उमस में बढ़ोतरी होना शुरू हो गयी है। बारिश के बाद जब आसमान से बादल छट जायेंगे तो तेजी से ठंड में बढ़ोतरी होगी।
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Congress: बनारस सहित 29 जिलों के अध्यक्षों पर फैसला विधानसभा उपचुनाव बाद!


वाराणसी. बनारस सहित यूपी के 29 जिलों में जिला व शहर अध्यक्षों की घोषणा में अभी कुछ वक्त लग सकता है। ऐसा कांग्रेस के उच्च पदस्थ नेताओं का कहना है। वो कहते हैं कि जिला और शहर अध्यक्षों का मनोनयन यूपी प्रभारी और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव प्रियंका गांधी की रजामंदी से ही होनी है और फिलहाल उनका सारा फोकस विधानसभा उपचुनाव पर है।

बता दें कि कांग्रेस गत मंगलवार को प्रदेश के 51 जिलों के 48 जिला व 3 शहर अध्यक्षों के नाम की सूची जारी कर चुकी है। अभी 29 जिलों पर फैसला आना बाकी है। यही नहीं अभी प्रदेश के 80 में से 77 जिलो में शहर अध्यक्षों का भी मनोनयन होना शेष है। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व का ध्यान अभी पूरी तरह से विधानसभा उप चुनाव पर है। वैसे भी पार्टी नेतृत्व ने सभी बड़े व खांटी कांग्रेसियों को उन 11 विधानसभा चुनाव क्षेत्रों में लगा रखा है, जहां उपचुनाव होने वाले हैं। पार्टी इस उपचुनाव के माध्यम से भी सूबे की सियासत में एक संदेश देना चाहती है।

खांटी कांग्रेसियों की मानें तो जिस तरह से लोकसभा चुनाव के बाद से प्रियंका गांधी ने खुद पहल करके एक-एक मुद्दे पर सड़क पर उतर कर संघर्ष किया है चाहे वो सोनभद्र का उम्भा नरसंहार प्रकरण हो, उन्नाव प्रकरण हो या मिर्जापुर के सरकारी स्कूल में नमक-रोटी वितरित करने का। इसके अलावा वह महंगाई, बेरोजगारी, खेती-किसानी हर मुद्दे पर लगातार भाजपा सरकार पर आक्रामक हैं। इतना ही नहीं यूपी के विभिन्न जिलों में आई बाढ़ के बाद जिस तरह से प्रियंका गांधी ने यूथ कांग्रेस को स्वास्थ्य कैंप लगाने की हिदायत दी है, उससे साफ है कि वह मिशन 2022 के लिए बेहद संजीदा हैं और इसी लिहाज से काफी ठोक-बजा कर ही जिलों का नेतृत्व सौंपने में जुटी हैं। अब जिस तरह से उम्भा में उन्होंने एक आदिवासी को जिले की कमान सौंपी है वह साफ दर्शाता है कि प्रियंका ऐसे लोगों को संगठन की कमान सौपना चाहती हैं जो जमीन से जुड़ा हो। लोगों के बीच उसकी अच्छी साख हो।

लिहाजा अभी बनारस के जिला व शहर अध्यक्ष की ताजपोशी पर चल रही कवायद पर फिलहाल विराम लगता नहीं दिख रहा है। वैसे भी बनारस कांग्रेस और प्रियंका गांधी दोनों के लिए बेहद संवेदनशील है। यहां के जिला व शहर अध्यक्ष को लेकर प्रियंका गांधी किसी सूरत में जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेना चाहतीं।

यह दीगर है कि बनारस कांग्रेस के अंदरखाने जिला अध्यक्ष के रूप में राजेश्वर पटेल और महानगर अध्यक्ष के रूप में यूथ कांग्रेस के प्रदेश महासचिव राघवेंद्र चौबे के नाम की चर्चा जोरों पर है। पर पार्टी सूत्र बताते हैं कि फिलहाल यह कयासबाजी ही है। अंतिम निर्णय चौंकाने वाला हो सकता है।

इस बीच बनारस कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद व प्रदेश के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ राजेश मिश्र के मीडिया में छपे बयानों के बाद प्रियंका गांधी ने उन्हें बुलाया और उनसे अकेले में बात भी की। डॉ मिश्र इस वक्त प्रियंका के बुलावे पर ही बाराबंकी में वरिष्ठ नेता पीएल पुनिया के बेटे के चुनाव प्रचार में जुट गए हैं।


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BHU में उठी छात्रसंघ बहाली की मांग, यूनिवर्सिटी प्रशासन पर लगाया दल विशेष की विचारधारा को बढ़ावा देने का आरोप


वाराणसी. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में गुरुवार को जहां एक तरफ इतिहास के पुनर्लेखन पर चर्चा चली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय कौशल विकास मंत्री डॉ महेंद्र नाथ पांडेय ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के भारत अध्ययन केंद्र के प्रयास की मुक्त कंठ सराहना की। वहीं दूसरी ओर छात्रों ने छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।

भगत सिंह छात्र मोर्चा के कार्यकर्ताओं छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर जमकर प्रदर्शन किया। यह दीगर है कि इसकी सूचना मिलते ही लंका थाने की पुलिस ने मौके पर भारी मात्रा में पुलिस फोर्स तैनात कर दिया। वैसे यह मांग विश्वविद्यालय परिसर में बुधवार की रात से ही उठने लगी थी। जगह-जगह पोस्टर भी लगाए गए थे। हालांकि गृहमंत्री के आगमन के मद्देनजर पोस्टरों को विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुबह होते ही हटा दिया था।

इस बीच प्रदर्शनकारी संगठन से जुड़े कार्यकर्ता विश्वनाथ ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर तानाशाही का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि यह प्रशासन खास तरह की राजनीति को बढ़ावा दे रहा है। कहा की हम गृहमंत्री अमित शाह का विरोध कर रहे है उनके कार्यकाल में कश्मीर, और असम के हालात बेहद नाजुक है।

कार्यकर्ताओं ने कहा की देश में महंगाई का आलम किसी से छिपा नहीं है, पूरा देश मंदी का दंश को झेल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार विशेष विचारधारा को आगे बढ़ा रहा है। ऐसे में परिसर में छात्रसंघ नितांत जरूरी है। तत्काल इसकी बहाली की जानी चाहिए ताकि सभी प्रकार के कार्यक्रम विश्वविद्यालय परिसर में सभी विचारधाराओं को समान रूप से काम करने का मौका मिले। इस दौरान कुछ छात्र डफली बजाकर गृहमंत्री और बीजेपी के खिलाफ नारेबाजी भी की।


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काशी विद्यापीठ मारपीट में के बाद फायरिंग, छात्रों ने सिगरा थाने पर किया हंगामा, सड़क जाम


वाराणसी. महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ छात्रसंघ चुनाव बेहद खतरनाक होता जा रहा है। चुनावी रंजिश को लेकर लगातार मारपीट व फायरिंग हो रही है। गुरुवार को परिसर में छात्र गुटों में चुनावी रंजिश को लेकर भिडंत हो गयी। मारपीट में चार छात्र घायल हो घायल हो गये। इसी बीच फायरिंग होने से परिसर में भगदड़ मच गयी। घटना से नाराज छात्रों ने पहले सिगरा थाना के सामने सड़क जाम किया और फिर थाने में जाकर हंगामा किया। छात्रों की एसएचओ व अन्य पुलिसकर्मियों से नोकझोंक भी हुई। घटना को लेकर छात्रों ने पूर्व उपाध्यक्ष समेत अन्य छात्रों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की तहरीर दी है।
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Sigra Police Station
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परिसर में छात्रसंघ चुनाव के लिए 26 को ऑनलाइन नामांकन होना है और 27 अक्टूबर को नामांकन फार्म जमा करने की तिथि निर्धारित है जबकि छात्रसंघ के लिए चार नवम्बर को मतदान होना है। परिसर में इस समय छात्रसंघ चुनाव को लेकर प्रचार चरम पर है। दोपहर में किसी बात को लेकर मानविकी संकाय में छात्र गुट भिड़ गये। आरोप है कि एक पक्ष के लोगों ने पहले असलहे के मुठिया से छात्रों पर हमला किया। दो छात्र का सिर फूट गया जबकि दो अन्य भी चोटिल हो गये। इसके बाद किसी ने हवाई फायरिंग कर दी। गोली चलते ही परिसर में भगदड़ मच गयी। छात्रों का दावा था कि उन्हें लक्ष्य कर गोली चलायी गयी थी जो लगी नहीं। मौके पर पहुंची सिगरा पुलिस ने कुछ लोगों को पकड़ लिया। इसके बाद दूसरे गुट के छात्र भड़क गये। छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने हमला करने वाले की जगह उनके गुट के लोगों को ही पकड़ लिया। इसके बाद दर्जनों की संख्या में छात्र सिगरा थाने पहुंचे। थाना के सामने ही छात्रों ने कुछ देर के लिए सड़क जाम कर दिया। इसके बाद छात्र थाने के अंदर पहुंचे और पुलिसकर्मियों से भिड़ गये। छात्रों व एसएचओ में भी जमकर नोकझोंक हुई। चेतगंज सीओ भी थाने पहुंचे और उन्होंने भी छात्रों को समझा कर शांत कराया। तहरीर के आधार पर पुलिस मुकदमा दर्ज करके आगे की कार्रवाई में जुटी है। घायलों में विवेक सिंह, आशु वर्मा, संदीप पाल व रोशन कुमार का नाम सामने आया है।
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परिसर में अराजकता की स्थिति, लगातार हो रही हिंसा
परिसर में छात्रसंघ चुनाव को लेकर अराजकता की स्थिति बन गयी है। आये दिन चुनाव के नाम पर ङ्क्षहसा हो रही है। पिछले माह ही परिसर में असलहे लहराये गये थे। इसके बाद डीरेका के पास चुनावी रंजिश को लेकर छात्रों ने फायरिंग कर दहशत फैला दी थी। अब परिसर में भी मारपीट हो गयी है। परिसर में पुलिस चौकी, सीसीटीवी कैमरा व सुरक्षा गार्ड तैनात हैं इसके बाद भी आये दिन हिंसा हो रही है।
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BHU में बोले CM Yogi Aditynath: चंद्रगुप्त और स्कंदगुप्त की परंपरा को आगे बढ़ा रहे PM मोदी व अमित शाह


वाराणसी. BHU में बोले CM Yogi Aditynath चंद्रगुप्त विक्रमादित्य और स्कंदगुप्त विक्रमादित्य की परंपरा को आगे बढ़ा रहे PM मोदी व अमित शाह। कहा कि जम्मू कश्मीर में धारा 370 समाप्त होना अपने आप में देश के अंदर आजादी के बाद का सबसे साहसिक एवं ऐतिहासिक निर्णय है। यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि 1950 में भारत ने अपना संविधान अंगीकार किया था, 1952 में यह अनुच्छेद जबरन संविधान में जोड़ा गया था। सरदार पटेल ने कहा का था इस अनुच्छेद को वही व्यक्ति हटा पाएगा, जिसके कलेजे में दम होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने सरदार पटेल की उस उक्ति को सार्थक किया है।

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बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में भारत अध्ययन केंद्र द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान भारत अंग्रेजों की देन नहीं है, बल्कि प्राचीन काल से भारत सांस्कृतिक रूप से जुड़ा हुआ है। योगी बोले, 2 हजार वर्षों से भारत के इतिहास को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि देश में मौजूद तीर्थ सिर्फ उपासना के केंद्र नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय एकात्मक के भी केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि जो समाज अपने अतीत के गौरवशाली क्षणों को भूल जाता है, उसके सामने त्रिशंकु जैसी स्थिति उतपन्न हो जाती है। वह विदेशी आक्रांताओं और विदेशी वस्तुओं में ही अपने भविष्य को टटोलने की कोशिश करता है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत के लोग अपने वास्तविक इतिहास को न जान पाए इसलिए साजिश के तहत ऐसा किया गया। चंद्रगुप्त विक्रमादित्य से लेकर स्कंदगुप्त तक भारत की गौरवशाली परंपरा रही है। इस कालखंड में भारत में सामरिक, आर्थिक, राजनीतिक, ज्ञान-विज्ञान के हर क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हुआ था।


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BHU में बोले Amit Shah: वामपंथियों और अंग्रेजों को कोसना बंद करें, खुद शोध कर नए इतिहास का करें सृजन


डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी

वाराणसी. भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah ने देश के इतिहासकारों से अपील की है कि वो अंग्रेजों और वामपंथी इतिहासकारों को कोसना बंद करें। उनके इतिहास लेखन से किसी तरह का छेड़छाड़ करना बंद करें। वो खुद शोध करें और नए इतिहास का सृजन करें। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल के साम्राज्य, शासक ही नहीं ऐसे व्यक्तित्वों की तलाश करें जिनके रग-रग में भारत बसता था और उन्होंने भारतीय कला, संस्कृत, सभ्यता, शिक्षा को अक्षुण्ण रखने के लिए अपना समूचा जीवन न्योछावर कर दिया। उन्होंने नगर संचालन की एक व्यवस्था दी। ऐसे लोगों को खोज कर उन्हें उनके व्यक्तित्व व कृतित्व के आधार पर आमजन के सामने परोसने का काम करें। कहा कि आखिर कब तक अंग्रोजों और वामपंथी इतिहासकारों को कोसते रहेंगे ये काम अब बंद करें। उन्होंने सवाल किया कि किसने रोका है आपको शोध करने से, किसने रोका है आपको नव इतिहास का सृजन करने से।

अच्छा लगा कि इतिहास पुनर्लेखन का कार्य बीएचयू में शुरू हुआ

शाह, महामनना पंडित मदन मोहन मालवीय की कर्मभूमि, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता भवन में गुरुवार को भारत अध्ययन केंद्र द्वारा स्कंदगुप्त विक्रमादित्य का ऐतिहासिक पुनः स्मरण एवं भारत राष्ट्र का राजनीतिक भविष्य विषयक दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह बहुत ही अच्छा लगा कि स्कंद गुप्त के पुनः स्मरण का कार्य बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में शुरू हुआ। ऐसे ही कार्यों के लिए महामना ने उस वक्त इस विश्वविद्याल की स्थापना की जब देश गुलाम था। वह जानते थे कि भारतीय संस्कृति, सभ्यता, कला को कोई एक व्यक्ति नहीं बल्की ऐसे विद्यापीठ, विश्वविद्यालय ही अक्षुण्ण रख सकते हैं।

अमित शाह

जो शासन इतिहास संजोकर नहीं रखता लोग उसे भूल जाते हैं
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि भारतीय इतिहास का पुनर्लेखन भारतीय दृष्टिकोण से होना जरूरी है। यह जिम्मेदारी हमारी है। जो शासन अपने इतिहास को संजोकर नहीं रखता है, लोग उसे भूल जाते हैं। कब कि आज जो इतिहास लिखा जाएगा, उसमें सत्य पर आधारित होगा। वह चिरंजीवी होगा। शाह ने कहा कि सम्राट स्कंदगुप्त को इतिहास में वह स्थान नहीं मिला। अब कुछ शिलालेखों और प्रशस्ति पत्रों के माध्यम से मिल रहा है उसे सहेजने की जरूरत पड़ रही है। इतिहास के बिखरे पन्ने को समेटने की जरुरत है।

स्कंद गुप्त ने मगध व वैशाली को एक किया
शाह ने स्कंदगुप्त के शासनकाल की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि हकीकत में उस समय मगध और वैशाली दो स्तंभ माने जाते थे। दोनों को एक भी स्कन्दगुप्त ने किया। स्कंदगुप्त के प्रराक्रम की जितनी प्रशंसा होनी चाहिए उतनी नहीं हुई। हुणों को रोकने का साहस स्कन्दगुप्त में ही था।

अमित शाह
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चीन तक हूणों से डरा और बना दी चाइना वॉल
वो हुण जिनसे डर कर चीन तक ने चाइना वॉल खड़ी कर दी क्योंकि वो भी हूंणों के आक्रमण का प्रतिकार करने की क्षमता नहीं रखते थे। ऐसे में उस 40 फीट ऊंची दीवर से चीन तो हूंणों के आक्रमण से बच गया लेकिन यूरोपीय देश नहीं बच सके।

स्कंद गुप्त ही थे जिन्होंने पूरी दुनिया में हूणों से मुकाबला ही नहीं किया बल्कि पराजित किया
हुणों को देश से मुक्त कराने का पराक्रम स्कंदगुप्त ने दिखाया। हुणों को पहली बार विश्व में कहीं पराजय मिली तो वह भारत में स्कंदगुप्त के हाथों ही मिली। यही कारण है कि स्कंदगुप्त को महान सम्राट माना गया। तब चीन ने भी स्कंदगुप्त के लिए प्रशस्तिपत्र पाटलीपुत्र पहुंचाया।

इतिहासकार आगे आएं और नव इतिहास का सृजन करें
शाह ने इतिहासकारों का आह्वान किया कि वो आगे आएं और नव इतिहास का सृजन करें। यह कार्य विश्वविद्यालयों में ही हो सकता है। मुझे खुशी होगी कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय इसका नेतृत्व करे। कहा कि भारतीय इतिहास के पुर्लेखन की बहुत जरूरत है ताकि बच्चे अपने गौरवशाली इतिहास को जान सकें। समझ सकें। अभी तो बच्चों को मालूम ही नहीं है कि स्कन्द गुप्त इतना बड़ा सम्राट था। हमारे पास गुप्त काल, मौर्य वंश, शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप जैसे प्रतापी राजाओं के संदर्भ ग्रंथ नहीं है। यह दुःखद है।
कहा कि पूर्वांचल के साथ स्कंदगुप्त का नाता रहा है। अब उसी क्षेत्र में यह संगोष्ठी हो रही है। स्कंदगुप्त के इतिहास को संकलित करने का जो प्रयास आज हो रहा है। वह बहुत जरूरी है।

बीएचयू ने हिन्दू संस्कृति को अक्षुण रखने का काम किया
गृहमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत पंडित मदन मोहन मालवीय जी को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के इस सभागार में संबोधन करना मेरे लिए गौरव की बात है। जब मालवीय जी ने इस विश्वविद्यालय के निर्माण की कल्पना की होगी तो किसी को नहीं मालूम कि उनके मन में क्या विचार रहे होंगे। परंतु इतने सालों के बाद यह जरूर दिखाई देता है कि इसने हजारों साल की हिन्दू संस्कृति को अक्षुण्ण रखने का काम किया है। यहां से जो शिक्षा की संस्कृति, शिक्षा का प्रचार, अनेक वह विषय जो लुप्त होने के कगार पर खड़े थे, उन विषयों का न सिर्फ प्रचार बल्कि उनकी पुनः प्राण प्रतिष्ठा इस विश्वविद्यालय ने ऐसे समय की जब इस देश, इस संस्कृति को इसकी जरूरत थी। सैकड़ों सालों की गुलामी के बाद अपराधबोध से युक्त अपने गौरव को दोबारा हासिल करने के लिए कोई व्यक्ति कुछ नहीं कर सकता केवल एक विश्वविद्यालय ही कर सकता है। इसी बात को माप लेने की दूरदृष्टता महामना में थी और उन्होंने इसकी स्थापना की।

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स्कन्द गुप्त की परिकल्पना मोदी के नेतृत्व में आज साकार हो रही : योगी
गृहंमंत्री से पहले सीएम योगी ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि कोई भी समाज जब अतीत के गौरवशाली इतिहास को विस्मृत करता है तो उसके सामने त्रिशंकु जैसी हालत होती है। महाभारत युद्ध के बाद भारत ने जो वैभव खोया था। उसे गुप्त वंश के समय दोबारा हासिल किया गया। कहा कि हमारे दो हजार साल के इतिहास को तोड़ मरोड़ को पेश करने की कोशिश हुई है।

जम्मू कश्मीर से धारा 370 का हटना आजादी के बाद का सबसे साहसिक कदम
जम्मू कश्मीर और धारा र370 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि धारा 370 का हटना आजादी के बाद सबसे साहसिक निर्णय कहा जाएगा। जब इसे संविधान में लाया जा रहा था तब भी आंबेडकर ने इसका विरोध किया था। अब कश्मीर न सिर्फ विकास के रास्ते पर है बल्कि एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना की जिस परिकल्पना को चंद्रगुप्त मौर्य और स्कंदगुप्त ने देखा था वह आज मोदी जी के नेतृत्व में पूरी हो रही है।

अमित शाह
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शाह को भेंट की गई चांदी की तलवार
इस मौके पर केंद्रीय मंत्री डॉ महेंद्र नाथ पांडेय, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के सचिव डॉ बाल मुकुंद पांडेय, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिंदू विश्वविद्यालय) के निदेशक प्रो पीके जैन, भारत अध्ययन केंद्र काशी हिंदू विश्वविद्यालय के शताब्दी पीठ आचार्य प्रो कमलेश दत्त त्रिपाठी समेत तमाम विद्वतजन मौजूद रहे। अध्यक्षता बीएचयू के कुलपति प्रो राकेश भटनागर ने की और संचालन भारत अध्ययन केंद्र के प्रमुख प्रो राकेश उपाध्यायन ने किया। बीएचयू की ओर से इस मौके पर अमित शाह को स्कंद गुप्त की कांस्य प्रतिमा और चांदी की तलवार भी भेंट की गई।

अमित शाह
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जिस महाबली शासक को भूलते गये लोग, गृहमंत्री अमित शाह ने क्यों किया याद


वाराणसी. बीजेपी लगातार नया इतिहास लिखने की बात कह रही है। गुरुवार को इस बात पर गृहमंत्री अमित शाह ने भी मुहर लगा दी है। बीएचयू में आयोजित गुप्तवंश्ैक वीर स्कन्दगुप्त विक्रमादित्य पर आयेजित सेमिनार में केन्द्रीय गृहमंत्री ने कहा कि भारत का गलत इतिहास लिखने के लिए अंग्रेज इतिहासकारों व वामपंथियों को कोसना व गाली देना बंद करे। अब जरूरत है कि देश के गौरवशाली इतिहास को सत्य के आधार पर लिखे। अमित शाह के बयान से साफ जाता है कि बीजेपी अब उन महापुरूषों को सामने ला रही है जिनके साथ इतिहास समय न्याय नहीं किया गया है। इन्हीं में एक महाबली शासक स्कंदगुप्त विक्रमादित्य है जिनका पराक्रम व शौर्य की गाथा पढ़ कर लोग उन्हें सलाम करते हैं।
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Amit Shah
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महाबली शासक स्कंदगुप्त विक्रमादित्य की कहानी बेहद दिलचस्प है। भारत में तीसरी से पांचवी सदी तक शासन करने वाले गुप्त राजवंश के आठवे राजा स्कंदगुप्त थे। इतिहास के अनुसार स्कंदगुप्त ने जितने वर्षो तक शासन किया था उतने साल तक युद्ध भी लड़ा था। बचपन से ही स्कंदगुप्त बड़े योद्धा थे। स्कंदगुप्त के शासनकाल के समय हूण शासकों ने भारत पर हमला बोला था। दुनिया में हूणों का इतना आतंक था कि सभी राजा उससे डरते थे। चीन से हूणों से बचने के लिए दीवार तक बनायी थी। हूणों ने इटली, फ्रांस, रोम से लेकर अन्य देशों में आतंक मचा कर रखा था। चीन ने दीवार बना कर खुद को तो बचा लिया था लेकिन अनेक देशों पर हमला करके हूणों ने उन्हें तबाह कर डाला था। हूण इतने बर्बर थे कि वह सबसे पहले बच्चों की हत्या करते थे और मानव मांस को भूनकर खा जाते थे जिसके चलते हूणों का इतना खौफ पैदा हो गया था कि सैनिक लडऩे से पहले ही मैदान छोड़ कर भाग जाते थे। हूणों न भारत पर हमला किया था और तक्षशिला विश्वविद्यालय कोध्वस्त कर दिया था। भारत को हूणों से हमले से बचाने के लिए सबसे पहले स्कंदगुप्त आगे आये। 25 साल की आयु में ही स्कंदगुप्त ने हूणों का डटकर मुकाबला किया और उन्हें परास्त कर भारत से खदेड़ा था। जिन हूणों के आगे दुनिया ने हार मान ली थी उसे भारत के महाबली शासक स्कंदगुप्त ने पराजित करके अपनी वीरता का लौहा मनवाया था।
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स्कंदगुप्त की कहानी की झलक बाहुबली फिल्म में दिखायी देती है
स्कंदगुप्त की कहानी की झलक बाहुबली फिल्म में दिखायी देती है। स्कंदगुप्त व हूणो की बीच भयंकर संघर्ष हुआ था। शुरूआती लड़ाई में स्कंदगुप्त की सेना को पीछे हटना पड़ा था लेकिन स्कंदगुप्त ने सेना का हौसला बढ़ाया और सभी को एकजुट कर लड़ाई लड़ी। गाजीपुर के सैदपुर में ही हूणों को चक्रव्यूह बना कर ऐसा घेरा कि उनका दुश्मनों का युद्ध के मैदान से पैर ही उखड़ गया। हूण के सेनापति बरबंड अटीला से सारी दुनिया डरती थी लेकिन उसे स्कंदगुप्त ने युद्ध के मैदान में ही मार डाला था इसके बाद हूणों की सेना भाग खड़ी हुई थी। कहा जाता है कि उस समय स्कंदगुप्त नहीं होते तो देश को हूणों के आतंक से बचाना मुश्किल होता। बाद में स्कंदगुप्त की वीरता को देखते हुए उन्हें विक्रमादित्य की उपाधि दी गयी।
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मौसम ने ली करवट, आसमान में आज छा सकते हैं बादल, बढ़ सकती है ठंड


वाराणसी. यूपी में मौसम दिन प्रतिदिन अपने रुख में बदलाव कर रहा है। बीते चौबीस घंटों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। अब आगे भी यही रुख जारी रहने के साथ ही पूर्वांचल में ठंड का असर धीरे-धीरे और चढ़ने लगेगा। मौसम विभाग की ओर से जारी सप्‍ताह भर के आंकड़ों के अनुसार 18 और 19 अक्‍टूबर को पूर्वांचल में बादलों की सक्रियता रहेगी और कुछ इलाकों में गरज चमक के साथ बूंदाबांदी और बादलों की सक्रियता भी रहेगी।

तापमान सामान्‍य तौर पर धीरे धीरे दिन प्रतिदिन कम हो रहा है। नवंबर माह की शुरुआत होने के साथ ही पूर्वांचल में ठंड की आमद हो जाएगी और ओस संग कोहरे का व्‍यापक स्‍वरुप सामने आएगा। बीते वर्ष की अपेक्षा इस बार ठंड और कोहरे का अधिक असर देखने को मिलेगा। फिलहाल इन दिनों पूर्वांचल के पहाड़ी क्षेत्रों और अंचलों में कोहरे और ओस का दौर शुरू हो चुका है जल्‍द ही शहरों अौर कस्‍बों में भी कोहरे का दौर शुरू होगा।

बीते चौबीस घंटों में अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि न्‍यूनतम तापमान 20.2 डिग्री रहा। अधिकतम और न्‍यूनतम दोनों ही तापमान सामान्‍य रहे। वहीं आर्द्रता इस दौरान अधिकतम 76 और न्‍यूनतम 67 फीसद दर्ज की गई। मौसम विभाग की ओर से जारी सैटेलाइट तस्‍वीरों में पूर्वांचल में बादलों की सक्रियता शून्‍य रही। हालांकि आने वाले दो दिनों में मौसम विभाग ने बूंदाबांदी और बादलों की सक्रियता की आशंका जताई है।


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मायावती के उमाकांत यादव को गिरफ्तार कराते ही बाहुबली रमाकांत यादव ने उठाया था यह कदम


वाराणसी. पूर्वांचल में बाहुबली रमाकांत व उमाकांत यादव का जलवा आज भी कायम है। दोनों भाई बाहुबली है और दर्जनों मुकदमे भी दर्ज हैं इसके बाद भी सभी राजनीतिक दलों ने बाहुबली भाईयों को टिकट देकर चुनाव में अपना परचम फहराया था। संसदीय चुनाव 2014 में बीजेपी ने मुलायम सिंह यादव को पटखनी देने के लिए बाहुबली रमाकांत यादव को आजमगढ़ से टिकट दिया था। चुनाव में विजय पाने के लिए मुलायम सिंह यादव का अपना पूरा परिवार उतारना पड़ा था।
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मुलायम सिंह यादव को चुनौती देने के बाद भी रमाकांत यादव की हैसियत कम नहीं हुई थी इसके चलते ही अखिलेश यादव ने रमाकंात यादव को सपा में शामिल कर निरहुआ को तगड़ा झटका दिया है। इससे साफ हो जाता है कि पूर्वांचल की राजनीति में आज भी बाहुबली यादव बंधु का जलवा कायम है। जानकारों की माने तो रमाकांत यादव से अधिक तेवर वाले उनके भाई उमाकांत यादव है। दोनों भाईयों में गजब का तालेमल देखने को मिलता है। वर्ष 2007 में उमाकांत यादव मछलीशहर से सांसद थे और उनके उपर एक घर पर कब्जा करने का आरोप लगा था इसके बाद यूपी की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने उमाकांत यादव को सीएम आवास पर मिलने के लिए बुलाया था। उमाकांत यादव जब सीएम आवास पर मिलने गये थे तो आवास के बाहर ही मायावती ने जमीन कब्जा करने के आरोप में उमाकांत यादव को गिरफ्तार करा दिया था। इस घटना के बाद मायावती की बाहुबलियों पर कार्रवाई को लेकर छवि मजबूत हुई थी। गिरफ्तारी के बाद काफी समय तक उमाकांत यादव जेल में रहे थे। भाई की गिरफ्तारी की जानकारी मिलते ही बाहुबली रमाकांत यादव ने बसपा पार्टी छोड़ दी थी। मायावती व उमाकांत यादव के रिश्ते इतने तल्ख हो गये थे कि जब संसदीय चुनाव 2014 में आजमगढ़ में रमाकांत यादव के चुनाव प्रचार करने के लिए अमित शाह खुद गये थे और उन्होंने आजमगढ़ की धरती को आतंकिस्तान कह दिया था इसके बाद मायावती ने पलटवार करते हुए बीजेपी प्रत्याशी रहे पूर्व सांसद रमाकांत यादव को ही आतंकी बताया था।
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सपा, बसप, कांग्रेस व बीजेपी का बाहुबली यादव बंधु को बिना नहीं चलता काम
राजनीति में बाहुबलियों को टिकट देने को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल एक-दूसरे पर तमाम आरोप लगाते रहे हैं लेकिन जब भी किसी दल को मौका मिलता है उसकी पहली पसंद बाहुबली यादव बंधु ही होते हैं। सपा से रमाकांत यादव सांसद बने थे और फिर बसपा में चले गये थे। बाद में बीजेपी का दामन थामा था और फिर कांग्रेेस का साथ हो लिए थे इसके बाद फिर से रमाकांत यादव की सपा में वापसी हो चुकी है। उमाकांत यादव ने सपा व बसपा दोनों के सिंबल पर चुनाव जीता है। बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ हुए गेस्ट हाउस कांड में उमाकांत यादव का नाम आया था इसके बाद वह सपा में चले गये थे लेकिन उमाकांत की जौनपुर की राजनीति में पकड़ देखते हुए मायावती ने फिर से बसपा में शामिल कराया था। वर्तमान समय की बात की जाये तो उमाकांत यादव किसी दल में नहीं है और सपा में जाने के जुगाड़ में लगे हुए हैं।
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LIVE: बोले अमित शाह, सावरकर न होते तो 1857 की क्रांति इतिहास न बनती


वाराणसी. गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार सुबह वाराणसी पहुंचे। शहर के बाबतपुर स्थित लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी अगवानी की। इस दौरान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और मछली शहर से बीजेपी सांसद बीपी सरोज भी मौजूद रहे। गृहमंत्री अमित शाह के साथ कौशल विकास मंत्री महेंद्र नाथ पांडे भी वाराणसी दौरे पर पहुंचे। अमित शाह काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की द्वीदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 'गुप्तवंशक-वीर: स्कंदगुप्त विक्रमादित्य' के शुभारंभ के अवसर पर संबोधित कर रहे हैं।

अमित शाह ने कहा कि वीर सावरकर न होते तो 1857 की क्रांति भी इतिहास न बनती, उसे भी हम अंग्रेजों की दृष्टि से देखते। वीर सावरकर ने ही 1857 को पहला स्वतंत्रता संग्राम का नाम दिया।
मोदी जी के नेतृत्व में आज देश फिर से एक बार अपनी गरिमा पुन: प्राप्त कर रहा है। पूरी दुनिया के अंदर भारत दुनिया के अंदर सबसे बड़ा लोकतंत्र है इसकी स्वीकृति आज जगह-जगह पर दिखाई पड़ती है। पूरी दुनिया आज भारत के विचार को महत्व देती है।


स्कंदगुप्त का बहुत बड़ा योगदान दुर्ग की रचना, नगर की रचना और राजस्व के नियमों को संशोधित करके शासन व्यवस्था को आगे बढ़ाने में है। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि आज स्कंदगुप्त पर अध्ययन के लिए कोई 100 पेज भी मांगेगा, तो वो उपलब्ध नहीं हैं।


आज देश स्वतंत्र है, हमारे इतिहास का संशोधन करके संदर्भ ग्रन्थ बनाकर इतिहास का पुन: लेखन करके लिखें। मुझे भरोसा है कि अपने लिख इतिहास में सत्य का तत्व है इसलिए वो जरूर प्रसिद्ध होगा।


अपने इतिहास को संजोने, संवारने, अपने इतिहास को फिर से रीराइट करने की जिम्मेदारी, देश की होती है, जनता की होती है, देश के इतिहासकारों की होती है। हम कब तक अंग्रेजों को कोसते रहेंगे।


तब सम्राट स्कंदगुप्त ने अपने पिता से कहा कि मैं इसका सामना करूंगा और उसके बाद 10 साल तक जो अभियान चला, उसमें समग्र देश के अंदर हूणों का विनाश करने का पराकम्र स्कंदगुप्त ने ही किया।


जिस तकक्षिला विश्वविद्यालय ने कई विद्वान, वैद्, खगोलशात्र और अन्य विद्वान दिए, उस तकक्षिला विश्वविद्यालय को तहस-नहस कर दिया गया था।


चंद्रगुप्त विक्रमादित्य को इतिहास में बहुत प्रसिद्धि मिली है। लेकिन उनके साथ इतिहास में बहुत अन्याय भी हुआ है। उनके पराक्रम की जितनी प्रसंशा होनी थी, उतनी शायद नहीं हुई।


गुप्त साम्राज्य की सबसे बड़ी सफलता ये रही कि हमेशा के लिए वैशाली और मगध साम्राज्य के तकराव को समाप्त कर एक अखंड भारत के रचना की दिशा में गुप्त साम्राज्य आगे बढ़ा था।


महाभारत काल के 2,000 साल बाद 800 साल का कालखंड दो प्रमुख शासन व्यवस्थाओं के कारण जाना गया। मौर्य वंश और गुप्त वंश। दोनों वंशों ने भारतीय संस्कृति को तब के विश्व के अंदर सर्वोच्च स्थान पर प्रस्थापित किया।
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पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में गुरुवार को केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह पहुंचे हैं। बाबतपुर एयरपोर्ट पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने गृहमंत्री की आगवानी की है। इसके बाद हेलीकॉप्टर से सीधे बीएचयू स्थित हेलीपैड गये। वहां से निकल कर स्वतंत्रता भवन में चल रहे इंटरनेशनल सेमिनार गुप्तवंशक वीर में भाग लेने के लिए पहुंच गये हैं।

अमित शाह के आगमन के दौरान परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। गृहमंत्री के कार्यक्रम में छात्रसंघ बहाली को लेकर विरोध होने की आशंका को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने खास तैयारी की है। पूरे परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। बीएचयू स्थित कार्यक्रम में खुद सीएम योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित हैं। उनके साथ केन्द्रीय मंत्री डा.महेन्द्रनाथ पांडेय भी है। अमित शाह कुछ घंटे ही बनारस में रहेंगे। बीएचयू में कार्यक्रम में भाग लेने के बाद वह वापस निकल जायेंगे। इसके बाद सीएम योगी आदित्यनाथ अपना दो दिवसीय दौरा खत्म करके वापस लौटेंगे।
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सीएम योगी आदित्यनाथ 16 अक्टूबर को ही बनारस आ गये
सीएम योगी आदित्यनाथ 16 अक्टूबर की रात को बनारस आये थे और आने के बाद उन्होंने विकास योजनाओं की समीक्षा की है उसके बाद गुरुवार को एयरपोर्ट पर जाकर गृहमंत्री की आगवानी की। बनारस में बढ़ते क्राइम व सड़कों की खराब स्थिति पर सीएम ने नाराजगी जतायी है इसके चलते अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
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Karwa chauth 2019: आज रात करवा चौथ पर होगा बड़ा बदलाव, इस राशि में सूर्य करेंगे इस राशि में प्रवेश


वाराणसी. करवा चौथ यानि आज सूर्य मध्य रात्रि 1 बजकर 2 मिनट पर सूर्य कन्या राशि से निकलकर शुक्र की राशि तुला में प्रवेश करेंगे। मध्य रात्रि में संक्रांति होने की वजह से अगले दिन ब्रह्म मुहूर्त से संक्रांति का पुण्य काल आरंभ हो जाएगा। इस दिन जल में दीप प्रवाहित करना। अन्न और वस्त्र दान करना शुभ फलदायी होगा। सूर्य की इस सक्रांति से तुला राशि में शुक्र और बुध के साथ त्रिग्रही योग बनेगा। सूर्य इस राशि में 17 नवंबर यानी पूरे एक महीने रहेंगे। इस दौरान दीपावली का शुभ पर्व भी मनाया जाएगा। ग्रहों का यह संयोग आपके लिए कितना शुभ और लाभप्रद है।

मेष राशि
सूर्य का गोचर आपकी राशि के सातवें भाव में होने जा रहा है। इस दौरान आपके वैवाहिक जीवन में कुछ परेशानी आ सकती हैं। जो लोग नौकरी बदलने की इच्छा रखते हैं उन्हें अपना प्रयास तेज कर देना चाहिए, कामयाबी मिल सकती है। इस दौरान आप अपनी वाणी और क्रोध पर संयम रखें, अन्यथा हानि हो सकती है।


वृषभ राशि
सूर्य का गोचर आपकी राशि के छठवें भाव में होने जा रहा है। इस दौरान आपको अच्छे फल मिलने की पूरी इच्छा है। आपको लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ सकती है। शिक्षा के क्षेत्र में आप मनचाहे परिणाम पा सकते हैं। माता के साथ आपके संबंध बेहतर होंगे उनकी सेहत भी अच्छी रहेगी। धर्म और आध्यात्मिक विषयों में आपकी रुचि रहेगी।


मिथुन राशि
सूर्य का गोचर आपकी राशि के पांचवे भाव में होने जा रहा है। नौकरी पेशा से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर काफी लाभदायक होगा। अधिकारी आपके काम से प्रभावित होकर प्रमोशन भी दे सकते हैं। मान-प्रतिष्ठा का लाभ मिलेग। गोचर के दौरान जीवनसाथी का साथ आपको भरपूर मिलेगा। हालांकि भाई-बहनों को लेकर थोड़ी परेशानी हो सकती है।


कर्क राशि
सूर्य का गोचर आपकी राशि के चौथे भाव में होने जा रहा है। इस दौरान आपकी कार्यक्षमता में वृद्धि होगी। भौतिक सुखों की चीजों पर धन खर्च हो सकता है। भाग्य आपका साथ आपको पूरा मिलेगा और समाज में आपका सम्मान बढ़ेगा। हालांकि पिताजी के साथ रिश्तों में थोड़ा तनाव हो सकता है। किसी सरकारी योजना से अकस्मात लाभ मिल सकता है। गोचर के प्रभाव से प्रेम संबंधों में कुछ समस्याएं आ सकती हैं।

सिंह राशि
सूर्य देव आपकी राशि से तीसरे भाव में गोचर करेंगे। इस दौरान आप खुद को ऊर्जावन महसूस करेंगे और हर कार्य में रचनात्मक के साथ आप पूरी तरह करेंगे। किसी पुरानी बीमारी से इस दौरान आपको छुटकारा मिल सकता है। गोचर के दौरान यात्रा करने से बचें। आर्थिक पक्ष भी अनुकूल रहेगा। लेकिन हर किसी के साथ अपनी बातों को साझा न करें।

कन्या राशि
सूर्य का गोचर आपकी राशि के दूसरे भाव में होने जा रहा है। इस दौरान आप हर बात सोच-समझकर करें। पारिवारिक जीवन में उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। सेहत को लेकर आपको सचेत रहने की जरुरत है। यदि आपका कोर्ट कचहरी में कोई मामला चल रहा है तो फैसला आपके पक्ष में आ सकता है। जो दंपति संतान सुख की चाहत रखे हुए हैं, उनकी इच्छा पूरी होगी।

तुला राशि
सूर्य का गोचर आपकी राशि में ही होने जा रहा है। इस गोचर के दौरान आपको स्वास्थ्य संबंधी कुछ परेशानी हो सकती है। आपके व्यवहार में चिड़चिड़ापन देखने को मिल सकता है। इस दौरान आप बहसबाजी से बचें। अगर आपका कोई अदालती या कानूनी प्रकरण चल रहा है तो फैसला आपके पक्ष में आने की संभावना है।

वृश्चिक राशि
सूर्य का गोचर आपकी राशि के 12वें भाव में होने जा रहा है। इस दौरान धन संबंधित मामलों में कोई ना कोई समस्या आ सकती है। कोई भी फैसला लेने से पहले एक बार विचार जरूर कर लें। मांगलिक कार्य में भाग लेने का मौका मिल सकता है। गोचर के प्रभाव से परिवार में किसी बात को लेकर अशांति की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

धनु राशि
सूर्य का गोचर आपकी राशि के 11वें भाव में होने जा रहा है। इस दौरान आपको अच्छे फल मिलने की पूरी उम्मीद है। कार्यक्षेत्र में आपको अपने सहयोगियों का पूरा साथ मिलेगा, साथ ही लाभ प्राप्ति के नए मार्ग खुलेंगे। आप अपने परिवारवालों के साथ किसी धार्मिक यात्रा पर जा सकते हैं। कड़ी मेहनत से आप विरोधियों को परास्त कर देंगे। साथ ही आपको कोई गिफ्ट मिल सकता है।

मकर राशि
सूर्य का गोचर आपकी राशि के 10वें भाव में होने जा रहा है। इस दौरान आपको सरकारी क्षेत्रों में लाभ मिलेगा। नौकरी पेशा लोगों का प्रमोशन हो सकता है और कोई गिफ्ट भी मिल सकता है। हालांकि आपको अपनी उत्तेजना पर इस समय काबू रखना होगा। वाहन सुख एवं राजकीय क्षेत्र से लाभ हो सकता है। अपनी सेहत का खास ध्यान रखने की जरूरत है।

कुंभ राशि

सूर्य का गोचर आपकी राशि के नौवें भाव में होने जा रहा है। इस दौरान आपके पिता के साथ संबंधों में गिरावट आ सकती है। गोचर के दौरान आप अपने खर्चों पर नियंत्रण रखें। आपको अपने विरोधियों से सावधान रहने की जरूरत है। धर्म कर्म में रुचि बढ़ेगी। मित्रों और संबंधियों से झगड़ा ना हो, इस बात का ध्यान रखें।


मीन राशि
सूर्य का गोचर आपकी राशि के 10वें भाव में होने जा रहा है। इस दौरान आपको सरकारी क्षेत्रों में लाभ मिलेगा। नौकरी पेशा लोगों का प्रमोशन हो सकता है और कोई गिफ्ट भी मिल सकता है। हालांकि आपको अपनी उत्तेजना पर इस समय काबू रखना होगा। वाहन सुख एवं राजकीय क्षेत्र से लाभ हो सकता है। अपनी सेहत का खास ध्यान रखने की जरूरत है।


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पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में गृहमंत्री अमित शाह के पोस्टर पर पोती गयी कालिख, फोटो वारयल


वाराणसी. पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में गृहमंत्री अमित शाह के पोस्टर पर कालिख पोती गयी। पोस्टर की फोटो देखते-देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गयी। पोस्टर पर कुछ लोगों ने बीएचयू छात्रसंघ बहाल करने की मांग लिखी है। केन्द्रीय गृहमंत्री 18 अक्टूबर को बीएचयू में गप्तवंशैक वीर आयोजन में शामिल होने के लिए आ रहे हैं।
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बीएचयू में होने वाले इस कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ भी शामिल होंगे। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आयोजकों ने जगह-जगह पर बड़े होर्डिग लगाये गये हैं इसकी होर्डिग पर किसी ने कालिख पोत कर फोटो को सोशल मीडिया में वायरल कर दिया है। बीएचयू का माहौल पहले से ही गरम हो चुका है। मंगलवार की रात को दवाई खरीदने में हुए विवाद के बाद एक छात्र को चोट लग गयी थी जिसके चलते रात में ही छात्रों ने हंगामा किया था और बुधवार को भी उनका आंदोलन जारी रहा है। छात्रों के आंदोलन को देखते हुए गृहमंत्री के आगमन के समय परिसर में सुरक्षा के खास बंदोबस्त किये गये हैं।
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बीएचयू में छात्राओं के प्रदर्शन के चलते पीएम नरेन्द्र मोदी को बदलना पड़ा था रास्ता
पीएम नरेन्द्र मोदी सरकार में बीएचयू की स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रही है। पिछले साल छेडख़ानी का विरोध करते हुए छात्राओं ने बड़ा आंदोलन किया था। उस समय पीएम नरेन्द्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र आये थे और डीरेका से निकल कर दुर्गाकुंड स्थित मां दुर्गा के मंदिर में दर्शन करने जा रहे थे लेकिन छात्राओं के बवाल को देखते हुए पीएम नरेन्द्र मोदी की फ्लीट का रास्ता बदलना पड़ा था उसके बाद से आये दिन बीएचयू में छात्रों का हंगामा होता है और इसे रोकने में वहा का प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है।
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बाहुबली रमाकांत यादव के चलते ही अखिलेश यादव को मिला निरहुआ का साथ


वाराणसी. सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार के लिए पुष्पेन्द्र यादव एनकाउंटर परेशानी का सबब बनता जा रहा है। अखिलेश यादव ने इसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है और योगी सरकार पर पिछड़ा वर्ग की अनदेखी का आरोप लगने लगा है। प्रदेश सरकार आसानी से विपक्ष के आरोपों का जवाब दे रही है लेकिन सरकार को उस समय तगड़ा झटका लगा जब निरहुआ ने एनकाउंटर की सीबीआई जांच की मांग कर दी।
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अखिलेश यादव की सरकार में ही दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ को यश भारती सम्मान मिला था। सपा से निरहुआ की करीबी किसी से छिपी नहीं थी लेकिन संसदीय चुनाव 2019 में अखिलेश यादव के खिलाफ निरहुआ ने आजमगढ़ संसदीय सीट से चुनाव लडऩे का ऐलान करके सबको चौका दिया था। पीएम नरेन्द्र मोदी की लहर व अमित शाह की चुनावी रणनीति के बाद भी निरहुआ अखिलेश यादव को पटखनी नहीं दे पाये थे। अखिलेश यादव को बसपा सुप्रीमो मायावती से गठबंधन का भी लाभ मिला था। अखिलेश यादव के चुनाव में विजय पाने के लगा कि आजमगढ़ से निरहुआ दूरी बना सकते हैं लेकिन ऐसा नहीं हुआ। चुनाव हारने के बाद भी निरहुआ सक्रिय बने हुए थे। अखिलेश यादव ने अपने संसदीय क्षेत्र के सुरक्षित बनाने के लिए बाहुबली रमाकांत यादव की पार्टी में वापसी करा दी। इसके बाद निरहुआ की राजनीति और भंवर में फंस गयी है इसलिए उन्हें ऐसा बयान देना पड़ा।
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जानिए निरहुआ ने क्यों पुष्पेन्द्र यादव एनकाउंटर की सीबीआई जांच की मांग की
अखिलेश यादव इन दिनों सपा के परम्परागत वोटरों को सहेजने में जुटे हुए हैं। इसी कड़ी से पुष्पेन्द्र यादव एनकाउंटर को लेकर सपा के चलाये जा रहे आंदोलन को जोड़ कर देखा जा रहा है। बीजेपी ने सपा के परम्परागत यादव वोटरों में सेंधमारी के लिए ही निरहुआ को प्रत्याशी बनाया था। भोजपुरी स्टार होने के चलते निरहुआ को यादव समाज के अतिरिक्त अन्य बिरादरी में जबरदस्त क्रेज है। निरहुआ जानते हैं कि यादव समाज से जुड़े मुद्दो पर वह चुप्पी साधे रहेंगे तो बड़ा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा। इसके चलते निरहुआ ने पार्टी के विपरित जाते हुए पुष्पेन्द्र यादव एनकाउंटर की सीबीआई जांच की मांग की है। निरहुआ जानते हैं कि वह बीजेपी के नेता है और यूपी में उनकी पार्टी की सरकार है। पुष्पेन्द्र यादव एनकाउंटर की गुंज आजमगढ़ में भी सुनायी दे रही है। ऐसे में निरहुआ ने सीबीआई जांच की मांग करते आजमगढ़ की जनता की नाराजगी दूर करने का प्रयास किया है जो अखिलेश यादव के बाद रमाकांत यादव को बड़ा नेता मानती है।
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सपा में वापसी का खुला रहेगा विकल्प
राजनीति में कोई स्थायी दोस्त व दुश्मन नहीं होता है। कभी मुलायम सिंह यादव के खास माने जाने वाले रमाकांत यादव ने उन्ही के खिलाफ चुनाव लड़ा था। बीजेपी में रहनेे के बाद रमाकांत यादव ने राहुल गांधी व प्रियंका गांधी की कांग्रेस से नाता जोड़ा था और फिर सपा में वापसी की है। ऐसे में निरहुआ भी सभी विकल्प खुला रखना चाहते हैं। निरहुआ के बयान पर सपा में खुशी की लहर है।
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बसपा के बाहुबली सांसद अतुल राय गये जेल तो बीजेपी नेता ने खुद को घोषित किया एमपी, मचा हड़कंप


वाराणसी. बाहुबली मुख्तार अंसारी के खास माने जाने वाले घोसी सांसद अतुल राय के जेल जाने के बाद बीजेपी नेता ने खुद को सांसद घोषित कर दिया है। बुधवार को कोपागंज में चुनावी जनसभा में घोसी के पूर्व सांसद व बीजेपी नेता हरिनारायण राजभर ने कहा कि हम ही यहां के लोकसभा के सांसद है। चुनाव 2019 में चार लाख लोगों ने मुझे वोट दिया था और उपविजेता होने का सर्टिफिकेट भी मेरे पास है। बीजेपी नेता के इस बयान से हड़कंप मचा हुआ है।
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पूर्व सांसद हरिनारायण राजभर ने कहा कि यहां के सांसद जेल में है इसलिए मैं ही घोसी का सांसद हूं और सभी लोग काम कराने के लिए मेरे पास आये। पूर्व सांसद हरिनारायण राजभर के बयान से यहां पर राजनीति तेज हो गयी है। घोसी सदर सीट पर उपचुनाव होने वाला है ऐसे में सीएम योगी आदित्यनाथ की रैली से पहले ही बीजेपी नेता ने जनसभा को संबोधित करते हुए यह बयान दिया है।
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जेल में बंद है अतुल राय, सांसदी चुनाव में विजय पाने के बाद नहीं ले पाये हैं शपथ
बाहुबली मुख्तार अंसारी के घास माने जाने वाले अतुल राय ने घोसी संसदीय सीट से चुनाव जीता है। पीएम नरेन्द्र मोदी की लहर के बाद भी बीजेपी प्रत्याशी हरिनारायण राजभर यहां से चुनाव नहीं जीत पाये हैं। बीजेपी इस सीट से ओमप्रकाश राजभर को चुनाव लड़ाना चाहती थी लेकिन उन्होंने चुनाव लडऩे से इंकार कर दिया था इसके बाद फिर से हरिनारायण राजभर को टिकट देना पड़ा था। जबकि अखिलेश यादव व मायावती के गठबंधन के तहत बसपा से अतुल राय को टिकट मिला था। नामांकन के बाद ही यूपी कॉलेज की पूर्व छात्रा ने अतुल राय पर रेप करने का आरोप लगाते हुए लंका पर मुकदमा दर्ज कराया था इसके बाद अतुल राय फरार हो गये थे और फरार रहते हुए भी घोसी संसदीय सीट से चुनाव जीता। चुनाव में विजय पाने के बाद बाहुबली सांसद अतुल राय ने कोर्ट में सरेंडर किया था इसके बाद से वह बनारस जेल में है। अतुल राय ने संसद जाकर शपथ ग्रहण करने के लिए कोर्ट में याचिका दायर की थी जो खारिज हो गयी थी।
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आम आदमी पार्टी जुटी चुनाव तैयारी में, योगी के अफसरों के खिलाफ खोला मोर्चा


वाराणसी. मिशन यूपी फतह के तहत आम आदमी पार्टी ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी कार्यकर्ता और नेता विभिन्न मुद्दों पर सरकार और स्थानीय प्रशासन को घेरने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में पार्टी ने दो दिनों से पिंडरा तहसील पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है।

पार्टी नेताओं की मांग ग्राम पंचायतों में लोकतंत्र कायम करना है। इसके तहत उन्होंने ग्राम प्रधानों की कार्य-प्रणाली पर ही हमला बोला है। पार्टी नेताओं का कहना है कि ग्राम प्रधान पूरी तरह से निरंकुश हो गए हैं। ऐसे में इनके खिलाफ सत्याग्रह शुरू किया गया है। यह सत्याग्रह रात-दिन चल रहा है।

सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे जिला संगठन संयोजक अरविंद पटेल ने प्रशासन से मांग की है कि दिसंबर 2019 से पूर्व होने वाली ग्राम सभा की बैठको में उत्तर प्रदेश पंचायत विधी (संशोधन) विधेयक 1994 की धारा 11(1), 11(2), 11(3),11(4) व 11(5) के प्राविधानो का पालन हो और बैठक की विडियोग्राफी कराई जाय।

वहीं पार्टी के जिला सचिव जे पी यादव ने कहा कि ग्रामसभा की खुली बैठके होनी चाहिए जिससे विकास कार्यो में पारदर्शिता बनी रहे।
सत्याग्रह आंदोलन में पिंडरा विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष अमर सिंह, एस पी गुप्ता, दिनेश यादव, सुबाष चंद्र वर्मा, मायाशंकर पटेल, कालीचरण, शुभम राय, बसंता राजभर, शैलेंद्र यादव आदि शामिल रहे।


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दीपावली पर बन रहा सर्वार्थ सिद्धि का योग, इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा, घर आएंगी मां लक्ष्मी


वाराणसी. दीपावली दीपों का त्योहार है। इस दिन मां लक्ष्मी घर में आती हैं। मान्यता है कि जिस घर में रोशनी होती है मां लक्ष्मी वहीं निवास करती हैं। इस साल दीपावली 27 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दीपावली पर सर्वार्थ सिद्धि का योग बन रहा है। दीपावली पर देव, गुरु, बृहस्पति और न्याय के देवता शनि कृपा दृष्टि बरसाएंगे। पुष्य नक्षत्र का योग इस दीपावली को बेहद खास और शुभदायी बनाने जा रहा है।

पुराणों के अनुसार जब भगवान श्री राम रावण का वध करके अयोध्या वापस लौटे तो उस समय भगवान राम का अयोध्या वासियों ने उनका दीप जलाकर स्वागत किया था। जिसके बाद इस त्योहार को प्रत्येक साल दिवाली के रूप में मनाया (Celeberate Diwali) जाने लगा। दीवाली के त्योहार को असत्य पर सत्य की जीत के रूप में मनाया जाता है। दीवाली के दिन भगवान गणेश और मां लक्ष्मी के साथ -साथ भगवान कुबेर की भी पूजा की जाती है।

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दिवाली पर लक्ष्मी पूजा मुहूर्त – शाम 7 बजकर 15 मिनट से 8 बजकर 36 मिनट तक
प्रदोष काल- शाम 6 बजकर 4 मिनट से 8 बजकर 36 मिनट तकवृषभ काल- शाम 7 बजकर 15 मिनट से 9 बजकर15 मिनट तक दिवाली 2019 चौघड़िया / लक्ष्मी पूजा चौघड़िया 2019


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बनारस में नहीं रुक रहा ठेकेदारों की मौत का सिलसिला, एक और ने फासी लगा कर दी जान


वाराणसी. बनारस में ठेकेदारों का आत्महत्या करने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। लंका थाना क्षेत्र के कंचनपुर स्थित इंद्रानगर में रहने वाले ठेकेदार मनोज सिंह (45) का फंदे पर लटकता हुआ शव मिला। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़ कर शव को निकाल कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। शव के पास से कोई सुसाइट नोट नहीं मिला है। दो साल से काम नहीं मिलने से ठेकेदार परेशान था। पुलिस का कहना है कि मृतक को शराब पीने की आदत थी।
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मनोज सिंह इन्द्रानगर स्थित एक तीन मंजिले मकान में किराये पर रहता था पहले वह डीरेका में ठेकेदारी करता था। लेकिन दो साल से उसकी ठेकेदारी बंद थी। ें मनोज की पत्नी व दो बच्चे गांव में अपने नाना व नानी के यहां रहते थे। काम बंद होने से मनोज बहुत परेशान था और शराब पीने लगा था। स्थानीय लोगों ने बताया कि मौत से पहले मनोज किसी से फोन पर बात कर रहा था और फिर कमरे में सोने चला गया। दूसरे दिन सुबह उसके माता-पिता पहुंचे तो देखा कि कमरा अंदर से बंद था। खिड़की से देखा तो मनोज का फंदे से लटकता हुआ शव दिखा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने कमरे का दरवाजा तोड़ कर शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
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ठेकेदार अवधेश श्रीवास्तव के सुसाइड करने से मचा था हड़कंप
पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में उस समय हड़कंप मच गया था जब शहर के बड़े ठेकेदार अवधेश श्रीवास्तव ने बकाया भुगतान नहीं होने पर पीडब्ल्यूडी के कार्यालय में गोली मार कर आत्महत्या कर ली थी। इस घटनाक्रम ने सीएम योगी आदित्यनाथ के अधिकारियों की कलई खोल दी थी। तीन अधिकारियों को जेल जाना पड़ा था जबकि अन्य फरार हो गये थे। बाद में यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद जलकल के ठेकेदार विनय श्रीवास्तव ने बकाया नहीं मिलने पर सुसाइड करने की कोशिश की थी और चिकित्सकों ने किसी तरह से उनकी जान बचायी।
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Dhanteras 2019: 25 अक्टूबर को पड़ रहा धेनतरस, इस शुभ मुहूर्त खरीदे ये चीजे, होगा धन लाभ


वाराणसी. कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है और इसी दिन से दिवाली के महापर्व की शुरुआत भी हो जाती है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान धनवंतरी का जन्म हुआ था। इसलिए इसे धनतेरस के त्योहार के रुप में मनाया जाता है। इसके अलावा इस दिन माता लक्ष्मी और कुबेर की भी पूजा होती है। इस बार धनतेरस 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा।


धनतेरस पर सोने की खरीदारी शुभ
धनतेरस पर खरीदारी करने का शुभ मुहूर्त 25 अक्टूबर शुक्रवार को 7:08 बजे से शुरू होकर 26 अक्तूबर शनिवार दोपहर 3:47 बजे तक रहेगी। धनतेरस के दिन बर्तन व अन्य कई तरह की चीजें खरीदने की परंपरा और मान्यता है। इस दिन सोने की खरीदारी सबसे शुभ मानी जाती है। धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर और यमदेव की पूजा का विशेष महत्व है। पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 7:08 बजे से रात 8:14 बजे तक है।

धनतेरस का शुभ मुहूर्त
शाम 7:10 से 8:15 तक
अवधि 1 घंटे 5 मिनट
प्रदोष काल शाम 5:42 से 8:15 बजे तक

यह खरीदना होगा शुभ

तारीख योग शुभ वस्तु
18 अक्तूबर रोहिणी नक्षत्र हीरा या हीरे से बने आभूषण
19 अक्तूबर रवि योग इलेक्ट्रॉनिक सामान, वाहन
20 अक्तूबर रवि योग, त्रिपुष्कर योग खाद्य सामग्री, सजावटी सामान
21 अक्तूबर सोम पुष्य सर्वार्थ सिद्धि चांदी के बर्तन
22 अक्तूबर मंगल पुष्य, सर्वार्थ सिद्धि जमीन, मकान
25 अक्तूबर धनतेरस सर्वार्थ सिद्धि बर्तन समेत सभी सामान
27 अक्तूबर दीपावली सोना-चांदी, सिक्के, लक्ष्मी प्रतिमा


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मऊ ब्लास्ट में सामने आया चौकाने वाला खुलासा, 13 लोगों की गयी थी जान


वाराणसी. मऊ के मुहम्मदाबाद गोहना कोतवाली के वालीदपुर के बिचलपुरा क्षेत्र में हुए ब्लास्ट से १३ लोगों की मौत प्रकरण में चौकाने वाली जानकारी सामने आयी है। जिला प्रशासन का दावा है कि गैस सिलेंडर में रिसाव के बाद स्वीच ऑन करने से यह हादसा हुआ है, जबकि हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के एरिया मैनेजर अंबरेश कुमार की माने से रसोई गैस के रिसाव और सिलेंडर फटने से इस तरह का हादसा नहीं हो सकता है। बयान से साफ हो जाता है कि सभी अधिकारी एक ही बात नहीं बोल रहे हैं जिससे ब्लास्ट को लेकर ऐसी और बाते हैं जिनका खुलासा होना बाकी है। एक खास बात और कि मकान के मलबे में सिलेंडर का टुकड़ा नहीं मिला है।
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एचपीसीएल के एरिया मैनेजर से औपचारिक रुप से बताया कि सिलिंडर रिसाव के बाद गैस अधिकतम पांच फीट उपर तक ही रह जाती है जबकि जिलाधिकारी ने कहा कि सिलेंडर से गैस रिसाव के बाद स्वीच ऑन करने से विस्फोट हुआ होगा। सिलेंडर से गैस इतनी निकल चुकी थी कि वह प्राकृतिक हवा के साथ मिल कर हल्की हो गयी होगी। इससे उसकी तीव्रता बढ़ गयी होगी। फिलहाल मऊ ब्लास्ट में नयी जानकारी आने के बाद से यह हादसा के कारणों पर संशय के बादल छा गये हैं।
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एटीएस को दी गयी है जांच की जिम्मेदारी
मऊ ब्लास्ट की जिम्मेदारी एटीएस को दी गयी है। इस तरह की घटना की जांच एटीएस को देना भी बड़ा सवाल खड़ा करता है एक तरफ जिला प्रशासन का दावा है कि सिलेंडर ब्लास्ट से दो मंजिला मकान जमीदोज हुआ था जिसमे 13 लोगों की मौत हो गयी थी और 22 लोग घायल हो गये थे। शासन का उद्देश्य एटीएस को लगाने के पीछे उन कारणों का पता करना है, जिससे इतना बड़ा हादसा हुआ है। शासन यह पता करना चाहती है कि मकान में सिलेंडर से ही ब्लास्ट हुआ है या फिर वहा कुछ और होता था।
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सिलेंडर फटने पर पीडि़तों को मिलता है मुआवजा, बीमा कंपनी ने शुरू किया सर्वे
सिलेंडर फटने से किसी की मौत होती है या वह घायल हो जाता है तो पीडि़त या उसके परिजनों को मुआवजा दिया जाता है। बीमा कंपनी ने मऊ प्रकरण को लेकर सर्वे शुरू कर दिया है और सिलेंडर ब्लास्ट से मौत होने की पुष्टि हो जाती है तो लोगों को मुआवजा मिलेगा। एसपीसीएल गहनता से सारे मामले की जांच में जुटी है। कंपनी के अधिकारी ने बताया कि गैस सिलेंडर की रि-फिलिंग के पहले तिमाही जांच की जाती है।
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सिलेंडर में हुआ था ब्लास्ट तो कहा गया उसका टुकड़ा
एक तरफ तो सिलेंडर ब्लास्ट का दावा किया जा रहा है तो दूसरी तरफ मलबे में अभी तक सिलेंडर के टुकड़े नहीं मिलने से जांच उलझ गयी है। सिलेंडर का टुकड़ा मलबे में खो गया है या फिर वहां नहीं है। बैंक अधिकारी का बयान व सिलेंडर का टुकड़ा अभी तक नहीं मिलना यह संकेत देता है कि जो दावा किया जा रहा है वह पुख्ता नहीं है।
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कांग्रेस की नई रणनीतिः मुसलमान फोकस में नहीं, भाजपा के नए वोटरो में सेंधमारी की तैयारी


वाराणसी. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने आगामी 2022 के विधानसभा को लेकर अपनी रणनीति लगभग तय कर ली है। उनके निशाने पर सपा-बसपा नहीं बल्कि सीधे भाजपा है। इसी को ध्यान में रख कर सारी गतिविधियां चलाई जा रही हैं। कांग्रेस की रणनीति भाजपा को यूपी की सियासत में फिर से तीसरे-चौथे नंबर तक धकेलना है। पार्टी उसमें कितना सफल हो पाती है यह तो वक्त ही बताएगा पर जो कुछ भी पार्टी में चल रहा है उसका सीधा सा आंकलन यही किया जा रहा है।

वैसे भी प्रियंका के नेतृत्व में यूपी कांग्रेस लगातार भाजपा पर हमले कर रही है। यूपी सरकार पर वार करने का एक भी मौका वह नहीं चूक रही। हर मुद्दे को पहले लपकना फिर बीजेपी सरकार पर करारी चोट करना प्रियंका और उनकी टीम का एक मात्र लक्ष्य है। वो किसी राष्ट्रीय मुद्दे पर बात भी कम ही कर रही हैं। निशाना पूरी तरह से यूपी के सिंहासन पर है।

कांग्रेस ने मंगलवार को जिन 48 जिला व 3 शहर अध्यक्षों की पहली सूची जारी की है वह भी प्रियंका और यूपी कांग्रेस की रणनीति का खुलासा करता है। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि इस पूरी सूची पर गौर फरमाया जाय तो एक बात तो स्पष्ट है कि कांग्रेस के निशाने पर सपा-बसपा नहीं बल्कि केवल भाजपा है। राजनीतिक पंडित कहते हैं कि कांग्रेस की यह सोच हो सकती है कि अगर 2022 में सत्ता पर काबिज होने के लिए अगर कुछ सीटों की जरूरत पड़े तो सपा-बसपा से चुनाव बाद गठबंधन कर लिया जाए। इसी सोच के साथ सिर्फ भाजपा पर ही टार्गेट किया जा रहा है।

राजनीतिक पंडित बताते हैं कि इस 51 अध्यक्षों की सूची जारी की है उसे देखने से साफ लगता है कि कांग्रेस का सारा जोर उसी वोट बैंक पर है जिसे साध कर भाजपा ने पिछले 6 सालों में केंद्र से लेकर राज्य तक की सत्ता हासिल की है। कांग्रेस न मुसलमानों को विशेष तरजीह दे रही है न यादव और न ही दलितों को। उसके निशाने पर वो अदर बैकवर्ड हैं जो भाजपा के नए वोटबैंक के रूप में तब्दील हुए हैं।

यही वजह है कि 51 अध्यक्षों की सूची में मुसलमानों को इस बार कांग्रेस ने विशेष तरजीह नहीं दी है। 51 में महज 6 मुसलमान ही हैं जिन्हें जिला या शहर की कमान सौंपी गई है। सवर्णों की संख्या भी ज्यादा नहीं है। महज 8 ब्राह्मण हैं जिन्हें नेतृत्व सौंपा गया है। यादवों की संख्या भी गिनी चुनी ही है। लेकिन अदर बैकवर्ड भरे पड़े हैं। इसकी शुरूआत प्रियंका ने अजय कुमार लल्लू को प्रदेश की कमान सौंपते हुए की। उसके बाद जिला और शहर कमेटियों की कमान भी लोधी, कटियार, चौधरी, शाक्य, खटिक, कोरी, पासवान, गोंड, पटेल, निषाद आदि जातियों को सौंपी गई है।

राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि अगर प्रियंका और कांग्रेस अपनी इस रणनीति में सफल हो जाती है तो यह भाजपा के लिए बड़ा झटका होगा। ये ही वो वोटबैंक हैं जिनके दम पर भाजपा का वोट शेयर भी बढ रहा है। वो कहते हैं कि पहले भी ये ही वोटर रहे जिनके दम पर कांग्रेस अपना परचम लहराती रही है।


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