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रूस ने रचा इतिहास, पहली बार अंतरिक्ष में भेजा इंसान जैसा दिखने वाला रोबोट 'फेडोर'


मॉस्को। नई तकनीक और आधुनिक हथियारों के विकास में शामिल महत्वपूर्ण देशों में से एक रूस ने एक बार फिर से एक नया इतिहास रचा है। रूस ने गुरुवार को अंतरिक्ष में एक मानवरहित रॉकेट भेजा है। बड़ी बात यह है कि इस रॉकेट के साथ रूस ने इंसान जैसा दिखने वाला एक आदमकद रोबोट भी भेजा है।

इस रोबोट का नाम 'फेडोर' है। फेडोर अंतरिक्ष यात्रियों की मदद करेगा। इसके लिए 'फेडोर' पहले अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र ( ISS ) में 10 दिन का प्रशिक्षण लेगा।

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बता दें कि अंतरिक्ष में भेजा गया रूस की ओर से यह पहला रोबोट है। रूस के समयानुसार 'फेडोर’ को सुबह 6:58 पर कजाकिस्तान के बैकनूर प्रक्षेपण केंद्र से ‘सोयूज एमएस-14’ अंतरिक्ष यान के जरिए रवाना किया गया। ‘सोयूज एमएस-14’ शनिवार को फेडोर को लेकर अंतरिक्ष पहुंचेगा। 'फेडोर' सात सितंबर तक अंतरिक्ष में रहेगा।

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'फेडोर' ने कहा 'चलो चलते हैं’

मालूम हो कि ‘सोयूज एमएस-14’ आम तौर पर अपने साथ अंतरिक्ष यात्रा के दौरान किसी इंसान को लेकर जाते हैं। लेकिन यह पहली बार है जब ‘सोयूज एमएस-14’ ने गुरुवार को अपने साथ किसी इंसान को लेकर नहीं गया।

‘सोयूज एमएस-14’ में इस बार एक रोबोट 'फेडोर’ को भेजा गया है। रॉकेट की पायलट सीट पर किसी अंतरिक्ष यात्री की जगह 'फेडोर' को बैठाया गया। इतना ही नहीं, 'फेडोर’ के हाथ में रूस का राष्ट्रीय ध्वज भी था।

जब यान लॉंच के लिए तैयार था, तब 'फेडोर’ ने कहा कि, ‘चलो चलते हैं, चलो चलते हैं।’ मालूम हो कि अंतरिक्ष में जाने वाले पहले यात्री यूरी गगारिन ने भी रवाना होने से पहले यही वाक्य ‘चलो चलते हैं, चलो चलते हैं’ कहा था।

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गौरतलब है कि 2011 में नासा ने जनरल मोटर्स के साथ विकसित एक ह्यूमनॉइड रोबोट रोबोनॉट 2 को भेजा, जिसका उच्च जोखिम वाले वातावरण में काम करने का एक समान उद्देश्य था। हालांकि 2018 में तकनीकी समस्याओं का सामना करने के बाद इसे पृथ्वी पर वापस लाया गया था।

2013 में जापान ने ISS के पहले जापानी अंतरिक्ष कमांडर के साथ किरोबो नामक एक छोटा रोबोट भेजा। टोयोटा के साथ विकसित यह रोबोट जापानी में विशेष रूप से बातचीत करने में सक्षम था।

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पुतिन ने ट्रंप को दी चेतावनी, कहा- अमरीका के नए मिसाइल परीक्षण का जवाब देगा रूस


हेलसिंकी। रूस और अमरीका के बीच बनते-बिगड़ते रिश्तों के बीच एक बार फिर से दोनों देशों में तनाव बढ़ गया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बयान में कहा है कि अमरीका ने हाल के दिनों में जो भी कदम उठाए हैं उससे नए खतरे पैदा हो गए हैं।

पुतिन ने धमकी भरे अंदाज में कहा कि अमरीका के हर कदम का जवाब मॉस्को में दिया जाएगा। बता दें कि अमरीका ने हाल में एक नई मिसाइल का परीक्षण किया है।

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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, फिनलैंड के राष्ट्रपति साउली निनिस्टो के साथ बुधवार को एक साक्षा प्रेस वार्ता के दौरान पुतिन ने अमरीका पर आरोप लगाए।

उन्होंने कहा कि 1987 के इंटरमीडियट-रेंज न्यूक्लियर फोर्स ( INF ) संधि को औपचारिक रूप से त्यागने के तीन सप्ताह से भी कम समय के भीतर अमरीका ने नए हथियार का परीक्षण कर रूसी सरकार को निराश किया है।

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रूस की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता: पुतिन

पुतिन ने आगे कहा कि संधि को छोड़ने के तुरंत बाद ही अमरीका ने सी-लॉन्च मिसाइल का परीक्षण किया। इसका सीधा मतलब है कि अमरीका इस कदम को लेकर पहले से ही तैयारी कर रहा था।

पुतिन ने कहा कि रूस के लिए अमरीकी परीक्षण नए खतरों के उभरने का संकेत देता है, जिस पर हम अपने हिसाब से जवाब देंगे।

पुतिन ने अपने देश के हित पर जोर दिया और कहा कि अब रूस की सुरक्षा सुनिश्चित करना ही उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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उन्होंने कहा कि आईएनएफ संधि के तहत, अमरीका और तत्कालीन सोवियत संघ ने 500-5,471 किलोमीटर की सीमा के साथ भूमि आधारित मिसाइलों के निर्माण और तैनाती से इनकार करने के लिए सहमति व्यक्त की थी। इस कदम से शॉर्ट नोटिस पर दोनों देशों के लिए परमाणु हमले शुरू करना बहुत मुश्किल हो गया था।

बता दें कि 2016 में अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में कथित तौर पर रूस की भूमिका को लेकर दोनों देशों में काफी टकराव चल रहा है। अमरीका में विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी ने आरोप लगाया था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव प्रचार के दौरान रूस ने उनकी मदद की थी।

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ऑस्ट्रेलिया के पूर्व उप प्रधानमंत्री टिम फिशर का 73 वर्ष की आयु में निधन


सिडनी। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व उप प्रधानमंत्री टिम फिशर ( Former deputy prime minister Tim Fischer ) का 73 वर्ष की आयु में निधन हो गया। ऑस्ट्रेलिया के एक राष्ट्रीय नेता के तौर पर पहचान बना चुके टिम फिशर बीते 10 वर्षों से ल्यूकेमिया और कैंसर से जूझ रहे थे। गुरुवार को दक्षिणी एनएसडब्ल्यू अस्पताल में उनका निधन हो गया।

फिशर के परिवार में उनकी पत्नी जूडी और दो बेटे डोमिनिक और हैरिसन हैं। फिशर के परिवार वालों ने बताया कि उनका इलाज एल्बरी वोडोंगा कैंसर सेंटर में चल रहा था।

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2016 में टिम फिशर को पता चला कि वे माइलॉयड ल्यूकेमिया जैसे गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, लेकिन इससे पहले वे मूत्राशय और प्रोस्टेट कैंसर से जूझ रहे थे।

बताया जाता है कि टिम फिशर ने 1996 में पोर्ट आर्थर हत्याकांड के बाद सख्त बंदूक कानून बनाने के लिए पूर्व प्रधान मंत्री जॉन हावर्ड ( former prime minister John Howard ) की सहायता करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

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24 साल की उम्र में बने थे सांसद

टिम फिशर 24 साल की उम्र में राज्य के सांसद बन गए थे। संघीय राजनीति में प्रवेश करने से पहले उन्होंने फर्र ( Farrer ) के मतदाताओं की सेवा के लिए संघीय राजनीति में प्रवेश करने से पहले स्टर्ट और मरे की सीटों पर उन्होंने काम किया।

फिशर ने 1990 से 1999 तक देश के नेता के रूप में सेवा की। 1996 से 1999 तक वे हावर्ड सरकार में उप प्रधान मंत्री रहे। हालांकि जब उन्होंने उप प्रधान मंत्री के रूप में इस्तीफा दिया, तो श्रमिक नेता किम बेज़ले ने उन्हें 'इस स्थान पर वास्तव में प्यार करने वाले लोगों में से एक' के रूप में वर्णित किया था।

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बाद में टिम फिशर ने पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए 2001 में राजनीति छोड़ दी। 2001 में राजनीति छोड़ने के बाद वे पर्यटन ऑस्ट्रेलिया के अध्यक्ष बने। प्रधानमंत्री केविन रुड ने तब उन्हें रोम में होली सी ( Holy See ) में ऑस्ट्रेलियाई राजदूत नियुक्त किया।

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लंदन में पाकिस्तान के रेल मंत्री पर हमला, लोगों ने फेंके अंडे, चलाए लात-घूंसे


लंदन। पाकिस्तान जब-जब विदेश की धरती पर कदम रखता है, तब-तब कुछ न कुछ ऐसा हो जाता है जिससे उसकी किरकिरी होती है। ताजा मामला लंदन से सामने आया है। यहां अपने विवादित बयानों के कारण अक्सर चर्चा में रहने वाले पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख रशीद को लंदन में घूंसे मारे गए और उन पर अंडे फेंके गए। इस बारे में पाकिस्तानी मीडिया से जानकारी मिल रही है।

होटल के बाहर हुआ हमला

पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अवामी मुस्लिम लीग के प्रमुख और रेल मंत्री शेख रशीद पर एक होटल के बाहर हमला किया गया। रशीद लंदन के इस होटल से एक पुरस्कार समारोह से भाग लेकर निकल रहे थे। बताया जा रहा है कि उन पर हमला करने वाले लोग तुरंत ही मौके से फरार हो गए।

इस पार्टी ने ली जिम्मेदारी

इसके बाद बुधवार को पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) से संबद्ध पीपुल्स यूथ आर्गनाइजेशन यूरोप के अध्यक्ष आसिफ अली खान और पार्टी की ग्रेटर लंदन महिला शाखा की अध्यक्ष समाह नाज ने एक बयान जारी कर हमले की जिम्मेदारी ली। उन्होंने कहा कि रशीद ने पीपीपी प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया था, जिसके विरोध में उन्होंने यह कदम उठाया। हालांकि, उन्होंने रशीद पर केवल अंडा फेंकने की बात अपने बयान में कही।

दर्ज कराया जाएगा मामला

दोनों नेताओं ने कहा कि शेख रशीद को उनका अहसानमंद होना चाहिए कि उन्होंने उनके खिलाफ 'विरोध जताने के लिए ब्रिटेन के अंडा फेंकने के सभ्य तरीके का ही केवल इस्तेमाल किया।' अवामी मुस्लिम लीग ने कहा है कि इस घटना का कोई वीडियो उपलब्ध नहीं है लेकिन दोनों नेताओं ने खुद ही हमले की बात मानी है। पार्टी पुलिस में मामला दर्ज कराने पर विचार कर रही है।


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370 पर बौखलाए पाक का बड़ा फैसला, टीवी चैनलों पर भारतीय कंटेंट के प्रसारण पर लगाई रोक


गुजरांवाला। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद तिलमिलाए पाकिस्तान ने भारत को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर घेरने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे। बौखलाए पाकिस्तान ने एक के बाद एक बड़े फैसले लेते हुए भारत के साथ राजनयिक संबंधों को खत्म कर दिया।

अब एक बार फिर से पाकिस्तान ने एक बड़ा फैसला लिया है। पाकिस्तान ने अपने यहां भारतीय फिल्मों, टीवी शो व अन्य भारतीय कार्यक्रमों के प्रसारण पर रोक लगा दी है। इस पर अमल के लिए पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण ने केबल ऑपरेटरों को चेतावनी दी है कि टीवी पर भारतीय कंटेंट को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

एक्सप्रेस न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, प्राधिकरण के चेयरमैन सलीम बेग ने गुजरांवाला स्थित प्राधिकरण के कार्यालय पर केबल ऑपरेटरों से मुलाकात की और उनसे कहा कि केबल पर भारतीय चैनल बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।

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उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई ऑपरेटर भारतीय चैनल या अन्य कंटेंट प्रसारित करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सलीम बेग ने कहा कि भारतीय चैनल और भारतीय विज्ञापन दिखाने वाले का न सिर्फ लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा बल्कि उसके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा।

वहीं 'जंग' की रिपोर्ट के मुताबिक, प्राधिकरण के चेयरमैन ने लाहौर में केबल ऑपरेटरों से मुलाकात की। मुलाकात के बाद ऑपरेटरों ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उन्होंने चेयरमैन को आश्वस्त किया है कि केबल पर कोई भी गैरकानूनी चीज नहीं दिखाई जाएगी।

उन्होंने कहा कि भारतीय टीवी चैनलों का बॉयकाट किया जाएगा और केबल पर 'कश्मीर बनेगा पाकिस्तान' का लोगो प्रसारित किया जाएगा।

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पाकिस्तान ने उठाए हैं कई कदम

बता दें कि पाकिस्तान धारा 370 खत्म होने के विरोध में भारत के खिलाफ कई कदम उठाए हैं। इससे पहले पाकिस्तान ने एक के बाद एक कई घोषणा करते हुए भारत के साथ राजनयिक और व्यापारिक संबंध तोड़ लिए।

पाकिस्तान ने अपने क्षेत्र में बॉलीवुड फिल्मों की स्क्रीनिंग पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके अलावा समझौता एक्सप्रेस को भी निलंबित कर दिया।

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भारतीय राजदूत अयज बिसारिया को पाकिस्तान ने निष्काषित कर दिया। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान से आग्रह किया था कि राजनयिक संबंधों को न तोड़ें। इसपर पाकिस्तान ने कहा था कि यदि आप कश्मीर पर लिए गए फैसले पर पुनर्विचार करें तो हम भी संबंधों को बहाल करने पर विचार करेंगे।

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कश्मीर पर तनाव के बीच करतारपुर कॉरिडोर पर पाक का बड़ा बयान, कहा- नवंबर में खुलना तय


इस्लामाबाद। कश्मीर मुद्दे पर तनाव के बीच पाकिस्तान ने करतारपुर कॉरिडोर पर बड़ा बयान जारी किया है। पाकिस्तान ने कहा है कि तनाव बढ़ने के बावजूद वह भारत की सीमा से लगे करतारपुर गलियारे को इस साल नवंबर में खोलने के लिए प्रतिबद्ध है। इस बारे में पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के हवाले से जानकारी दी गई है।
बता दें कि इस सीमावर्ती गलियारे के खुलने से सिख श्रद्धालु बिना वीजा के पाकिस्तान स्थित करतारपुर साहिब मत्था टेकने जा सकेंगे।

जल्द होगी इससे संबंधित बैठक

स्थानीय मीडिया ने पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता डॉ. मोहम्मद फैसल के हवाले से बताया कि इस इस मामले में जल्द ही एक बैठक बुलाई जाएगी। प्रवक्ता ने अपने साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि पाकिस्तान बाबा गुरु नानक जी की 550वीं जयंती पर करतारपुर कॉरिडोर को खोलने के लिए प्रतिबद्ध है। आपको बता दें कि सिखों के बेहद पवित्र तीर्थस्थलों में से एक करतारपुर साहिब गुरुद्वारा भारतीय सीमा से महज चंद किलोमीटर की दूरी पर पाकिस्तान में स्थित है। इस गलियारे से सिख श्रद्धालुओं को बिना वीजा गुरुद्वारे तक जाने की इजाजत होगी।

भारत के रूख पर पाकिस्तान को शक

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि कश्मीर मामले में पैदा ताजा विवाद के बावजूद पाकिस्तान तो गलियारे को लेकर पूर्व कार्ययोजना पर कायम है लेकिन 'यह साफ नहीं है कि क्या भारत भी इस परियोजना को लेकर पहले की तरह प्रतिबद्ध है या नहीं?' इसके साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिंधु जल समझौते का भी जिक्र आया। एक सवाल के जवाब में प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने अभी तक सिंधु जल समझौते का नवीकरण नहीं किया है।

पाक में फंसे भारतीयों की करेंगे मदद

साथ ही भारत से रेल और बस संपर्क समाप्त करने के बाद पाकिस्तान में फंसे भारतीयों के सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्हें पाकिस्तान में किसी भारतीय के होने की जानकारी नहीं है। लेकिन अगर कोई हुआ तो उसे पूरी मदद दी जाएगी। ऐसे नागरिक पैदल वाघा सीमा के जरिए वापस जा सकते हैं क्योंकि यह सीमा खुली हुई है।


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इमरान खान ने भारत को दी परमाणु जंग की धमकी! कहा- अब बातचीत का कोई मतलब नहीं


इस्लामाबाद। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद बौखलाए पाकिस्तान ने अब नया पैंतरा आजमाना शुरू कर दिया है। पूरी दुनिया में अलग-थलग पड़ चुके इमरान खान ने भारत के खिलाफ फिर से तीखी बयानबाजी की है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने बुधवार को कहा कि भारत के साथ बातचीत करने का कोई मतलब नहीं है, और वे बातचीत करने की अपील नहीं करेंगे। इतना ही नहीं इमरान खान ने भारत को फिर से परमाणु युद्ध की धमकी दी है।

एक विदेशी मीडिया के साथ बातचीत करते हुए इमरान खान ने कहा कि मैंने भारत से बातचीत के लिए बार-बार अपील की और अनुरोध किया लेकिन भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर बार नजरअंदाज किया।

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अमरीकी अखबार 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' के साथ बातचीत में इमरान खान ने कहा कि अब भारत के साथ बातचीत करने का कोई फायदा नहीं है। मैंने बातचीत करने की सभी कोशिशें कर ली है और अब पीछे मुड़कर नहीं देखुंगा।

उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान की ओर से किए गए अब तक के सभी प्रयास विफल साबित हुए हैं। हम शांति स्थापित करने के लिए इससे ज्यादा कुछ और नहीं कर सकते हैं।

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इमरान ने पीएम मोदी को बताया फासीवादी

बता दें कि बातचीत के दौरान इमरान खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फासीवादी और हिन्दूवादी करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी मुस्लिम बहुल कश्मीर को हिन्दू बहुल इलाके में बदलना चाहते हैं, इसलिए जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को बटाया गया है।

इमरान खान यहीं नहीं रूके, उऩ्होंने एक प्रोपैगैंडा फैलाते हुए आरोप लगाया कि भारत कश्मीर में फर्जी ऑपरेशन चला रही है, जिससे की पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई करने का आधार मिल सके। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ तो पाकिस्तान भी जवाब देने के लिए मजबूर होगा।

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बातचीत में इमरान खान ने युद्ध की धमकी देते हुए कहा कि दोनों देश परमाणु शक्ति संपन्न हैं, ऐसे में कुछ भी हो सकता है। बता दें कि अमरीका में भारतीय राजदूत हर्षवर्धन श्रृंगला ने इमरान के सभी बातों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि हमने जब-जब शांति की तरफ कदम आगे बढ़ाया, हमारे लिए बुरा साबित हुआ है। हम पाकिस्तान से आतंकवाद के खिलाफ विश्वसनीय और ठोस कार्रवाई की उम्मीद करते हैं।

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ग्रीनलैंड डील कैंसिल होने पर मायूस ट्रंप, रद्द की अपनी डेनमार्क यात्रा


ओडेंसे। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ग्रीनलैंड यात्रा को स्थगित कर दी है। ग्रीनलैंड खरीदने का सपने देखकर यात्रा की योजना बनाने वाले ट्रंप ने डील न होने के कारण यात्रा रद्द कर दी है। दरअसल, डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने साफ कह दिया था कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है। यात्रा कैंसिल करने के बारे में ट्रंप ने एक ट्वीट से जानकारी दी है।

ट्रंप ने किया ट्वीट

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्वीट में डेनमार्क को अद्भुत देश लिखा कि, 'डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने ग्रीनलैंड बेचने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है। इसलिए मैंने डेनिश पीएम से मुलाकात स्थगित करने का फैसला किया है।' इसके बाद ट्रंप ने एक अन्य ट्वीट में लिखा कि,'डेनमार्क के लोग अद्भुत हैं। यह एक खास देश है।'

डेनिश प्रधानमंत्री का जवाब

वहीं, डेनिश प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने ग्रीनलैंड बेचने की बात पर जवाब देते हुए कहा था, 'सब मजाक है। अब इस तरह का वक्त नहीं है कि देश खरीदा या बेचा जाए।' उन्होंने आगे कहा कि उन्हें ग्रीनलैंड की खरीददारी पर बातचीत करने में कोई दिलचस्पी नहीं है।

ट्रंप के बयान के खिलाफ उतरे लोग

आपको बता दें कि अमरीकी राष्ट्रपति के ग्रीनलैंड खरीदने के प्रस्ताव पर वहां के लोकल लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई थी। ट्रंप के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए कुछ लोगों ने इसे मजाक तो कुछ ने इसे सनक भरा बयान बताया था। जबकि, डेनिश प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि ग्रीनलैंड बेचने से संबंधित अधिकार डेनमार्क के पास नहीं बल्कि वहां के स्थानीय निवासियों का हैं। इस दौरान डेनिश प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यह द्वीप बिकाऊ नहीं है।

गौरतलब है कि ग्रीनलैंड स्वायत्त प्रभुत्व वाला क्षेत्र है। फिलहाल यह डेनमार्क के राजशाही के अधीन आता है। ग्रीनलैंड आर्कटिक और अटलांटिक महासागर के बीच कनाडा आर्कटिक द्वीपसमूह के पूर्व में स्थित है।


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नेपाल: एवरेस्ट पर प्लास्टिक के इस्तेमाल पर लगा पूर्ण प्रतिबंध


काठमांडू। एवरेस्ट क्षेत्र को 2020 तक प्लास्टिक-मुक्त क्षेत्र बनाने के लिए नेपाल ने इस क्षेत्र में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय ले लिया है। इससे धरती पर सबसे ऊंची चोटी पर लगातार बढ़ रहे प्रदूषण पर रोक लग सकेगी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार,सोलूखुंबा जिला में खुंबा पसांग ल्हामू रूरल म्यूनिसिपेलिटी की कार्यकारी परिषद ने बुधवार को यह निर्णय लिया। यह आदेश एक जनवरी 2020 से लागू होगा।

ईरान के शीर्ष नेता कश्मीरी मुस्लिमों के लिए चिंतित, जताई भारत से न्यायपूर्ण नीति अपनाने की उम्मीद

 

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नेपाल अगले साल 'विजिट नेपाल' अभियान भी शुरू करेगा, जिसका लक्ष्य कम से कम 20 लाख विदेशी पर्यटक है। अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणविदों ने चिंता जताई है कि नेपाल ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर प्रदूषण के रोकथाम के लिए कोई प्रयास नहीं किया है।

रूरल म्यूनिसिपेलिटी के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के अनुसार 30 माइक्रोन्स से कम मोटाई वाले प्लास्टिक उत्पादों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है। इन वस्तुओं में प्लास्टिक के थैले, स्ट्रॉ, सोडा और पानी की बोतलें शामिल हैं। इसके साथ ज्यादातर खाद्य पदार्थो को पैक करने वाली प्लास्टिक हैं।

उन्होंने कहा कि यहां पर प्लास्टिक की बोतलों में बंद पेय पदार्थो पर प्रतिबंध रहेगा। कानून तोड़ने वाले लोगों पर जुर्माना लगाने पर सहमति नहीं बनी है। बीते साल 56,303 विदेशी ट्रैकर्स तथा पर्वतारोहियों ने एवरेस्ट क्षेत्र का दौरा किया था।

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ईरान के शीर्ष नेता कश्मीरी मुस्लिमों के लिए चिंति​त, जताई भारत से न्यायपूर्ण नीति अपनाने की उम्मीद


नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से विभिन्न देशों ने अपने-अपने मत सामने रखे हैं। इस फैसले के दो सप्ताह बाद ईरान के शीर्ष नेता अयातुल्लाह सईद अली खमैनी ने कश्मीर में मुस्लिम समुदाय की स्थिति को लेकर चिंता जाहिर की है। खमैनी ने कहा कि ईरान भारत सरकार से कश्मीर के प्रति न्यायपूर्ण नीति अपनाने की उम्मीद करता है। उन्होंने ट्वीट करके कहा कि हम कश्मीर में मुस्लिमों की स्थिति को लेकर चिंतित हैं।

ट्रंप ने भारत से लगाई उम्मीद, अफगानिस्तान में आतंकियों से लड़ने के लिए उसका साथ दे

 

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ईरानी नेता ने मौजूदा स्थिति के लिए ब्रिटेन को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने ट्वीट करके लिखा कि कश्मीर की मौजूदा स्थिति और भारत व पाकिस्तान के बीच लेकर विवाद ब्रिटिश सरकार के द्वेषपूर्ण कदम का परीणाम है। देश को छोड़ते समय ब्रिटेन ने भारत में कईं विसंगतियां छोड़ दीं। इसके कारण कश्मीर में आज भी संघर्ष जारी है। खमैनी का बयान अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मध्यस्थता वाले बयान के बाद आया है।

गौरतलब है कि ट्रंप ने कहा था कि कश्मीर का मसला काफी उलझा हुआ है। इसका कारण हिंदू और मुस्लिम समुदाय का संघर्ष है, जो सदिया से चला आ रहा है। उन्होंने कहा कि यह मध्यस्थता के जारिए खत्म किया जा सकता है। अमरीका ने मोदी से कश्मीर में तनाव कम करने के लिये कदम उठाने का अनुरोध किया था।

वहीं, फ्रांस ने कहा कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मामला है और दोनों ही पक्षों को राजनीतिक वार्ता से मतभेदों को सुलझाना चाहिए और तनाव बढ़ाने वाला कोई भी कदम उठाने से बचना चाहिए। फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह दो देशों के बीच का मामला है और राजनीतिक वार्ता से इसको सुलझाया जाए ताकि शांति स्थापित हो सके। फ्रांस ने संबंधित पक्षों से तनाव कम करने की अपील की है।

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भारत-अमरीका के बीच हफ्तेभर में दो अहम बैठकें, इन क्षेत्रों में मिलेगी कूटनीतिक संबंधों को मजबूती


न्यूयॉर्क। अमरीका भारत के साथ अपने रिश्तों को किसी भी कीमत पर खराब नहीं करना चाहता। यही वजह है कि कश्मीर मुद्दे पर भारत के कहने पर उसने पाकिस्तान को फोन लगाकर बयानबाजियां कम करने की हिदायत कर दे डाली। यही नहीं, भारत पर लगे ईरानी प्रतिबंधों के उल्लंघन का भी अमरीका ने हाल ही में बचाव किया है।

अब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए भारत-अमरीका के बीच इस हफ्ते दो बैठकें होंगी। इस बारे में अमरीकी विदेश विभाग ने जानकारी दी है।

इस हफ्ते होंगी दो अहम बैठकें

विभाग के अनुसार, भारत और अमरीका के रक्षा तथा कूटनीतिक अधिकारी रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा विजन तैयार करने के उद्देश्य से इस हफ्ते दो अहम बैठकें करेंगे। बताया जा रहा है कि गुरुवार को दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों की कार्यकारी सहायक सचिव एलिस वेल्स और हिंद-प्रशांत मामलों के सहायक रक्षा सचिव रैनडाल कैलिफोर्निया के नेतृत्व में रक्षा और विदेश मामलों में अमरीका-भारत के दो प्लस दो अधिकारियों की आंतरिक बैठक के लिए अपने भारतीय समकक्ष से मुलाकात करने वाले हैं।

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सुरक्षा मामलों में सहयोग बढ़ाने पर जोर

विभाग ने बुधवार को कहा, 'वार्ता के दौरान, दोनों पक्ष महत्वपूर्ण कूटनीतिक और सुरक्षा मामलों में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करेंगे। इनमें स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर विचार साझा होंगे और अगली आंतरिक दो प्लस दो मंत्रिस्तरीय वार्ता के लिए तैयारियों की समीक्षा होगी।'

भारत के बाद इस साल अमरीका में हो सकती है बैठक

दोनों देशों के विदेश मामलों और रक्षा कैबिनेट के अधिकारियों की पहली दो प्लस दो मंत्रिस्तरीय बैठक पिछले साल भारत में हुई थी। इस बैठक में भारत की तरफ से दिवंगत नेता सुषमा स्वराज (तत्कालीन विदेश मंत्री) तत्कालीन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और अमरीका की तरफ से विदेश मंत्री माइक पोम्पियो तथा पूर्व रक्षा सचिव जिम मैटिस शामिल हुए थे।

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संभावना जताई जा रही है कि कैबिनेट स्तर की अगली वार्ता अमरीका में हो सकती है। शुक्रवार को अमरीका के दो अधिकारी अमरीका-भारत समुद्री सुरक्षा वार्ता के तहत भारतीय अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। बैठक में दोनों पक्ष हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री विकास पर विचार साझा करेंगे और द्विपक्षीय समुद्री सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर विचार करेंगे। गौरतलब है कि इसकी शुरुआत दिवंगत नेता मनोहर पर्रिकर ने की थी जब वे भारत के रक्षा मंत्री थे। मनोहर पर्रिकर और पूर्व विदेश सचिव एश्टन कार्टर ने दोनों देशों के बीच सामरिक सहयोग बढ़ाने के लिए यह बैठक की थी।


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न्यूजीलैंड: जब सदन में पहुंचा यह नन्हा मेहमान, बहस के बीच बेबीसिटिंग करने लगे स्पीकर


वेलिंगटन। संसद शब्द से आपके दिमाग में नेताओं के तंज, बिल के लिए बहस और तीखी बयानबाजियों का ही चेहरा सामने आता होगा। या कुछेक दिन नेताओं के छिटपुट हंसी मजाक के पल भी सामने आए हैं, लेकिन हम इस रिपोर्ट में आपको न्यूजीलैंड की संसद से आई एक तस्वीर के बारे में बताने जा रहे हैं। इस तस्वीर में स्पीकर एक सांसद के बच्चे को गोद में लिए नजर आ रहे हैं।

न्यूजीलैंड की संसद का बदला-बदला नजारा

बुधवार को न्यूजीलैंड की संसद का नजारा ही कुछ और था। संसद में देश के गंभीर मुद्दे की बहस को छोड़कर लोग वहां उस बच्चे के बारे में बात कर रहे थे जो मेहमान के रूप में वहां अचानक पहुंचा था। यह बच्चा एक सांसद का बेटा था जो अपनी पैटरनिटी लीव के बाद सदन में आए थे।

स्पीकर ने साझा की तस्वीर

बच्चे को पहले एक सांसद के हाथ से होते हुए दूसरे सांसद ने लिया। इसके बाद खुद स्पीकर टेवर मैलार्ड ने उसे अपनी में बिठाकर दूध भी पिलाया। संसद में इस प्यारे बच्चे की बेबीसीटिंग के बाद स्पीकर ने अपने ट्विटर पर तस्वीर भी शेयर की। पोस्ट में मैलार्ड ने लिखा, 'आजतक स्पीकर की कुर्सी सिर्फ पीठासीन अधिकारी ही इस्तेमाल करते आ रहे हैं, लेकिन आज एक VIP ने मेरे साथ यह कुर्सी साझा की।'

पीएम भी अपने बच्चे के साथ आई थी नजर

यही नहीं, स्पीकर ने सांसद और उनकी पत्नी को भी इस छोटे मेहमान के लिए बधाई दी। स्पीकर के अलावा कई सांसदों ने बच्चे के साथ ली तस्वीर ट्विटर पर साझा किया। आपको बता दें कि इससे पहले न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डन अपने तीन महीने के बच्चे के साथ संयुक्त राष्ट्र में पहुंची थी। आर्डन का यह पहला भाषण था जब वह सदन में गई थीं।

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यमन में अमरीकी ड्रोन को मार गिराया, हौती विद्रोहियों ने ली हमले की जिम्मेदारी


सना। यमन की राजधानी सना के दक्षिणी भाग धमार में मंगलवार को एक अमरीकी ड्रोन को मार गिराया गया। एमक्यू-9 ड्रोन हौती विद्रोहियों के कब्जे वाले क्षेत्र में था। सना में हुई घटना की पुष्टि दो अमरीकी अधिकारियों ने बुधवार को की है। हाल के महीनों में यह ऐसी दूसरी घटना है। इससे पहले हौती विद्रोहियों के सैन्य प्रवक्ता के कहा कि हमारी सेना ने अमरीका का ड्रोन मार गिराया है।

ट्रंप ने भारत से लगाई उम्मीद, अफगानिस्तान में आतंकियों से लड़ने के लिए उसका साथ दे

 

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ऐसा पहली बार नहीं है कि यमन में अमरीका के ड्रोन को मार गिराया गया। इससे पहले जून में भी हौती विद्रोहियों ने ईरान की मदद से अमरीका के ड्रोन को उड़ा दिया था। दरअसल यमन में निगरानी के लिए और समय-समय पर हमला करने के लिए यहां पर ड्रोन को तैनात कर रखे हैं।

एक अधिकारी के अनुसार अमरीकी ड्रोन हथियारों से लैस था। उसे कैलिफोर्निया में स्थित कंपनी जनरल एटॉमिक्स ने बनाया था। हौती विद्रोहियों ने जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल से उस ड्रोन को मार गिराया।

हालांकि, दूसरी तरफ एक यमनी अधिकारी ने बताया कि अमरीका को यकीन है कि हौती विद्रोहियों को ईरान ने मिसाइल मुहैया की थी। अभी यह अस्पष्ट है कि ड्रोन को अमरीकी सेना संचालित कर रही थी या खुफिया समुदाय कर रहा था। अमरीका ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने इस वारदात के लिए सीधा ईरान को दोषी ठहराया है। जून भी इस तरह की घटना ने तनाव बढ़ा दिया था। ईरान ने होर्मुज के जलमार्ग पर अमरीकी ड्रोन को मार गिराया था। उसका कहना था कि अमरीकी ड्रोन ने सीमा उल्लंघन किया था। ट्रंप ने इस दौरान हमले के आदेश दे दिए थे, मगर बाद में इसे वापस ले लिया था।

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ट्रंप ने भारत से लगाई उम्मीद, अफगानिस्तान में आतंकियों से लड़ने के लिए उसका साथ दे


वाशिंगटन। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को नसीहत दी है कि वह अफानिस्तान के युद्ध में खुद भी शामिल हो। वाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में आतंकी संगठनों से लड़ाई में भारत के साथ रूस, तुर्की, इराक और पाकिस्तान को भी साथ देना चाहिए।

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ट्रंप ने सवाल उठाए कि सात हजार मील से अमरीका अफगानिस्तान में आतंकियों से लोहा ले रहा है। मगर बाकी देश मूक दर्शक बने देख रहे हैं, उनका सहयोग बिल्कुल नहीं मिल रहा है। जहां कहीं भी आईएसआईएस की मौजूदगी है, किसी न किसी समय उन देशों को उनसे लड़ना होगा।

अमरीका भारत से यह उम्मीद चौंकाने वाली है। इसका कारण यह है कि अभी तक भारत ने अफगानिस्तान में रचनात्मक और विकास कार्यों में ही अपना योगदान दिया है। भारत ने ना तो आतंकवाद निरोधी अभियानों में हिस्सा लिया है और न ही कभी खुद सैन्य ऑपरेशनों में शामिल होना चाहता है। यह रणनीति खुद अमरीका द्वारा ही तय की गई थी।

बाजवा का कार्यकाल बढ़ाए जाने से चीन खुश, कहा-पाक आर्मी जनरल हमारे पुराने मित्र

इराक और सीरिया में लगभग अपनी जमीन खो चुके आतंकी संगठन आईएसआईएस अब अफगानिस्तान में अपनी पकड़ मजबूत करने में लग गया है। अफगानिस्तान में कुछ दिन पहले ही एक आत्मघाती हमले में 63 लोगों की मौत हो गई है।

अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप अफगानिस्तान में दशकों चले युद्ध से अपनी सेना को बाहर निकालना चाहते हैं। अमरीकी सेना सितंबर 2001 से ही अफगानिस्तान में मौजूद रही है और अब करीब 18 साल बीत जाने के बाद अमरीका दूसरे देशों से योगदान देने की अपील कर रहा है।

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बाजवा का कार्यकाल बढ़ाए जाने से चीन खुश, कहा-पाक आर्मी जनरल हमारे पुराने मित्र


बीजिंग। पाकिस्तान के आर्मी जनरल कमर जावेद बाजवा का तीन साल का कार्यकाल बढ़ाए जाने से चीन खुश है। उसने बुधवार को कहा कि वह बाजवा के कार्यकाल को बढ़ाए जाने से बेहद प्रसन्न है। बाजवा को चीन सरकार का पुराना दोस्त कहकर संबोधित किया गया।

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चीन की ओर से एक बयान में कहा गया कि उनके अकल्पनीय सहयोग के कारण आज पाक से हमारे संबंध काफी बेहतर हुए हैं। गौरतलब है कि नवंबर 2016 में 58 वर्षीय बाजवा को नवाज शरीफ सरकार ने सेना प्रमुख के रूप में चुना था। वह इस साल नवंबर में रिटायर्ड होने वाले थे। मगर इमरान सरकार ने उनका कार्यकाल तीन साल के लिए बड़ा दिया है। यह फैसला तब लिया जब भारत और पाकिस्तान के साथ अफगानिस्तान शांति वार्ता को लेकर तनाव देखने को मिल रहा हैै।

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चीन विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जेंग शुयांग ने मीडिया को बताया कि पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ रहे सहयोग में बाजवा का योगदान सबसे अधिक रहा है। उनके नेतृत्व में हमें आगे भी सहयोग मिलता रहेगा। इस तरह से क्षेत्र में सुरक्षा के साथ स्थानीय शांति कायम रहेगी। गौरतलब है कि बलूचिस्तान में चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर का काम जोरों पर चल रहा है।

इस प्रोजेक्ट की सुरक्षा का जिम्मा बाजवा ने अपने हाथों में ले रखा है। बाजवा ने चीन से वादा किया है कि वह इन परियोजनाओं को स्थानीय स्तर पर हो रहे विरोध से बचाएंगे। चीन ने इमरान खान के फैसले की प्रशंसा की है। हालांकि पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों ने इस फैसले की निंदा की है। उनका कहना है कि इस निर्णय से पूरी दुनिया को गलत संदेश जाएगा। इस निर्णय से पता चलता है पाक सेना एक और दो लोगों पर ही निर्भर है।

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मॉस्को पहुंचे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, कश्मीर पर फिर भारत को मिला रूस का साथ


मास्को। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने बुधवार को मॉस्को का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने आतंक का मुद्दा उठाते हुए सहयोग की अपील की। रूस ने भी भारत का साथ देने का वादा किया है। रूस ने एक बार फिर कश्मीर के मुद्दे पर भारत का समर्थन किया है। रूस ने कश्मीर के अंतरराष्ट्रीयकरण की मांग को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह द्विपक्षीय मुद्दा है। इसमें तीसरे पक्ष की कोई आवश्यकता नहीं है।

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एनएसए अजीत डोभाल को रूस के सुरक्षा परिषद के सचिव निकोलाई पेत्रुशेव ने आमंत्रित किया था। डोभाल का यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्लादिवोस्तोक यात्रा से ठीक पहले हुआ है। गौरतलब है कि पीएम मोदी सितंबर माह की शुरुआत में ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम की बैठक में शामिल होने के लिए व्लादिवोस्तोक जाने वाले हैं। यहां वो राष्ट्रीय सुरक्षा, क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत करेंगे

इस मुलाकात के दौरान दोनों देशों के पक्षों ने आतंकवाद निरोधी सहयोग को तेज करने के अपने इरादे की पुष्टि की। डोभाल ने अंतरिक्ष क्षेत्र और गगनयान कार्यक्रम में चल रहे सहयोग की समीक्षा करने के लिए रोसकोसमॉस दिमित्री रोगोजिन के निदेशक से भी मुलाकात की।

इस दौरान रोगोजिन ने चंद्रयान कार्यक्रम की प्रगति को सराहया और रूस के समर्थन की बात के साथ इस मिशन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। इस मुलाकात के दौरान दोनों पक्षों ने अंतरिक्ष सहयोग के दीर्घकालिक असर पर चर्चा की।

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जम्मू-कश्मीर मुद्दे को ICJ में उठाने पर पाकिस्तान में दो फाड़, सरकार के विरोध में ये लोग


इस्लामाबाद। जम्मू-कश्मीर से अार्टिकल 370 के दो खंडों को खत्म करने के भारत सरकार के फैसले से बौखलाया पाकिस्तान किसी भी हद से गुजरने को तैयार है। बेचैनी का आलम ऐसा है कि पाक बिना स्पष्ट सोच विचार के बयान दे रहा है। इसी कड़ी में पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने बयान दिया पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में उठाएगा।

हालांकि, ताजा जानकारी आ रही है कि इस फैसले पर पाकिस्तान दो गुटों में बंटा हुआ है। खुद पाक का विधि मंत्रालय में अभी इसे लेकर असमंजस में है। इस बारे में पाकिस्तान के अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' ने देश के विधि मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से दी है।

पाकिस्तानी मीडिया में किया जा रहा है ये दावा

दरअसल, मंगलवार को पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा है कि पाकिस्तान, कश्मीर मुद्दे को ICJ में उठाएगा और विधि मंत्रालय जल्द ही इस बारे में विस्तृत विवरण देगा। हालांकि, अखबार की रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि विधि ने अभी इस बारे में अंतिम राय नहीं दिया है। मंत्रालय ने साफ नहीं किया है कि मामले को आईसीजे में उठाया जाए या नहीं।

ICJ मसले पर पाक में दो-राय

मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि इस बारे में अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार कई वकीलों ने भी विदेश मंत्री के इस बयान पर आश्चर्य जताया है। रिपोर्ट में कहा गया कि इस बारे में राय बंटी हुई है कि आईसीजे के क्षेत्राधिकार के मद्देनजर मामले को आईसीजे में ले जाया जाए या नहीं।

पीटीआई नेता ने किया ये खुलासा

वहीं, पाकिस्तान तहरीके इंसाफ (पीटीआई) के एक वरिष्ठ नेता ने अखबार को बताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता ब्रिटेन स्थित एक वकील के संपर्क में हैं। वकील का मानना है कि पाकिस्तान को आईसीजे में भारत के खिलाफ कश्मीर मुद्दे को उठाना चाहिए। पीटीआई नेता ने कहा कि एक संघीय मंत्री ने बेन एमर्सन नाम के व्यक्ति से प्रधानमंत्री इमरान खान की मुलाकात कराई जिसने मामले को आईसीजे में उठाने की सलाह दी। इसके बाद ही विदेश मंत्री कुरैशी कश्मीर मुद्दे को आईसीजे में उठाने का ऐलान किया था।

भारत को कटघरे में खड़ा करना नामुमकिन

वहीं, विधि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस पर विचार किया जा रहा है कि अनुच्छेद 370 और 35-ए को रद्द किए जाने के कानूनी नतीजों के बारे में आईसीजे से सलाह ली जाए। अंतरराष्ट्रीय कानूनी मामलों के जानकार तैमूर मलिक ने कहा कि इस तरह की सलाह बाध्यकारी नहीं होती लेकिन इससे मुद्दे का 'अंतर्राष्ट्रीयकरण' करने में मदद मिलेगी। अखबार ने अपनी रिपोर्ट में आईसीजे के प्रावधानों के हवाले से यह भी दावा किया कि कश्मीर मामले में भारत को कठघरे में खड़ा कर पाना पाकिस्तान के लिए लगभग नामुमकिन होगा।


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नेताओं के बाद अब पाक के निशाने पर भारतीय कलाकार, यूनिसेफ में दर्ज कराई प्रियंका चोपड़ा के खिलाफ शिकायत


लाहौर। भारत के कश्मीर से आर्टिकल 370 खत्म करने के बाद से पाकिस्तान एक-एक करके बचकाने और आक्रमक कदम उठा रहा है। अपनी बौखलाहट में पाकिस्तान कभी व्यापार संबंध रद्द कर रहा है, कभी अंतरराष्ट्रीय पटल पर इस मुद्दे का ढिंढोरा पीट रहा है।

अब इसी कड़ी उसने अब भारतीय फिल्म कलाकारों पर भी कीचड़ उछालना शुरू कर दिया है। दरअसल, पाकिस्तान की मानवाधिकार मंत्री एम शिरीन मजारी ने प्रियंका चोपड़ा के खिलाफ यूनिसेफ का दरवाजा खटखटाया है।

कश्मीर पर समर्थन जताने के खिलाफ पत्र

शिरीन मजारी ने प्रियंका चोपड़ा के खिलाफ आरोप लगाते हुए कहा कि,'UN की गुडविल एंबेसेडर फॉर पीस प्रियंका चोपड़ा जम्मू कश्मीर पर भारत सरकार के फैसले का समर्थन करती हैं।' अपने पत्र में शिरीन ने भारत सरकार और कश्मीर के बारे में भी जिक्र किया है। शिरीन ने लिखा है कि मोदी सरकार ने कश्मीर मामले में अतंरराष्ट्रीय मूलों का उल्लंघन किया है, वहीं, प्रियंका ने उनके इस फैसले को सार्वजनिक रूप से समर्थन देने का दावा किया है।

कहां से शुरू हुआ विवाद?

हुआ ये था कि हाल ही में प्रियंका चोपड़ा एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंची थीं। उसी दौरान एक पाकिस्तानी कार्यकर्ता आयशा मलिक प्रियंका पर भड़क गई। कार्यकर्ता प्रियंका पर कुछ महीने पहले किए उनके ट्वीट के लिए निशाना साधा। इस ट्वीट में प्रियंका ने भारतीय सेना की तारीफ की थी।


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ईरानी प्रतिबंधों का भारत नहीं कर रहा उल्लंघन, कोई सबूत नहीं: अमरीका


वाशिंगटन। अमरीका के एक शीर्ष राजनयिक ने भारत के पक्ष में बयान दिया है। उन्होंने ईरान मुद्दे पर भारत का बचाव करते हुए कहा कि वॉशिंगटन के पास इस बात के कोई सबूत नहीं है कि भारत, ईरान पर लगे अमरीकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा है। राजनयिक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही है।

चाबहार के जरिए अमरीकी प्रतिबंधों का उल्लंघन

दरअसल, ईरान के लिए विशेष अमरीकी प्रतिनिधि ब्रायन हुक ने मीडिया के प्रश्नों का जवाब दे रहे थे, तभी उनसे पूछा गया कि भारत चाबहार बंदरगाह के जरिए अमरीकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा है? इसके जवाब में हुक ने कहा कि हमारे पास इसका कोई सबूत नहीं हैं कि भारत अमरीकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा है। बता दें कि यह यह बंदरगाह अफगानिस्तान के विकास के लिए ईरान बना रहा है।

भारत के खिलाफ सबूत नहीं

मीडियाकर्मी ने आरोप लगाते हुए सवाल किया कि भारत चाबहार (ईरान) से अपनी खेप भेजता है, जिसे बाद में अफगानिस्तान भेजा जाता है। अमरीका का भारत पर चाबहार के इस्तेमाल करने से रोकने का दबाव है। ऐसे में भारत इसका अफगानिस्तान को विकसित करने की अपनी योजनाओं के साथ कैसे सामंजस्य स्थापित करता है? इसके जवाब में हुक ने कहा,'मुझे उन सबूतों का इल्म नहीं है, जिसका आपने हवाला दिया है।' हुक ने कहा कि भारत अमरीकी प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं कर रहा है।


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नेपाल में संयुक्त आयोग की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे एस जयशंकर


काठमांडू। विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर 5वीं संयुक्त आयोग की बैठक में हिस्सा लेने के लिए नेपाल की राजधानी काठमांडू पहुंच गए हैं। इस दौरान नेपाल के विदेश सचिव शंकर दास बैरागी और नेपाल में भारत के राजदूत नीलांबर आचार्य ने उनका स्वागत किया।

FATF लिस्ट: इन तीन रिव्यू रिपोर्ट से होगा पाकिस्तान के भाग्य का फैसला, अक्टूबर में होगा ऐलान

 

S jaishankar ने ली राज्यसभा सदस्यता की शपथ, मोदी सरकार 2.0 में बने हैं विदेश मंत्री

भारत-नेपाल संयुक्त आयोग की 5वीं बैठक 21-22 अगस्त को काठमांडू में हो रही है। डॉ एस जयशंकर और नेपाल के विदेश मामलों के मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली बैठक की सह-अध्यक्षता करेंगे। इस दौरान वह अपने संबंधित प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व करेंगे।

नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार,संयुक्त आयोग की बैठक द्विपक्षीय संबंधों और सहयोग पर चर्चा होगी। भारत-नेपाल संयुक्त आयोग की स्थापना जून 1987 में हुई थी। इसकी बैठकें नेपाल और भारत में बारी-बारी से आयोजित की जाती हैं। आयोग की अंतिम बैठक अक्टूबर 2016 को नई दिल्ली में आयोजित की गई थी।

इस दौरान विदेश मंत्री डॉ जयशंकर नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी और प्रधानमंत्री श्री के पी शर्मा ओली से मुलाकात करेंगे। नेपाल के विदेश मामलों के मंत्री भी डॉ जयशंकर के सम्मान में रात्रिभोज का आयोजन करेंगे।

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