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Coronavirus Lockdown के बीच बड़ी सूचना, 15 दिन के अंतर में ही बुक कर पाएंगे Gas Cylinder


नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी ऑयल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने कोरोना वायरस की लोगों से पैनिक बुकिंग ना कराने की अपील की है। साथ ही कंपनी ने कहा है कि अब 15 दिन के अंतर पर ही रसोई गैस की बुकिंग कराई जा सकेगी। जब से देश में लॉकडाउन हुआ है तब से देश में घरेलू गैस सिलेंडर की डिमांड इजाफा हुआ है। जानकारों की मानें तो इस दौरान 200 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर आईओसीएल की ओर से गैस बुकिंग के बारे में और क्या कहा है...

सप्लाई जारी है, पैनिक बुकिंग ना करें
इंडियन ऑयल के अध्यक्ष संजीव सिंह ने एआश्वस्त किया कि देश में रसोई गैस की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की सप्लाई पूरे देश में जारी है। पेट्रोल, डीजल या रसोई गैस को लेकर कोई किल्लत या कोई दिक्कत नहीं है। विशेषकर रसोई गैस के लिए आश्वस्त करना चाहता हूं कि आप लोग निश्चिंत रहें। एलपीजी की आपूर्ति सुचारू रूप से चल रही है और चलती रहेगी। ग्राहकों से निवेदन है कि पैनिक बुकिंग न करें। इससे सिस्टम पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। हमने अब यह व्यवस्था शुरू की है कि कम से कम 15 दिन के अंतर से पहले ग्राहक रिफिल बुकिंग नहीं करा सकेंगे।

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पहले नहीं थी इस तरह की दिक्कत
उल्लेखनीय है कि लॉकडाउन के बाद से देश में पेट्रोल-डीजल की खपत तो कम हुई है, लेकिन रसोई गैस की मांग बढ़ गई है। अब तक कस्टमर्स के बुकिंग पर कोई समय सीमा लागू नहीं थी। आम उपभोक्ताओं को एक साल में पहले 12 घरेलू रसोई गैस सिलिंडर पर सब्सिडी मिलती है, जबकि उसके बाद सब्सिडी नहीं मिलती। संजीव सिंह ने कहा कि रसोई गैस का देश में भरपूर भंडार है। आयात टर्मिनल, रिफाइनरी, बॉटलिंग संयंत्र, परिवहन नेटवर्क, वितरण नेटवर्क सब पूरी तरह काम कर रहे हैं। इंडियन ऑयल अपने चैनल साझेदारों के साथ यह सुनिश्चित करने में लगा है कि लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।


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SBI के बाद BOI ने सस्ता किया कर्ज, ब्याज दरों में 0.75 फीसदी कटौती की


नई दिल्ली। कोरोना वायरस के पैदा हुए आर्थिक संकट से आम लोगों और छोटे कारोबारियों को राहत देने के लिए रेपो दरों में राहत दी थी। अब उस राहत को आम जनता पहुंचाने का काम सरकारी बैंकों की ओर से शुरू कर दिया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के बाद बैंक ऑफ इंडिया की ओर से राहत दी गई है। बीओआई ने ब्याज दरों में 0.75 फीसदी की कटौती कर दी है। जिसके तहत होम, व्हीकल और एमएसएमई लोन में राहत मिलेगी।

बीओआई ने किया ऐलान
बैंक ऑफ इंडिया ने एक्सटर्नल स्टैंडर्ड बेस्ड इंट्रस्ट रेट में 0.75 फीसदी कम कर 7.25 फीसदी करने का फैसला लिया है, जो कि एक अप्रैल से लागू हो जाएंगी। बैंक ने रिजर्व द्वारा दी गई 0.75 फीसदी की पूरी राहत ग्राहकों को दे दी है। बैंक ऑफ इंडिया की ओर से कटौती करने के बाद होम लोन, व्हीकल लोन और एमएसएमई लोन के ग्राहकों को बड़ा फायदा मिलेगा। वहीं बैंक की ओर से एक माह से लेकर एक साल तक की परिपक्वता अवधि वाले लोन के लिए एमसीएलआर में 0.25 फीसदी की कटौती कर दी है। वहीं एक दिन की परिक्वता वाले ऋण के लिए एमसीएलआर में 0.15 फीादी की कटौती की है।

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एसबीआई की ओर से भी हो चुका है राहत का ऐलान
इससे पहले एसबीआई की ओर से अपने ग्राहकों को राहत दी जा चुकी है। इकोनॉमी के समर्थन में आरबीआई की असाधारण मौद्रिक नीति के जवाब में एसबीआई पूरी 75 आधार अंकों की दर कटौती अपने उधारीकर्ताओं को हस्तांतरित करेगा।" एसबीआई ने एक्सटर्नल बेंचमार्क-लिंक्ड लेंडिंग रेट को 7.80 प्रतिशत से घटाकर 7.05 प्रतिशत वार्षिक कर दिया है और रेपो-लिंक्ड लेंडिंग रेट को 7.40 से 6.65 फीसदी वार्षिक कर दिया है। इसके बाद होम लोन, 30 साल के लोन प्लान पर प्रति एक लाख पर लगभग 52 रुपए सस्ता हो जाएगा।

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आरबीआई ने लिया फैसला
कोरोना वायरस महामारी के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था पर पडऩे वाले असर से निपटने के लिए आरबीआई ने शुक्रवार को रेपो रेट को 75 आधार अंक घटाकर 4.4 कर दिया। अक्टूूबर 2019 की मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद रेपो रेट में यह पहली कटौती है। यह मौद्रिक नीति समीक्षा पहले 31 मार्च और तीन अप्रैल को होने वाली थी, लेकिन कोरोनावायरस महामारी के कारण इसे 24, 26 और 27 मार्च को आयोजित करनी पड़ी। चूंकि आरबीआई ने ब्याज दर में कटौती की है, लिहाजा बैंकों के पास अब खुदरा ऋण पर ब्याज दर घटाने का अवसर है। इससे आम आदमी और कारोबारी को मदद मिलेगी।


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किन एप्स से कर सकते हैं पीएम केयर्स फंड में सहयोग, मिलेगा टैक्स में फायदा


नई दिल्ली। देश के प्रधानमंत्री ने कोरोना वायरस से लडऩे के लिए पीएम केयर्स के थ्रू पूरे देश से सहयोग करने के लिए बोला है। उन्होंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का एक अकाउंट नंबर भी दिया है। अब सवाल ये है कि लॉकडाउन के बीच आप बैंक में जाकर तो इस अकाउंट में रुपए डालने जाने से तो रहे। वैसे जा भी सकते हैं, लेकिन जब आपके पास स्मार्टफोन है तो बैंक जाने की जरुरत नहीं है। घर में बैठकर आराम से पीएम केयर्स में मदद कर सकते हैं। आइए आपको भी बताते हैं कि आपको आखिर वो कौन से एप्स और तरीके से पीएम केयर्स में मदद कर सकते हैं...

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यूपीआई के जरिए जानिए कैसे करें मदद
आप पीएम केयर्स में यूपीआई के माध्यम से भी मदद कर सकते हैं। इसके लिए आपको यूपीआई ऐप में जाकर pmcares@sbi पर डोनेट करना होगा। इस वेबसााइट पर जाकर आपको डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग, यूपीआई जैसे BHIM, PhonePe, Amazon Pay, Google Pay, Paytm, Mobikwick आदि के माध्यम से आप मदद कर सकते हैं। वहीं आरटीजीएस और एनईएफटी के माध्यम से भी डोनेशन कर सकते हैं।

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टैक्स छूट में कर सकते हैं डिमांड
पीएम केयर्स में अगर आप मदद करते हैं तो मदद की राशि के अनुसार आप टैक्स में बेनिफिट ले सकते हैं। मदद की राििश पर इनकम टैक्स के सेक्शन 80 डी के तहत टैक्स छूट की डिमांड कर सकते हैं। आपको बता दें कि सरकार ने पीएम केयर्स के तहत 100 करोड़ रुपए एकत्र करने का लक्ष्य रखा है। पीएम मोदी ने कहा है कि वो देशवासियों की ओर से छोटी से छोटी आर्थिक मदद की एक्सेप्ट करते हैं। तो आपको बैंक जाने की जरुरत है। अगर आपके पास यह एप्स मोबाइल में मौजूद हैं तो आप दिल खोलकर कोरोना वायरस से लडऩे के लिए मदद कर सकते हैं।


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Share Market को Coronavirus के कहर से उबरने की आस, विदेशी संकेतों से मिल सकता सहयोग


नई दिल्ली। पूरी दुनिया पर कहर बनकर टूट रहा कोरोना वायरस ने अब आर्थिक चोट भी पहुंचानी शुरू कर दी है। तमाम एजेंसियां और संगठन घोर आर्थिक मंदी की बात कर चुके हैं। वैसे इस निपटने के लिए भारत समेत दुनिया के कई देशों की सरकारों और केंद्रीय बैंकों ने राहत के कदम उठाए हैं। जिसकी वजह से बाजार को कोरोना के कहर से उबरने की उम्मीद बनी रहेगी, हालांकि भारतीय शेयर बाजार की चाल विदेशी संकेतों और प्रमुख आर्थिक आंकड़ों से ही तय होगी। जानकार बताते हैं कि कोरोना के कहर के चलते लगातार बीते छह सप्ताह की गिरावट के बाद घरेलू शेयर बाजार में इस सप्ताह सुधार की उम्मीद की जा रही है, हालांकि कोरोना वायरस के प्रकोप से मिल रही वैश्विक आर्थिक मंदी की आहट के कारण निवेशक फिलहाल सावधानी बरतने की कोशिश करेंगे।

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भारत में 1000 से अधिक मामले
विदेशों से मिलने वाले संकेतों, आर्थिक आंकड़ों, विदेशी बाजार में कच्चे तेल की कीमत और डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल से भारतीय शेयर बाजार को दिशा मिलेगी। वहीं, देश में लगातार बढ़ रहे कोरोना वायरस के मामले का भी बाजार पर असर देखने को मिलेगा क्योंकि इसका अब तक कोई इलाज नहीं है और पूरी दुनिया में 6.63 लाख से अधिक लोग इसके संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं जिनमें से 30,800 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। भारत में भी कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की तादाद 1.000 से ज्यादा हो चुकी है और इससे 25 लोगों की मौत हो चुकी है।

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जारी होंगे फरवरी महीने के आंकड़े
इस सप्ताह भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के उत्पादन के फरवरी महीने के आंकड़े मंगलवार को जारी होने वाले हैं। वहीं, एक अप्रैल से ही ऑटो कंपनियों की फरवरी महीने की बिक्री के आंकड़े आने लगेगी। मार्किट मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई के मार्च महीने के आंकड़े गुरुवार को जारी होंगे। रामनवमी के अवसर पर अवकाश होने के कारण गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार में कारोबार बंद रहेगा।

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अमरीकी आंकड़ों पर भी रहेगी नजर
विदेशों में जारी होने वाले प्रमुख आर्थिक आंकड़ों का भी बाजार पर असर देखने को मिल सकता है। चीन में मार्च महीने के कैक्सिन मैन्युफैक्च रिंग पीएमआई के आंकड़ो बुधवार को जबकि कैक्सिन सर्विसेज पीएमआई और कंपोजिट पीएर्मआ के मार्च महीने के आंकड़े शुक्रवार को जारी होंगे। वहीं, अमेरिका में मार्किट मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई के मार्च महीने के आंकड़े बुधवार को आने वाले हैं जबकि गैर-कृषि क्षेत्र के रोजगार के मार्च महीने के आंकड़े शुक्रवार को जारी होंगे।

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जापान के कंज्यूमर कान्फिडेंस के मार्च महीने के आंकड़े जारी होंगे
जापान में औद्योगिकी उत्पादन के फरवरी महीने के आंकड़े मंगलवार को ही जारी होने वाले हैं। सप्ताह क आरंभ में सोमवार को ही यूरोप में उपभोक्ताओं के भरोसे से संबंधित कंज्यूमर कान्फिडेंस के मार्च महीने के आंकड़े जारी होंगे। इस प्रकार, पूरे सप्ताह निवेशकों की नजर इन आंकड़ों पर भी बनी रहेगी। बता दें कि चीन से पैदा हुए कोरोनावायरस के प्रकोप से यूरोप, अमेरिका और जापान भी बुरी तरह प्रभावित हैं।


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War Against Corona: Tata से Bill Gates तक जानिए इस जंग में किसका कितना सहयोग


नई दिल्ली। आज पूरी दुनिया कोरोना वायरस से जूझ रही है। लाखों लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। हजारों लोग मर चुके हैं। दुनिया की महाशक्तियां और नेता इस वायरस से जंग का ऐलान कर चुके है। वहीं भारत भी इस जंग में शामिल हो चका है। इस जंग के ऐलान के बाद दुनिया के अरबपति भी शामिल हो चुके हैं। अमरीका से लेकर चीन और चीन से भारत तक में रहने वाले अरबपतियों ने कई ऐलान किए हैं। शनिवार को ही टाटा ग्रुप की ओर से 1500 करोड़ और पेटीएम की ओर से 500 करोड़ रुपए ऐने का ऐलान किया है। वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज और आनंद महिंद्रा की ओर से किसी बड़ी रकम का तो ऐलान नहीं किया, लेकिन रिलायंस ने हॉस्पिटल और आनंद ने अपने रिजॉट्र्स और अपने प्लांट में वेंटीलेटर बनाने का ऐलान किया है। वहीं जेफ जेबोस ने भी डब्ल्यूएचओ के साथ काम करने की बात कही है। एलन मस्क, मार्क जुकरबर्ग और टिम कुक की ओर से लाखों एन 95 मास्क देने की बात कही है। आइए आपको भी बताते हैं कि कोरोना के खिलाफ जंग में किसका कितना सहयोग किया है...

टाटा ग्रुप की ओर से 1500 करोड़ रुपए का ऐलान

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कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में टाटा ग्रुप ने अपनी तिजोरी खोल दी है। ग्रुप ने टाटा ट्रस्ट के माध्यम से 500 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया है। वहीं दूसरी ओर टाटा संस के तत्वाधान में 1000 करोड़ रुपए देने की बात कही है।टाटा ट्रस्ट कोरोना वायरस के खिलाफ फ्रंटलाइन पर काम कर रहे हेल्थ वर्कर्स के लिए प्रोटेक्टिव गियर, बढ़ते मामलों के लिए रेस्पिरेटरी सिस्टम, टेस्टिंग किट, संक्रमित व्यक्तियों के इलाज के लिए बेहतर व्यवस्था और ट्रेनिंग के लिए 500 करोड़ रुपए देगा। वहीं टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने बताया कि कोरोना के इलाज के लिए विदेश से वेंटीलेटर मंगा रहे हैं। वहीं देश में भी बनाने की तैयारी की जा रही है।

मार्क जुकरबर्ग ने किया 2.5 करोड़ डॉलर का ऐलान

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फेसबुक के संस्थापक मार्ग जुकरबर्ग और उनकी पत्नी प्रिसिला चान की ओर से कोरोना वायरस से फैलने वाली बीमारी का उपचार खोजने के लिए बिल एवं मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन के साथ हाथ मिलाने और 2.5 करोड़ डालर की राशि का योगदान करने की घोषणा की है। इससे पहले मार्क जुकरबर्ग की ओर 720,000 एन 95 मास्क देने का ऐलान किया था।

बिल गेट्स ने किया 750 करोड़ रुपए करोड़ रुपए का सहयोग

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दुनिया के दूसरे सबसे अमीर और माइक्रोसॉफ्ट के को फाउंडर बिल गेट्स ने बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के जरिए कोरोना के खिलाफ जंग लडऩे के लिए 10 करोड़ डॉलर यानी 750 करोड़ रुपए देने की घोषणा की है। गेट्स फाउंडेशन ग्लोबल रिसर्च और कोरोना मरीजों के इलाज पर फोकस करेगा।

अलीबाबा ने 105 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया

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वहीं चीन के सबसे अमीर लोगों में से एक और अलीबाबा के संस्थापक और जैक मा ने 105 करोड़ रुपए देने की बात कही है। इन रुपयों से कोरोना वायरस से बचाव के लिए वैक्सीन विकसित की जाएगी। जैक मा की ओर से पांच लाख टेस्टिंग किट और 10 लाख फेस मास्क भी अमरीका भेजे हैं।

पेटीएम पीएम केयर्स में देगा 500 करोड़ रुपए

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पेटीएम ने शनिवार को कहा कि उसका 'प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपात स्थिति राहत कोष' यानी पीएम केयर्स में 500 करोड़ रुपए का योगदान देने का लक्ष्य है। पेटीएम की ओर से दिए गए बयान में कहा गया है कि पेटीएम का वॉलेट, यूपीआई और पेटीएम बैंक डेबिट कार्ड इस्तेमाल करके पेटीएम के जरिए दिए गए हर योगदान या अन्य किसी भी भुगतान के लिए कंपनी अतिरिक्त 10 रुपए का योगदान देगी।

वेदांता 100 करोड़ रुपए देने का ऐलान

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वेदांता ग्रुप के अनिल अग्रवाल ने कहा बीते रविवार को ट्वीट किया था कि कोरोना वायरस जैसी महामारी से लडऩे के लिए वो 100 करोड़ रुपए देंगे। उन्होंने कहा था कि वो खासतौर से उन लोगों के लिए चिंतित हैं जो दिहाड़ी पर काम करते हैं।

हिंदुस्तान यूनिलिवर का 100 करोड़ रुपए का योगदान

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हिंदुस्तान यूनिलिवर ने इस वायरस से लडऩे के लिए 100 करोड़ रुपए की मदद करने का ऐलान किया है। कंपनी लाइफब्वाय सैनेटाइजर, लाइफब्वाय लिक्विड हैंडवॉश और डोमेक्स फ्लोर क्लीनर्स के दामों में 15 फीसदी की कमी करने का निर्णय लिया है। कंपनी ने जरूरतमंद लोगों को अगले कुछ महीनों में 2 करोड़ लाइफब्वाय साबुन बांटने का भी ऐलान किया है। कंपनी ने उन मेडिकल संस्थानों के साथ साझेदारी की है, जो संक्रमित लोगों की देखभाल में लगे हुए हैं। कंपनी टेस्टिंग सेंटर्स और अस्पतालों में हेल्थकेयर सुविधाओं को अपग्रेड करने के लिए 10 करोड़ रुपए देगी।

टिम कुक और मस्क ने किया यह ऐलान

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एपल के सीईओ टिम कुक भी कोरोना वायरस के खिलाफ इस जंग में शामिल हो गए हैं। उन्होंने 90 लाख एन 95 मास्क देने का ऐलान किया है। अगर एक मास्क की कीमत 150 रुपए लगाएं तो 135 करोड़ रुपए खर्च होंगे। मतलब साफ है कि टिमकुक की ओर भी एक अरब रुपए से ज्यादा ऐलान कर दिया है। वहीं टेस्ला और स्पेस एक्स सीईओ एलन मस्क ने भी 2.5 लाख एन 95 मास्क देने का ऐलान किया है।

अंबानी और महिंद्रा ने किया इस तरह किया सहयोग

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वहीं आनंद महिंद्रा और मुकेश अंबानी ने भी कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में शामिल हो गए हैं। पहले मुकेश अंबानी की बात करें तो उन्होंने 100 बेड का हॉस्पिटल समर्पित किया है। वहीं वेंटीलेटर्स और बाकी इंतजाम करने की बात भी कही है। दूसरी ओर आनंद महिंद्रा ने अपनी सैलरी समर्पित करने के अलावा कोरोना मरीजों को क्वारिंटाइन करने के लिए अपने रिजॉट्र्स खोलने और प्लांट्स में वेंटीलेटर बनाने की भी बात कही है।


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Coronavirus Lockdown: 22 साल के निचले स्तर पर क्रूड, भारत में 10 रुपए प्रति लीटर हुए दाम


नई दिल्ली। पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का कहर देखने को मिल रहा है। अमरीका इटली, यूरोप औरद अब भारत भी इसकी चपेट में आ चुका है। भारत में 1000 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। यह हालत तब है जब पूरे देश में पूरे लॉकडाउन को 4 दिन बीत चुके हैं। कोरोना वायरस का सबसे बड़ा असर ऑयल मार्केट में देखने को मिला है। इंटरनेशनल न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल के दाम 22 साल के निचले स्तर पर आ चुके हैं। जबकि भारत की बात करें तो यहां पर क्रूड ऑयल के दाम दस रुपए की चॉकलेट के बराबर हो चुके हैं। उसके बाद भी खुदरा मार्केट में पेट्रोल और डीजल के दाम में 13 दिन से कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है। आइए पहले आपको पेट्रोल और डीजल के दाम में बारे में बताते हैं। उसके बाद क्रूड ऑयल के बारे में बताएंगे।

पेट्रोल और डीजल के दाम 13 दिन से जस के तस
आईओसीएल से मिली जानकारी के अनुसार देश के चारों महानगरों में 13 दिन से पेट्रोल और डीजल के दाम में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है। आखिरी बार पेट्रोल और डीजल के दाम में किसी भी तरह का बदलाव 16 मार्च को देखने को मिला था। पहले बात पेट्रोल की करें तो 16 मार्च को देश के चारों महानगरों नई दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में पेट्रोल के दाम क्रमश: 69.59, 72.29, 75.30 और 72.28 रुपए प्रति लीटर हो गए थे, जो आज भी कायम है। वहीं बात डीजल की करें तो समान महानगरों में दाम क्रमश: 62.29, 64.62, 65.21 और 65.71 रुपए प्रति लीटर हो गए थे।

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22 साल के निचले स्तर पर क्रूड ऑयल के दाम
वहीं बात क्रूड ऑयल की करें तो पहले शुरुआत इंटरनेशनल मार्केट से करना जरूरी है। मौजूदा समय में ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम 27.95 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं। दूसरी ओर अमरीकी ऑयल डब्ल्यूटीआई 21.51 डॉलर प्रति बैरल पहुंच चुके हैं। एक इंटरनेशनल न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा समय में क्रूड ऑयल के दाम 1998 के स्तर यानी 22 साल के निचले स्तर पर पहुंच चुके हैं। जबकि जनवरी में ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम 71 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा थे। एजेंल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसीडेंट ( कमोडिटी एंड रिसर्च ) अनुज गुप्ता का कहना है कि कोरोना वायरस की वजह से दुनियाभर के देशों में लॉकडाउन की स्थिति है। जिसकी वजह से डिमांड में भारी कमी है। जिस कारण से क्रूड ऑयल के दाम कम है। वहीं सउदी और रूस के बीच चल रहे प्राइस वॉर के कारण भी कीमतों में भारी कटौती देखने को मिल रही है।

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भारत में चॉकलेट के बराबर हुए क्रूड ऑयल के दाम
भारत में क्रूड ऑयल की बात करें तो वायदा बाजार में क्रूड ऑयल के दाम 1700 रुपए प्रति बैरल पर आ गए हैं। अगर एक बैरल की बात करें तो उसमें 159 लीटर होते हैं। अगर भारत में एक लीटर क्रूड ऑयल की गणना की जाए तो 10.69 रुपए प्रति लीटर पर आ गए हैं। इसका मतलब भारत में एक 10 रुपए की चॉकलेट के बराबर पर क्रूड ऑयल के दाम पहुंच गए हैं। जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में क्रूड ऑयल के दाम में और भी गिरावट देखने को मिल सकती हैै।


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PayTm Coronavirus के खिलाफ जंग में PM CARES Fund में करेगा 500 करोड़ रुपए का योगदान


नई दिल्ली। कोरोना के खिलाफ जंग में देश के प्रधानमंत्री ने नरेंद्र मोदी ने देश के सभी लोगों से सहायता मांगी है। उन्होंने कहा है कि वो छोटी से छोटी आर्थिक मदद भी स्वीकार करेंगे। जिसके बाद देश के सभी सेलेब्रेटी के नाम सामने आने लगे हैं, जिन्होंने आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है। वहीं अब पेटीएम भी ऐलान किया है। पेटीएम ने कहा है कि वो पीएम केयर्स में 500 करोड़ रुपए का ऐलान किया है।

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पेटीएम फाउंडर ने 5 करोड़ देने का किया था ऐलान
22 मार्च यानी रविवार को पेटीएम के संस्थापक और सीईओ विजय शेखर शर्मा ने 5 करोड़ रुपए की सहायता करने का ऐलान किया है। उन्होंने अपने ट्वीट कहा था कि अधिक संख्या में भारतीय नवोन्मेषकों, शोधकर्ताओं की जरूरत है, जो वेंटिलेटर की कमी और कोरोना के इलाज के लिए देशी समाधान खोज सकें। पेटीएम संबंधित चिकित्सा समाधानों पर काम करने वाले ऐसे दलों को पांच करोड़ रुपए देगा। उन्होंने आईआईएससी के प्राध्यापक गौरव बनर्जी के एक संदेश पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए यह बात कही थी। बनर्जी ने अपने संदेश में किसी आपातकालीन स्थिति में देशी तकनीक का इस्तेमाल कर वेंटिलेटर बनाने की बात कही थी।


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ईएमआई पर 3 महीने की राहत पर देना होगा ज्यादा ब्याज, समझिए गणित


नई दिल्ली। कोरोना वायरस के प्रकोप से देशभर में छाई आर्थिक मंदी को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने कर्जदाताओं को अगले तीन महीनों के लिए घर या ऑटो लोन पर ईएमआई का भुगतान ना करने की सहूलियत दी है। आरबीआई की इस घोषणा के बाद अगर आप भी अगले तीन महीनों तक ईएमआई न देने का विचार कर रहे हैं, तो आपको अपने बकाया लोन पर अधिक ब्याज देने के लिए तैयार रहना चाहिए। ऐसे में यह समझना काफी जरूरी है कि आखिर कितना अतिरिक्त ब्याज देना होगा और किस तरह से देना होगा?

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प्रति 1000 रुपए की ईएमआई पर अतिरिक्त 25 रुपए का चार्ज
विश्लेषकों और विशेषज्ञों का कहना है कि इसका लाभ लेने वाले ग्राहकों की तीन किस्त तो बढ़ ही जाएगी, इन तीन महीनों की अवधि का अतिरिक्त ब्याज भी देना होगा, जो तीन महीने के अंत में आपकी ईएमआई में जोड़ा जाएगा। इससे आपकी ईएमआई बढ़ जाएगी। उदाहरण के तौर पर अगर आप 1000 रुपए ईएमआई का भुगतान कर रहे हैं और बैंक 10 फीसदी की दर से ब्याज ले रहा है तो आपको तीन महीनों बाद अपनी इन तीनों ईएमआई पर 25-25 रुपए ज्यादा देने होंगे। यह अतिरिक्त ब्याज आपकी भविष्य की सभी ईएमआई में जोड़ा जा सकता है।

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आरबीआई की ओर से दी गई है छूट
वित्तीय क्षेत्र के एक विश्लेषक ने बताया, ग्राहकों को इस अतिरिक्त ब्याज का भुगतान एक साथ करना होगा या इसे अतिरिक्त ईएमआई के रूप में समायोजित करने की अनुमति दी जाएगी, यह बात बैंक को बतानी चाहिए। दरअसल, आरबीआई ने टर्म लोन की किश्त चुकाने में तीन महीने की छूट दी है। सभी वाणिज्यिक, क्षेत्रीय, ग्रामीण, एनबीएफसी और स्मॉल फाइनेंस बैंकों को सभी तरह के टर्म लोन की ईएमआई वसूलने से रोक दिया गया है। ग्राहक खुद चाहें तो भुगतान कर सकते हैं, बैंक दबाव नहीं डालेंगे।

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क्रेडिट कार्ड के बकाए पर राहत
वहीं क्रेडिट कार्ड के बकाया भुगतान पर भी तीन महीने की छूट लागू होगी। इसके तहत अगले तीन महीने तक ऐसे किसी भी व्यक्ति के खाते से किश्त नहीं कटेगी, जिन्होंने कर्ज ले रखा है। इससे आपके क्रेडिट स्कोर पर भी असर नहीं पड़ेगा। तीन महीने तक लोन की किश्त नहीं चुका पाएंगे तो इसे डिफॉल्ट नहीं माना जाएगा। तीन महीने की अवधि के बाद आपकी ईएमआई दोबारा शुरू हो जाएंगी। हालांकि, इसके ये मायने नहीं हैं कि बकाया कभी चुकाना ही नहीं होगा, मोहलत सिर्फ तीन महीने की है। बाद में भुगतान करना ही होगा। यह कदम इस मकसद से उठाया गया है कि लॉकडाउन की वजह से जिनके पास वाकई नकदी की कमी होती है तो उन्हें कर्ज के भुगतान में कुछ समय मिल सके।


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Lockdown में बैंक में काम करने वालों को एक्सट्रा सैलेरी देगी SBI


नई दिल्ली: COVID-19 यानि कोरोना वायरस से देश को बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूरे देश में लॉकडाउन घोषित कर दिया है । 21 दिनों तक चलने वाले इस लॉकडाउन पीरियड में सभी को घर से न निकलने के आदेश दिये गए गए हैं। लेकिन घरों में कैद उस बड़ी आबादी की जिंदगी सुचारू रूप से चलती रहे इसके लिए कुछ लोगों को लॉकडाउन में बाहर निकलकर काम करना पड़ रहा है।

ऐसे ही कुछ लोगों में बैंक के कर्मचारी भी हैं। बैंकों ने अपना टाइम-टेबल बदल दिया है ज्यादा से ज्यादा डिजीटल फैसिलिटी का इस्तेमाल करने की बात कही जा रही है लेकिन कुछ ऐसे काम है जिनकी वजह से कुछ कर्मचारियों का बैंक में होना जरूरी हो जाता है। पुलिस और डॉक्टर्स को तो फिर भी लोग कोरोना हीरोज कह रहे हैं लेकिन बैंक कर्मचारियों द्वारा किये जा रहे कामों का कहीं जिक्र भी नहीं हो रहा है।

बढ़ सकती है प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) की आखिरी तारीख, जानें इस स्कीम के बारे में सबकुछ

लेकिन SBI ने अपने ऐसे कर्मचारियों का खास ख्याल रखने का ऐलान किया है। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक ने ऐलान किया है कि जो भी कर्मचारी लॉकडाउन पीरियड में बैंक आ रहे हैं उन्हें एक्स्ट्रा सैलेरी दी जाएगी।

23 मार्च से लेकर 14 अप्रैल तक की तारीख इस घोषणा में कवर की गई है।इसके तहत एसबीआई की हर ब्रांच में काम करने वाले CPCs, CACs, Treasury Operations, Global Markets, GITC और IT Services के लोगों को शामिल किया गया है।


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बढ़ सकती है प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) की आखिरी तारीख, जानें इस स्कीम के बारे में सबकुछ


नई दिल्ली: कोरोना की वजह से देशव्यापी 21 दिनों का लॉकडाउन घोषित हो चुका है । कई जरुरी कामों ( इनकम टैक्स रिटर्न, विवाद से विश्वास स्कीम, पैन और आधार लिंक करने) की तारीखें आगे बढ़ चुकी है। RBI की घोषणा के बाद लोन की चिंता से परेशान लोग भी सुकन में आ चुके हैं लेकिन अभी भी कुछ लोग हैं जिन्हें चिंता नहीं छोड़ रही है ।

दरअसल अपना आशियाना हर इंसान का सपना होता है और ऐसे ही मिडिल क्लास लोगों के लिए मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (CLSS) को लॉन्च किया था । इस योजना की आखिरी तारीख 31 मार्च है और कई लोग कोरोना संकट के चलते चाहते हुए भी इस स्कीम में रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाएं। इसलिए सरकार इस योजना की तारीख बढ़ाने पर विचार कर रही है।

समय पर जमा करें अपने इंश्योरेंस का प्रीमियम नहीं तो होगी बड़ी परेशानी

PMAY CLSS को हाउसिंग फोर ऑल के लक्ष्य के साथ लॉन्च किया गया था जिसमें योग्य कर्जधारक को बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों से सब्सिडी के साथ ब्याज दर पर होम लोन मिल जाता है। 18 सितंबर के बाद इस स्कीम को जमीन पर लागू करने की रफ्तार कम हो गई क्योंकि लिक्विडिटी का संकट था।उनके मुताबिक बहुत सारी हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां EWS/LIG को कर्ज देने में जुटी थी और अर्थव्यवस्था में सुस्ती की वजह से डिमांड में भी गिरावट आई।

EMI की राहत के बाद SBI ने कस्टमर्स को दिया FD पर झटका, पढ़ें पूरी खबर

किन लोगों के लिए है ये स्कीम-

MIG-I, MIG-II और LIG/EWS के भीतर CLSS सब्सिडी व्यक्ति की आय पर निर्भर करती है। इसी वजह से कर्जधारकों को मिलने वाली सब्सिडी की राशि भी अलग-अलग होती है।

कितना मिलता है लाभ-

आपको मालूम हो कि 6 -12 लाख रुपये आय वाले लोग MIG-I में आते हैं और उन्हें 4 फीसदी की ब्याज सब्सिडी 9 लाख तक की लोन राशि पर मिलती है। इसी तरह जिनकी आय 12 -18 लाख के बीच वाले लोग MIG-II में आते हैं और उन्हें 9 लाख रुपये तक की लोन राशि पर 3 फीसदी की ब्याज सब्सिडी मिलती है। LIG/EWS के लिए लोन की राशि 6 लाख और ब्याज सब्सिडी 6.5 फीसदी है ।


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EMI की राहत के बाद SBI ने कस्टमर्स को दिया FD पर झटका, आज से लागू होंगी नई दरें


नई दिल्ली: कल सुबह RBI की प्रेस कांफ्रेंस के बाद सभी एक ही बात कर रहे थे कि लोन पर पड़ने वाली किस्तें कितनी कम हुईं। या उन्हें किन-किन चीजों के बिल पे करने के लिए फिलहाल टेंशन नहीं लेनी है। जाहिए है RBI के फैसले के बाद बैंक्स अपनी ब्याज दरें कम करेंगे । सो SBI ने भी कर दी, अब ईएमआई तो जरूर कम हो गया है लेकिन देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने लोन की किस्त कम करने के साथ ही आपके फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दर में कटौती की है। यानि अब FD कराना पहले जितना फायदेमंद नहीं होगा।

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आज से लागू होंगी नई दरें-

बैंक ने रिटेल सेगमेंट में एफडी के इंट्रेस्ट रेट में 0.20%-0.50% तथा बल्क सेगमेंट में 0.50%-1% तक की कटौती की है। एफडी पर ब्याज की नई दरें 28 मार्च, 2020 से लागू हो गई हैं।

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अब एसबीआई (SBI) की 7 दिनों से लेकर 45 दिनों की एफडी पर ब्याज दर घटकर 3.5% हो गई है। 46 दिनों से लेकर 179 दिनों के टर्म डिपॉजिट पर 4.5% का इंट्रेस्ट मिलेगा। 180 दिनों के एफडी के लिए 5% की ब्याज दर मिलेगी। एक साल से 10 साल के डिपॉजिट के लिए 5.7% का इंट्रेस्ट मिलेगा। जबकि सीनियर सिटीजंस को एफडी पर 0.50% का अतिरिक्त ब्याज देता है।

सालों बाद रेपो रेट में हुई इतनी कटौती-

आपको बता दें कि RBI ने कल 15 सालों के बाद रेपो रेट में इतनी जबरदस्त कटौती की है। दरअसल अर्थव्वस्था में लिक्विडिटी को बढ़ाने के लिए आरबीआई ने रेपो रेट में इतनी ज्यादा कटौती की है ताकि एक मिडिल क्लास फैमिली अपने खर्चों को बदस्तूर जारी रख सके। कोरोना वायरस की वजह से अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लगा है और आरबीआई ने उसी झटके से उबारने और लोगों के हाथों में कर्च के लिए पैसा पहुंचाने के उद्देश्य के साथ ऐसा किया है।


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Coronavirus के खिलाफ जंग में टाटा ने खोली तिजोरी, 1500 करोड़ रुपए देने का ऐलान


नई दिल्ली। कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में टाटा ग्रुप ने अपनी तिजोरी खोल दी है। ग्रुप ने टाटा ट्रस्ट के माध्यम से 500 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया है। वहीं दूसरी ओर टाटा संस के तत्वाधान में 1000 करोड़ रुपए देने की बात कही है। इससे पहले टाटा होटल की ओर से मुंबई में कोरोना वॉरियर्स के लिए खाना उपलब्ध कराने की बात सामने आई है। इस पूरे मामले की जानकारी खुद रतन टाटा ने अपने ट्विटर हैंडल पर ट्वीट करके दी है। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर रतन टाटा ने इस मुश्किल घड़ी में देश और देश के लोगों के लिए मदद के ऐलान के साथ क्या लिखा है।

टाटा संस देगा 1000 करोड़ रुपए
टाटा ट्रस्ट के अलावा टाटा संस ने भी कोरोना वायरस से जंग के लिए 1000 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया है। इस बारे में टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने बताया कि कोरोना के इलाज के लिए उनकी बाहर विदेश से वेंटीलेटर मंगा रहे हैं। वहीं देश में भी बनाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कोरोना वायरस को देश के सामने बड़ा संकट बताया है। इस स्थिति से निपटने के लिए हरेक कदम उठाना जरूरी है।


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समय पर जमा करें अपने इंश्योरेंस का प्रीमियम नहीं तो, होगी बड़ी परेशानी


नई दिल्ली: आजकल के हालात देखते हुए हेल्थ इंश्योरेंस बहुत जरूरी हो गया है। अगर आपने पहले से हेल्थ इंश्योरेंस करा रखा है तो बेहद अच्छी बात है,लेकिन अजकल जबकि हालात के मद्देनजर EMI और क्रेडिट कार्ड बिल पर छूट मिल रही है तो ऐसे में अपनी हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम भरना न भूलिएगा क्योंकि अगर आप इंश्योरेंस बिल टाइमली नहीं पे करते हैं तो आपको क्लेम के वक्त भी कई तरह की मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है। इसीलिए आज हम आपको टाइम पर प्रीमियम न भरने के परिणामों के बारे में बता रहे हैं ताकि आप आजकल के हालात में भी इंश्योरेंस प्रीमियम को प्रॉयरिटी दें।

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प्रीमियम टाइम पर न जमा करने से आपकी पॉलिसी लैप्स होने का डर रहता है। ऐसे हालात में आपका इससे पहले जमा किया हुआ पैसा भी बरबाद हो जाता है। इसके अलावा अगर आपने टर्म इंश्योरेंस करा रखा है तो पॉलिसी के लैप्स होने के तो बड़े नुकसान हैं। टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी के लैप्स होने पर आपके परिजनों को आपकी मृत्यु के बाद दावे की राशि पाने में परेशानी आ सकती है।

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इसके अलावा अगर आप बाद में उसी पॉलिसी को रिन्यू कराना चाहते हैं तो पको पेनाल्टी देनी पड़ती है और नयी पॉलिसी खरीदने पर भी आपको ज्यादा रकम देनी पड़ती है।

कब लैप्स हो जाती है आपकी पॉलिसी-

इंश्योरेंस कंपनियां प्रीमियम चुकाने के लिए 30 दिनों का एकस्ट्रा टाइम देती हैं। अगर आप इस समयसीमा से चूक जाते हैं तो आपकी पॉलिसी लैप्स मानी जाती है।

यूलिप (यूनिक लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान) में अगर आप पहले पांच साल तक या लॉक इन पीरियड के दौरान प्रीमियम नहीं चुकाते हैं तो आपकी पॉलिसी लैप्स मानी जाएगी।


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Coronavirus: इन 10 बातों में मिलेगा Health Insurance का हर जवाब


नई दिल्ली। कोरोना वायरस का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। हर किसी के मन में सवाल यही है कि आखिर यह कब खत्म होगा। वहीं इस बात की शंका है कि क्या उनका हेल्थ इंश्योरेंस कोरोना वायरस से संबंधित बीमारी को कवर करेगा या नहीं। वैसे इस मामले में कई बार चर्चा हो चुकी है। फिर भी लोगों के मन में कई सवाल अभी भी है, जोकि दूर होना काफी जरूरी है। इसके लिए आज देश के लोगों के सवालों का जवाब देने के लिए आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेन्स के प्रमुख संजय दत्ता सामने आए हैं। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर उन्होंने कोविड 19 और हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर किन 10 प्रमुख सवालों के जवाब दिए हैं?

सवाल: क्या मौजूदा स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी कोविड-19 के चलते अस्पताल में भर्ती होने के खर्चों को कवर करेगी?
जवाब: हां, पॉलिसी के नियमों और शर्तों के अनुसार कोविड-19 के चलते अस्पताल में भर्ती होने के खर्च कवर किए जाएंगे।

सवाल: क्या कोविड-19 के अंतर्गत दावों पर कोई प्रतीक्षा अवधि लागू की गई है?
जवाब: अगर आपकी पॉलिसी में आउटपेशेंट ट्रीटमेंट कवर है, तो प्रतीक्षा अवधि लागू नहीं होगी। आउटपेशेंट ट्रीटमेंट कवर के अंतर्गत पॉलिसी में उल्लेख किए गए दावों की प्रक्रिया के अनुसार किया जा सकता है। कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती होने पर होने वाले खर्च नई पॉलिसी लेने के 30 दिन बाद बीमारी होने पर कवर किए जाएंगे। बिना अंतराल के लगातार रिन्युअल हुई पॉलिसी में पोर्ट हुई पॉलिसी के लिए 30 दिन की यह शर्त लागू नहीं होगी।

सवाल: क्या स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी में कोविड-19 के लिए डॉक्टर कंसलटेंसी और जांच कवर है?
जवाब: यदि पॉलिसी में आउटपेशेंट ट्रीटमेंट कवर है, तो डॉक्टर्स के साथ सभी परामर्श और उसकी सलाह पर होने वाली जांच कवर होंगी। आउटपेशेंट ट्रीटमेंट कवर के अंतर्गत पॉलिसी में उल्लेखित दावा प्रक्रिया के अनुसार दावा किया जा सकता है। इसके आगे, कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती होने और पॉलिसी के अंतर्गत भुगतान होने पर कोविड-19 से सम्बंधित सभी खर्च, जो चिकित्सक के परामर्श और उसकी सलाह के अनुसार जाँच करवाने पर होते हैं, अस्पताल में भर्ती होने से 30 दिन पहले और डिस्चार्ज के 60 दिन बाद, पॉलिसी के नियमों और शर्तों के अनुसार कवर होंगे।

सवाल: क्या कोविड-19 के कारण चिकित्सक के परामर्श पर होम आइसोलेशन में दवाओं और जाँचों का खर्च कवर होगा?
जवाब: पॉलिसी के नियमों और शर्तों के अनुसार यदि आपकी पॉलिसी में आउटपेशेंट ट्रीटमेंट कवर है तो यह खर्चें कवर होंगे।

सवाल: क्या योजना में क्वारिनटाइन का खर्च कवर होगा?
जवाब: यदि क्वारिनटाइन अस्पताल में और डॉक्टर की सलाह पर किया गया है, तो पॉलिसी के नियमों और शर्तों के अनुसार मेडिकल एक्सपेंसिज में ही कवर किए जाएंगे। वहीं सेल्फ क्वारिनटाइन या होम क्वारिनटाइन के खर्चें कवर नहीं होंगे।

सवाल: क्या योजना में भारत के बाहर अस्पताल में भर्ती होना भी कवर है?
जवाब: नहीं, अगर कोई विदेश में हैं और उसे कोरोना वायरस हो जाता है और उसकी पॉलिसी भारत की है तो उस स्थिति में आपकी पॉलिसी लागू नहीं होगी।

सवाल: क्या योजना के अंतर्गत विदेश का यात्रा इतिहास दावे को प्रभावित करेगा?
जवाब: अगर कोई भी विदेशी से आया है और यह पता चलता है कि उसे कोरोना वायरस हुआ है और हॉस्पिटल में भर्ती हो जाते हैं, तो पॉलिसी के अंतर्गत ट्रैवल हिस्ट्री आपके क्लेम को प्रभावित नहीं करेगी।

सवाल: कोविड-19 में ऐसे कौन-से खर्च हैं, जो पॉलिसी में कवर नहीं होंगे?
जवाब: आईआरडीएआई द्वारा सूचीबद्ध गैर-भुगतान योग्य खर्च पॉलिसी के अंतर्गत कवर नहीं होंगे।

सवाल: क्या मुझे किसी को भी मौजूदा समय में इंश्योर्ड अमाउंट बढ़ाने की परमीशन मिल सकती है?
जवाब: इंश्योर्ड अमाउंट का विस्तार अंडरराइटिंग के दिशा-निर्देशों के अनुसार मेडिकल इवैल्युवेशन के आधार पर परमिटेड होगा। वैसे इंश्योर्ड अमाउंट को बढ़ाना केवल पॉलिसी रिन्युअल के समय ही होगा।

सवाल: यदि कोविड-19 की दवा बन जाती है तो, तो क्या उसका खर्च कवर होगा?
जवाब: यदि पॉलिसी में आउटपैशेंट ट्रीटमेंट कवर है, तो टीके का खर्च कवर होगा।


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अमेरिकन दवा कंपनी ने तैयार की Corona Test Kit, महज 5 मिनट में पता चल जाएगा इंफेक्शन


नई दिल्ली: कोरोना वायरस की वजह से जहां एक ओर पूरी दुनिया का कामकाज ठप्प पड़ चुका है वहीं फार्मा इंडस्ट्री में लगातार एक्सपेरीमेंट किये जा रहे हैं ताकि इस बीमारी का इलाज ढूंढा जा सके। खैर अभी तक वैक्सीन बनाने में तो सफलता नहीं मिली है लेकिन इस वायरस को पहचानने के लिए किट जरूर तैयार किया गया है।

महज 5 मिनट में होगा कोरोना टेस्ट-

अमेरिकन कंपनी Abbott ने एक ऐसी कोरोना वायरस टेस्ट किट तैयार की है जिसकी मदद से मात्र 5 मिनट में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हो जाएगी । अमेरिकी दवा रेग्युलेटर USFDA ने भी इसे मंजूरी दे दी है। कंपनी का कहना है कि अगले हफ्ते से इस किट को बनाना शुरू कर देंगे। जहां कोरोना होने पर मात्र 5 मिनट में टेस्ट पता चला जाएगा वहां नेगेटिव होने की हालत में ये किट 13 मिनट में रिजल्ट देगी।

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गेमचेंजर हो सकती है ये किट-

Abbott की ये किट गेमचेंजर साबित हो सकती है क्योंकि फिलहाल कोरोना का टेस्ट न सिर्फ महंगा होता है बल्कि रिजल्ट आने में भी 2 दिन का वक्त लगता है जिसकी वजह से अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में लैब्स को 24 घंटे खोलकर रखना पड़ रहा है।

ओला सीईओ एक साल की सैलरी देकर करेंगे ड्राइवर्स की मदद

कंपनी का कहना है कि आईडी नाउ Covid-19 टेस्टिंग के एक हफ्ते बाद हमने एबोट M2000 रियलटाइम एसएआरएस-सीओवी -2 ईयूए की टेस्टिंग शुरू की है जो दुनिया भर में अस्पताल और लैब्स में हो रही है। एम 2000 रियलटाइम सिस्टम पर चलता है।


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ओला सीईओ एक साल की सैलरी देकर करेंगे ड्राइवर्स की मदद


नई दिल्ली। कोरोना वायरस की वजह से 21 दिनों के लॉकडाउन के कारण ओला ड्राइवर्स के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। वो ना तो बाहर निकल सकते हैं और ना ही काम कर यसकते हैं। ऐसे में ओला के को फाउंडर और सीईओ भाविश अग्रवाल की ओर से बड़ा ऐलान किया गया है। ताकि देश के लाखों ड्राइवर्स की मदद की जा सके। उन्हें खाने पीने से लेकर दवाओं और जीवन संकट से ना जूझना पड़े। जानकारी के अनुसार भाविश ने अपनी अगले साल की सैलरी ऐसे मजबूर ड्राइवर्स के नाम कर दी है।

ड्राइव द ड्राइवर्स फंड का ऐलान
ओला के को-फाउंडर एवं सीईओ भाविश अग्रवाल ने शनिवार को अपनी अगले साल की सैलरी कंपनी के ड्राइवर्स की मदद के लिए देने का ऐलान किया है। उनके अनुसार लाखों ड्राइवर्स और उनके परिजनों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया है। ऐसे ड्राइवर्स की मदद के लिए ड्राइव द ड्राइवर फंड की शुरुआत की है। इस फंड में भाविश अग्रवाल की अगले साल की सैलरी के अलावा कंपनी कर्मचारी भी इस फंड में करीब 20 करोड़ रुपए डालेगी।

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कई कंपनियों के सीईओ और अधिकारियों ने भी किए हैं ऐलान
भाविश अग्रवाल से पहले कई कंपनियों के सीईओ फाउंडर्स और को फाउंडर्स की ओर से सैलरी और फंड ऐने का ऐलान किया गया है। महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने कहा था कि मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में वेंटीलेटर निर्माण की संभावनाओं पर काम कर रही है। इसके अलावा उन्होंने क्लब महिंद्रा रेजॉट्र्स कोरोना मरीजों की देखभाल के लिए खोल दिए थे। पेटीएम के विजय शेखर ने भी कोरोना काल में 5 करोड़ रुपए की मदद करने का ऐलान किया था।


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कोरोना के चलते दिवालिया हो सकती है एयरलाइंस कंपनियां, 21 दिनों में होगा 75-80 हजार करोड़ का नुकसान


नई दिल्ली: COVID-19 की वजह से पूरी दुनिया ठहर चुकी है लोग अपने-अपने घरों में कैद हैं। इससे सबसे ज्यादा नुकसान एयरलाइंस कंपनियों को हो रहा है । अब जबकि सरकार ने देश में 21 दिनों का लॉकडाउन घोषित कर दिया है। ऐसे में इन एयरलाइंस कंपनियों का काम अगले 21 दिनों तक ठप्प हो चुका है । और एक अनुमान के मुताबिक एविशन सेक्टर को कुल 21 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है। जिसमें से सिर्फ भारतीय कंपनियों को 70-80 हजार करोड़ का नुकसान होगा । और ये दावा है सेंटर फॉर एशिया पैसिफिक एविएशन इंडिया (CAPA) का ।

कोरोना ने तोड़ी एयरलाइंस इंडस्ट्री की कमर, 200 से ज्यादा विमान खड़े होने पर मजबूर

CAPA का कहना है कि इस नुकसान से उबरने के लिए कंपनियों को टाइम लग जाएगा और बहुत हद तक संभव है कि अगले वित्त वर्ष में कंपनियां अपने टिकट की कीमत से लेकर फ्लीट एक्सपेंशन तक का मॉड्यूल बदल सकती हैं।

सिर्फ दिल्ली की बात करें तो यहां 200 से ज्यादा विमान खड़े हैं।

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हर दिन हो रहा है 150 करोड़ का नुकसान-

हमारे देश में हर दिन लगभग 4000 घरेलू और 500 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन होता है। अकेले दिल्ली में ही रोजाना 900 से अधिक उड़ानों का संचालन होता है। लेकिन कोरोना के चलते ये काम 40 फीसदी तक कम हो चुका है। DGCA के अधिकारियों का कहना है कि पहले हर दिन लगभग 350-400 करोड़ रुपए का बिजनेस होता था लेकिन अब हर दिन उड़ानें कैंसिल होने की वजह से 150 करोड़ तक का नुकसान होता है।

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हजारों करोड़ में पहुंच चुका है प्राइवेट कंपनियों का नुकसान-

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक इंडिगो को 21 दिनों के लॉकडाउन के चलते 5494 करोड़ रुपए का नुकसाना हो सकता है जबकि स्पाइसजेट को करीब 1412 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। इसी तरह से एअर इंडिया को प्रतिदिन 30 से 35 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। जबकि कई कंपनियां ऐसी है जो लिस्टेड नहीं है जिसकी वजह से उनके नुकसान का अंदाजा लगाना मुश्किल हैं।

Airlines flights cancellation( per day )
Indigo 1500
Goair 300
Vistara 200
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लॉकडाउन बढ़ने पर बंद करना पड़ सकता है ऑपरेशन-

फिलहाल सरकार ने 21 दिनों का लॉकडाउन लगाया है लेकिन जिस तरह से केस बढ़ रहे हैं कयास लगाया जा रहा है कि ये लॉकडाउन लंबा खिच सकता है । अगर ये लॉकडाउन 3 महीने तक खिंचा तो एक अनुमान के मुताबिक इंडिगो और स्पाइसजेट का वित्त वर्ष 2020 की चौथी और वित्त वर्ष 2021 की पहली तिमाही में साझा नुकसान करीब 1.25 से लेकर 1.50 बिलियन डॉलर होगा। जिसकी वजह से इंडिगो और गोएयर जैसी कंपनियों को कैश रिजर्व खत्म होनेकी सूरत में ञपेशन बंद करने की नौबत आ सकती है।


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Coronavirus Lockdown: Sun Pharma ने किया बड़ा ऐलान, 25 करोड़ रुपए की दवाएं और सैनिटाइजर करेगी दान


नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस से लडऩे के लिए अग्रणी फार्मा कंपनियों में से एक सन फार्मा की ओर से बड़ा ऐलान किया गया है। सन फार्मा की ओर से 25 करोड़ रुपए के मूूल्य की दवाएं और हैंड सैनिटाइजर देने का ऐलान किया है। उससे पहले कई एफएमसीजी कंपनियां भी हैंड वॉश और साबुन का उत्पादन बढ़ाने का ऐलान कर चुकी हैं। आइए आपको भी बताते हैं कि कंपनी आखिर कौन दवाएं दान करेगी।

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कंपनी का आया बयान
सन फार्मा कंपनी की ओर से आए बयान के अनुसार कोरोना महामारी से निपटने के लिए उसकी ओर से 25 करोड़ रुपए मूल्य की हाइड्रोक्सिक्लोरोक्यूइन और एजिथ्रोमाइसिन अन्य दवाएं और हैंड सैनिटाइजर का सहयोग दिया जाएगा। आपको बता दें कि कोरोना वायरस या कोविड 19 को लेकर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिटक रिसर्च की ओर से गठित टास्क फोर्स ने हाइड्रोक्सिक्लोरोक्यूइन को कोरोना वायरस के खिलाफ काफी कारगर बताया है। वल्र्ड हेल्थ ऑगर्नाइजेशन की ओर से भी कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के इलाज के लिए हाइड्रोक्सिक्लोरोक्यूइन के साथ एजिथ्रोमाइसिन के प्रयोग पर अध्ययन किया जा रहा है।

कंपनी ने किया टास्क फोर्स बनाने का ऐलान
सन फार्मा ने अपने बयान में कहा कि वो सरकार और कंपनी स्टेक होल्डर्स के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं। ताकि दवाओं की सप्लाई में किसी भी तरह की दिक्कत ना हो। कंपनी ने टास्क फोर्स के गठन का भी ऐलान किया है, जो दवाओं और वस्तुओं की सप्लाई की भी जिम्मेदारी लेगी। मौजूदा समय में देश में दवाओं और सामान की काफी किल्लत देखने को मिल रही है। जिसकी वजह से देश के कई शहरों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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डॉक्टर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की सराहना
वहीं सन फार्मा ने कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे डॉक्टर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की काफी प्रशंसा की है। कंपनी ने कहा है कि ऐसे कोरोना वॉरियर्स हेल्प के लिए कंपनी अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में हाई क्वॉलिटी हैंड सैनिटाइजर्स का प्रोडक्शन कर रही है। जिसे सोसाइटी और देश की सेवा में जुटे कोरोना वायरस से लड़ रहे वॉरियर्स को दिया जाएगा। कंपनी ने अपने कई कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी गई है।


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कोरोना संकट के दौरान सरकार को हुआ 11500 करोड़ रुपए का फायदा, THDC और NEEPCO को NTPC ने खरीदा


नई दिल्ली: कोरोना संकट में जब सभी तरह से डराने वाली खबरें आ रही है ऐसे में सरकार के लिए एक अच्छी खबर है। दरअसल विनिवेश ( disinvestment) के जरिए सरकार को 11500 करोड़ रुपए की आय हुई है। NTPC ने सरकार के 2 उपक्रमों THDC और NEEPCO का टेकओवर कर लिया है। इसके साथ ही विनिवेश से सरकार की कुल कमाई चालू कारोबारी साल में बढ़कर 46,500 करोड़ रुपए पर हो गई है। चालू कारोबारी साल में सरकार ने विनिवेश से 1.05 लाख करोड़ रुपए कमाने का लक्ष्य रखा था।

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इस समय ये सौदा सरकार के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फिलहाल देश की अर्थव्यवस्था बेहद बुरे दौर से गुजर रही है। कोरोना वायरस के चलते सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया का कमोबेश यही हाल है। और फिलहाल भारत सरकार अपने देश के उद्योगधंधो को बचाने के लिए राहत पैकेज पर कार्य कर रही है जिसके लिए सरकार को अतिरिक्त आय की दरकार है।

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टीएचडीसी में सरकार ने अपनी 74.49 फीसदी हिस्सेदारी बेची। नीपको ( NEEPCO ) में सरकार ने अपनी 100 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी है। विनिवेश से पहले टीएचडीसी (THDC ) में केंद्र की हिस्सेदारी 74.5 फीसदी थी। जबकि 25.5 फीसदी हिस्सेदारी उत्तर प्रदेश सरकार के पास है। इस सौदे के बाद कल शेयर मार्केट में ntpc के शेयर्स में 3 फीसदी का उछाल देखा गया है। आपको बता दें कि विनिवेश के बाद इन दोनों कंपनियों का मैनेजमेंट भी NTPC द्वारा किया जाएगा। और जब मैनेजमेंट ट्रांसफर होता है तो ऐसे विनिवेश को रणनीतिक विनिवेश के अंतर्गत रखा जाता है । और सरकारी कंपनियों के विनिवेश का काम निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) संभालता है।


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क्रेडिट कार्ड के बकाए पर आरबीआई का स्पष्टीकरण, तीन महीने की राहत मिली


नई दिल्ली। जब रिजर्व बैंक ने टर्म लोन की ईएमआई पर तीन महीने की राहत देने का ऐलान किया है, तब से देश के लोगों में कंफ्यूजन बना हुआ था क्या क्रेडिट कार्ड के बकाए पर भी राहत दी जाएगी या नहीं। कई बैंकिंग एक्सपर्ट इस बात को नकार रहे थे कि क्रेडिट कार्ड पर कोर्ठ राहत नहीं मिलेगी। कुछ का कहना था कि अगर किसी ने मोटी खरीदारी क्रेडिट कार्ड से की है और रकम को ईएमआई में कंवर्ट कराया है तो बैंक पर निर्भर करेगा। अब इस बात पर आरबीआई की ओर से कंफ्यूजन को दूर कर दिया गया है।

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क्रेडिट कार्ड के बकाए पर भी राहत
भारतीय रिजर्व बैंक ने आज स्पष्ट किया कि वित्तीय संस्थान क्रेडिट कार्ड के बकाये की अदायगी पर तीन महीने की मोहलत दे सकते हैं। कोरोना वायरस लॉकडाउन के कारण हुए व्यवधान के बीच मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक ने 1 मार्च, 2020 से 31 मई, 2020 तक गिरने वाली किश्तों के भुगतान पर बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को तीन महीने के लिए स्थगित करने की अनुमति दी है। आरबीआई की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इस तरह के लोन रीपेमेंट को मोरेटोरियम पीरियड के तीन महीने बाद ट्रांसफर दिया जाएगा। मोरेटोरियम पीरियड के दौरान सावधि ऋणों के बकाया हिस्से पर ब्याज जारी रहेगी।

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आरबीआई ने किया स्पष्ट
ईएमआई पर आरबीआई की ओर से काफी स्पष्टीकरण दिया गया है। उन्होंने कहा कि सभी टर्म लोन (कृषि अवधि ऋण, खुदरा और फसल ऋण सहित), सभी वाणिज्यिक बैंकों (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, छोटे वित्त बैंकों और स्थानीय क्षेत्र के बैंकों सहित) के संबंध में, सहकारी बैंक, अखिल भारतीय वित्तीय संस्थान और एनबीएफसी (आवास वित्त कंपनियों सहित) को सभी किश्तों के भुगतान पर तीन महीने की मोहलत देने की अनुमति दी है।

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क्रेडिट हिस्ट्री पर नहीं पड़ेगा असर
केंद्रीय बैंक ने कहा मासिक किस्तों में लोन की ईएमआई के साथ-साथ क्रेडिट कार्ड के बकाए को भी शामिल किया गया है। हालांकि वित्तीय संस्थानों को ऋण चुकाने पर तीन महीने की मोरेटोरियम की नीति में अपनाने के लिए बोर्ड की मंजूरी लेनी होगी। लोन रीपेमेंट देरी होने पर किसी भी संस्थान को डिफ़ॉल्ट के रूप में योग्य नहीं माना जाएगा। उधारकर्ताओं के लिए ऋण देने का पुनर्निर्धारण उनके क्रेडिट हिस्ट्री पर किसी तरह का प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।


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