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इसरो साइंटिस्ट नितिन ने नौकरी छोड़ कृषि उपकरण बनाना शुरू किया ताकि किसानों की समस्या दूर हो; अब विदेशों से आ रही डिमांड


शरद पाण्डेय | नई दिल्ली .राजस्थान के साइंटिस्ट नितिन गुप्ता। इसरो में उनका चयन 2008 में हुआ था। लेकिन 2011 में वह नौकरी छोड़कर किसान बन गए, ताकि किसानों की समस्याओं को दूर कर सकें।
दरअसल, नितिन के स्कूल के साथी खेती करते हैं। छुटि्टयों में जब नितिन घर आते तो गांव में ग्रामीण खेती की समस्याओं पर चर्चा करते। नितिन समस्याओं का हल बताते। यहीं से उन्होंने सोच लिया कि वह भविष्य में किसानों को राहत देने के लिए अाविष्कार करेंगे।

इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी। एक दोस्त के साथ मिलकर पहला कॉटन पिकर कृषि उपकरण बनाना शुरू किया। इसे बनाने में दो साल लगे। लेकिन सफलता नहीं मिली। फिर पहाड़ी इलाकों जैसे जम्मू-कश्मीर, लेह-लद्दाख और हिमाचल में रिसर्च की। चार माह बाद उन्होंने एप्पल पिकर बना डाला। इसे किसानों ने बहुत पसंद किया। फिर एक-एक कर 5 प्रकार के उपकरण बना डाले। जिनकी मांग ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और इजरायल से भी आ रही है। उनके ‌आविष्कार को लेकर फिक्की उन्हें बिजनेस इनोवेशन अवॉर्ड से सम्मानित कर चुका है।उन्हें सीआईआई टेक्निकल इनोवेशन इन एग्रीकल्चर अवॉर्ड, आईसीएफए में फूड एंड एग्रीकल्चर में बेस्ट फार्म टेक स्टार्टअप का अवॉर्ड मिल चुका है।

देश की पहली लिंकेज वेजिटेबल मशीन बनाई
साइंटिस्ट नितिन गुप्ता बताते हैं कि वह रिसर्च कर ऐसे उपकरण बनाते हैं, जिनका मैकेनिज्म बाजार में उपलब्ध ही नहीं होता है। कीमत भी ऐसी रखते हैं,जो एक ही सीजन में वसूल हो जाए। उन्होंने हाल ही में देश में निर्मित पहली मार्केट लिंकेज वेजिटेबल फ्रूट ग्रेडिंग मशीन बनाई है। इससे फल-सब्जियां छंटते ही आसपास के आढ़तियों के पास कलर, साइज, क्वालिटी की डिटेल्स के साथ मैसेज पहुंच जाएगा। इससे वे जरूरत के अनुसार किसानों से संपर्क कर पाएंगे।

पहले मंगलयान प्रोजेक्ट के लिए रिसर्च कर चुके; कई उपकरण बना चुके

नितिन गुप्ता श्रीगंगानगर के श्रीकरणपुर गांव के रहने वाले हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई यहीं से हुई, जबकि मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई चेन्नई से की। इसरो में 2008 में बतौर साइंटिस्ट चयन हुआ। 2011 में नौकरी छोड़ मास्टर ऑफ डिजाइन की डिग्री ली और स्टार्टअप शुरू किया। 2015 में पीएम द्वारा स्किल इनोवेशन में देश के टॉप-35 स्टार्टअप में उनका चयन हुआ। नितिन अब तक कॉटन पिक, खुबानी पिकर, सोलर इनसेक्ट ट्रैप, सी बकथॉर्न पिकर और मार्केट लिंकेज ग्रेडिंग मशीन बना चुके हैं। वह भारत के पहले मंगलयान प्रोजेक्ट के लिए रिसर्च कर चुके हैं।



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ISRO scientist Nitin quit his job and started making agricultural equipment so that the problem of farmers was overcome; Now the demand coming from abroad

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आईआईटी-कानपुर ने फोल्डेबल सीढ़ी बनाई, इससे ट्रेन की अपर बर्थ तक पहुंचना आसान होगा


कानपुर. आईआईटी-कानपुर की एक टीम ने भारतीय रेलवे की बोगी के लिए फोल्ड होने वाली सीढ़ी बनाई है। ये सीढ़ियां यात्रियों को आसानी से मिडिल और अपर बर्थ तक पहुंचने में मदद करेंगी। आईआईटी कानपुर से प्रोग्राम डिजाइनिंग में पीएचडी करने वाले कनिष्क बिस्वास ने बताया कि सीढ़ी में 3 फोल्डेबल स्टेप हैं जो लॉक और अनलॉक हो सकते हैं। सीढ़ियां कम जगह लें इसके लिए इन्हें आड़ा-तिरछा (जिग्जॉग स्टाइल) लगाया गया है।

सीढ़ी पर पैर रखने के लिए पहली और दूसरी बर्थ के बीच तीन पाए लगाए गए हैं। जबकि अपर बर्थ तक पहुंचने के लिए एक पाया दिया गया है। दावा है, सीढ़ी को रेलवे के अधिकारियों के पास ट्रायलके लिए भेजा है। ताकि जरूरी औपचारिकताएं पूरी जा सकें। सीढ़ी का डिजाइन पेटेंट कराने के लिए आवेदन पहले ही किया जा चुका है।

सीढ़ियां बनाने में इनकी भूमिका प्रमुख
सीढ़ी को तैयार करने वाली टीम में कनिष्क के अलावापुष्पल डे, अर्थ साइंस विभाग की पीएचडी स्कोलर ईशा रे, मैक्निकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर बिशाख भट्टाचार्य एवं सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डॉ तरूण गुप्ता थे।

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IIT-Kanpur built foldable ladder, it will be easy to reach upper berth of train

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100 साल पुराना पेड़ काटने से पहले बौद्ध भिक्षुओं ने माफी मांगी, सम्मान से विदा किया


कैलिफोर्निया. अमेरिकी राज्य कैलिफोर्निया में 100 साल पुराने पेड़ को काटने से पहले उसे सम्मानपूर्वक विदाई दी। बर्कले की बेनक्राफ्ट स्ट्रीट पर लगा फर का यह पेड़ बीमारी के चलते खोखला हो गया था। इसकी डालियां भी सूख गई थीं। यह कभी भी गिर सकता था। इससे राहगीरों को नुकसान पहुंच सकता था। इसके पड़ोस में स्थित बौद्ध मठ के भिक्षुओं ने इसे काटने का फैसला लिया।

पेड़ को काटने से पहले विदाई समारोह आयोजित किया गया। साथ ही एक भावुक चिट्‌ठी भी लिखी गई। इसमें लिखा, "बेनक्राफ्ट स्ट्रीट पर स्थित पेड़ और इस पर रहने वाले समस्त पक्षियों, कीट-पतंगों और आत्माओं... हम पूरे सम्मान के साथ आपसे कहते हैं कि खराब सेहत और समाज की भलाई को ध्यान में रखकर हमें आपको हटाना पड़ेगा।"

'हम आपके प्रति कृतज्ञहैं'
चिट्‌ठी में लिखा गया, "आपने निस्वार्थ भाव से एक सदी तक हम लोगों को छाया और आश्रय दिया। इसके लिए आपके प्रति कृतज्ञ हैं। आपकी आत्मा को शांति मिले। इस पेड़ पर जिन्होंने घर बसा लिया है, वो जल्द नया बसेरा खोज लें। आपके परिवार को होने वाली परेशानियों के लिए हम माफी मांगते हैं। आप सभी सुरक्षित जगह पहुंच जाएं ताकि आपकी आने वाली पीढ़ियां समृद्ध हो सकें। आप हमेशा यादों में जिंदा रहेंगे।"

  • बीमारी से ग्रस्त पेड़ को काटने के अलावा विकल्प नहीं था
  • पेड़ काटने से पहले इसके पास ही सामूहिक प्रार्थना सभा भी रखी गई
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Before the 100-year-old tree was cut down, Buddhist monks apologized, departed with respect

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दुनियाभर में सर्वाइकल कैंसर से सबसे ज्यादा 60 हजार मौतें भारत में, चीन दूसरे पायदान पर


    हेल्थ डेस्क. दुनियाभर में सर्वाइकल (गर्भाशय का मुंह) कैंसर से सबसे ज्यादा भारतीय और चीनी जूझ रहे हैं। जर्नल लेंसेट ग्लोबल ने 2018 में कैंसर के मामले और इससे हुईं मौतों का आंकड़ा जारी किया है। इस वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 में कैंसर से दुनिया में सबसे ज्यादा 60 हजार मौतें भारत में हुईं, लेकिन इसके सबसे ज्यादा 1 लाख 60 हजार मामले चीन में सामने आए।दुनियाभर में 2018 में सर्वाइकल कैंसर के कुल 5 लाख 70 हजारमामले सामने आए। इनमें एक तिहाई (35%) चीन और भारत से हैं।



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    India has the highest number of deaths from cervical cancer at 60,000, China ranks second

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    स्किन को जवां, चमकदार बनाने के लिए क्लींजिंग,मसाज और मास्क लगाकर घर बैठे ही करें फेशियल


    हेल्थ डेस्क. मल्टीस्टेप फेशियल ट्रीटमेंट आपकी स्किन को साफ करता है। इसे हाइड्रेट करता है और पोषण प्रदान करता है, जिससे आपको जवां, चमकदार स्किन मिलती है। फेशियल आपको तनाव से राहत भी देता है। कई बार हम बिजी शेड्यूल या अधिक खर्च की वजह से 2 घंटे का रॉयल ट्रीटमेंट लेने सलून नहीं जा पाते हैं। लेकिन अपनी स्किन को पैंपर करने के लिए सलून जाना जरूरी नहीं है। कुछ नियमों से आप घर बैठे ही सलून जैसा फेशियल कर सकती हैं और दोगुनी खूबसूरती पा सकती हैं।यहां मेकअप एक्सपर्ट कायनात हुसैन बता रही हैं घर बैठे फिशियल करने के कुछ आसान टिप्स...

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    Facials at home by applying cleansing, massage and mask to make skin young, shiny

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    48 फीसदी भारतीयों को बाहर का खाना है पसंद, 34 फीसदी ही रेस्तरां पहुंचते हैं


    लाइफस्टाइल डेस्क.भारतीय सबसे ज्यादा बाहर से खाना मंगाना पसंद करते हैं। ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप उबर ईट्स के हालिया सर्वे में यह बात सामने आई है। देश के 13शहरों में हुए सर्वे के मुताबिक, 48 फीसदी भारतीय बाहर से खाना ऑर्डर करना पसंद करते हैं वहीं, 34 फीसदी बाहर जाकर खाना खाते हैं। ऑनलाइन सर्वे और इंटरव्यू के आधार जारी हुए आंकड़े के मुताबिक, 18 फीसदी लोग खाना बाहर से पैक कराकर घर लाते हैं।



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    48 percent of Indians in India prefer to order food from outside, 34 percent go out and eat food

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    दुनिया के 100 चुनिंदा टूरिस्ट डेस्टिनेशन की सूची जारी, पहले पायदान पर हॉन्ग-कॉन्ग और टॉप 20 में दिल्ली-मुंबई शामिल


    लाइफस्टाइल डेस्क. ब्रिटिश मार्केटिंग रिसर्च कंपनी यूरोमॉनिटर इंटरनेशनल ने 2019 के दुनिया के 100 चुनिंदा टूरिस्ट डेस्टिनेशन की सूची जारी की है। टॉप 5 डेस्टिनेशन में हॉन्ग-कॉन्ग, बैंकॉक, लंदन, मकाउ और सिंगापुर हैं। लेकिन टॉप 20 में भारत के दो शहर शामिल हैं। दिल्ली 11वें और मुंबई 14वें पायदान है। खासबात है कि 2018 के मुकाबले 2019 में इन दोनों ही शहरों में विदेशी पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है।

    टॉप 10 में दिल्ली के शामिल होने की उम्मीद
    रिपोर्ट शहर की सांस्कृतिक विरासत, यादगार अनुभव और आर्थिक पैकेज के आधार पर तैयार की गई है।रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में वर्ल्ड क्लास एयरपोर्ट, लग्जरी सुविधाओं, मेडिकल, स्पोर्ट्स और कल्चरल टूरिज्म पर ध्यान दिया जा रहा है जो भविष्य में इसे 8 पायदान पर ले जा सकता है। दिल्ली और मुंबई के बाद तीसरा सबसे बड़ा पर्यटन स्थल आगरा को बताया गया है। हालांकि यह 26वें पायदान पर है और 2018 में यहां दुनियाभर के 80 लाख पर्यटक पहुंचे।

    हॉन्ग-कॉन्ग

    एशिया की बादशाहत कायम

    रिपोर्ट में 400 शहरों का डाटा शामिल किया गया है। जहां इंटरनेशनल टूरिस्ट पहुंचे और कम से कम 24 घंटे बिताए। रिपोर्ट में डोमेस्टिक टूरिस्ट और क्रूज पैसेंजर को शामिल नहीं किया गया है। टॉप 100 में सबसे ज्यादा 43 पर्यटक स्थलों के साथ एशिया की बादशाहत कायम है। इसके बाद यूरोप, अमेरिका और अफ्रीका के टूरिस्ट डेस्टिनेशनशामिल है।2018 की रिपोर्ट में भी टॉप 10 में से 6 एशियाई देश शामिल थे। इनमें सबसे आगे एशियाई देशों में हॉन्ग-कॉन्ग, बैंकॉक, सिंगापुर, मकाउ, कुआलालाम्पुर और शेंजान शामिल थे।

    रिपोर्ट के मुताबिक, सिंगापुर एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन के तौर पर तेजी से तरक्की कर रहा है। 2018 के मुकाबले 2019 में पर्यटकों की संख्या में 5.3 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसकी वजह सिंगापुर की बेहतरीन पर्यटन रणनीति और स्थानीय मार्केट बताई गई है।

    दुनिया के टॉप 20 बेहतरीन टूरिस्ट डेस्टिनेशंस

    रैंक टूरिस्ट डेस्टिनेशन टूरिस्ट की संख्या (2018) टूरिस्ट की संख्या (2018)
    1 हॉन्ग-कॉन्ग 29,262,700 26,716,800
    2 बैंकॉक 24,177,500 25,847,800
    3 लंदन, इंग्लैंड 19,233,000 19,559,900
    4 मकाउ 18,931,400 20,637,100
    5 सिंगापुर 18,551,200 19,760,800
    6 पेरिस 17,560,200 19,087,900
    7 दुबई 15,920,700 16,328,300
    8 न्यूयॉर्क, अमेरिका 13,600,000 14,010,000
    9 कुआलालाम्पुर, मलेशिया 13,434,300 14,072,400
    10 इस्तांबुल, तुर्की 13,433,000 14,715,900
    11 दिल्ली, भारत 12,645,300 15,196,500
    12 अंताल्या, तुर्की 12,438,800 13,332,100
    13 शेन्झेन, चीन 12,202,100 12,324,100
    14 मुंबई, भारत 10,590,100 12,442,400
    15 फुकेट, थाइलैंड 10,550,700 10,965,200
    16 रोम, इटली 10,065,400 10,317,000
    17 टोक्यो, जापान 9,985,100 10,443,100
    18 पटाया, थाइलैंड 9,606,400 9,951,900
    19 ताइपे, ताइवान 9,597,800 9,981,700
    20 मक्का, साउदी अरब 9,565,200 9,833,000



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    World's 100 Selected Tourist Destination List Released, Hong-Kong and Top 20 Delhi-Mumbai

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    देश का पहला सोलर प्लांट, पीने लायक पानी की कमी से जूझ रहे 35 हजार ग्रामीणों की बुझा रहा प्यास


    लाइफस्टाइल डेस्क. पानी की हर बूंद कीमती है, लेकिन केन्या के लोगों के लिए यह बेशकीमती है। यहां एक तिहाई से अधिक लोगों में पीने का पानी तक नहीं मिल पाता। परिवार के लिए पीने का पानी लाने के लिए घंटों का सफर तय करना पड़ता है। इस मुश्किल को आसान करने के लिए केन्या के कियुंगा में देश का पहला सोलर प्लांट लगाया गया है जो खारे पानी को पीने लायक बनाता है। इसे दुनियाभर में सोलर प्लांट लगवाने वाले एनजीओ गिवपावर ने बनाया है।

    तस्वीर साभार : गिवपावर

    केन्या का कियुंगा कस्बा मछुआरों की बस्ती है। यहां करीब 3500 लोग रहते हैं। जो सोमालिया के बॉर्डर से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर है। फार्म की मदद से पानी को फिल्टर किया जा रहा है और रोजाना 35 हजार से अधिक लोगों तक पीने का पानी पहुंच रहा है।

    समुद्र तट के किनारे होने लगे इस सोलर वाटर फार्म से 50 किलोवाट बिजली पैदा होती है। यहां दो पम्प की मदद से रोजाना 75 हजार लीटर खारे पानी को पीने लायक बनाया जाता है। एक इंसान को पर्याप्त पानी देने के लिए करीब 1425 रुपए का खर्च आता है, फर्म अगले 20 साल की इसी दाम पर साफ पानी उपलब्ध कराने में सक्षम है।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, दुनिया में हर साल 84.4 करोड़ लोग साफ पानी की कमी से जूझते हैं। इनमें 3 लाख बच्चे हर साल दूषित पानी की वजह से फैलने वाली बीमारी के कारण मर जाते हैं। दुनियाभर में 200 करोड़ लोग ऐसे क्षेत्र में रह रहे हैं जहां पानी बमुश्किल ही मिल पाता है।

    तस्वीर साभार : गिवपावर

    एनजीओ गिवपावर 17 देशों के स्कूलों, मेडिकल क्लीनिक और गांवों में 2,650 से अधिक सोलर पावर एनर्जी सिस्टम लगाए हैं। एनजीओ गिवपावर का लक्ष्य अब ऐसी जगहों पर सोलर वाटर फार्म लगाना है जहां के लोग पीने के पानी की कमी से जूझ रहे हैं।



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    Country's first solar plant, 35 thousand villagers struggling with shortage of potable water, quenching thirst

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    स्टाइलिश दिखना है तो वार्डरोब में हमेशा रखें ये ब्लैक ड्रेसेस, कैजुअल और फ्लेयर्ड ड्रेस से बदलें अपना लुक


    लाइफस्टाइल डेस्क. फैशन की दुनिया में अब डिजाइंस, कलर्स और स्टाइल के अनगिनत विकल्प मौजूद हैं। रंगों को लेकर तो हम अक्सर बहुत ज्यादा कंफ्यूजन में रहते हैं। लेकिन इन सबके बीच एक रंग ऐसा है जो हमेशा ट्रेंड में रहा है और रहेगा। यह रंग है ब्लैक। कोई भी फंक्शन हो, कोई भी मौका हो और कोई भी दौर रहा हो, ब्लैक ने हमेशा अपनी मौजूदगी दर्ज करवाई है। ब्लैक में भी ड्रेसेस के कुछ विकल्प ऐसे हैं जो हर फैशनेबल वुमन के वार्डरोब में होने ही चाहिए। यहां ऐसे ही टॉप 5 ऑप्शन दिए जा रहे हैं, जो ट्रेंड में भी हैं। फैशन राइटर अस्मिता अग्रवाल से जानिए किस तरह की ब्लैड ड्रेसेस पहन सकती हैं।



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    If you want to look stylish, always keep these in the wardrobe, change your look with black dress, casual and flared dress

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    जापान में शरारत पर बच्चों को भूखा सुलाना गैरकानूनी होगा, माता-पिता दोषी होंगे


    टोक्यो.जापान में अब माता-पिता बच्चों को किसी भी तरह की सजा नहीं दे सकेंगे, भले ही वह उन्हें अनुशासित करने के लिए क्यों न हो। जापान की कैबिनेट (इसमें प्रधानमंत्री समेत कई वरिष्ठ मंत्री शामिल हैं) के प्रस्ताव पर देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिशा-निर्देश का मसौदा जारी किया है। इस पर इसी हफ्ते चर्चा की जाएगी। चर्चा के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।

    माता-पिता को बच्चों पर हाथ उठाने से रोकना ही संशोधित बाल उत्पीड़न अधिनियम का उद्देश्य है। बच्चों के साथ उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं के बाद कैबिनेट ने इसमें बदलाव की पेशकश की थी।

    सजा देने के बहाने नहीं चलेंगे
    नए मसौदे के मुताबिक, किसी भी तरह की सजा जिससे शरीर को तकलीफ पहुंचती हो, पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। चाहे वह सजा कितनी भी कमजोर हो, नहीं दी जा सकेगी। इसमें कहा गया है कि कई बार माता-पिता तर्क देते हैं कि बच्चों को कई बार चेतावनी दी, पर वे सुनते ही नहीं, इसलिए गाल पर थप्पी जड़ दी, उसने दोस्तों के साथ पिटाई की, इसलिए सजा देनी पड़ी, बच्चे किसी और का सामान उठा लाए थे, इसलिए भूखे रहने की सजा दी। पर ये तर्क अब सजा का आधार नहीं बन सकेंगे।

    बच्चों को भावनात्मक पीड़ा से बचाने की कोशिश
    नए मसौदे में बच्चों को भावनात्मक पीड़ा से बचाने की कोशिश भी की गई है। इसमें खासतौर पर उल्लेख किया गया है कि भले ही कितने परेशान हों, पर माता-पिता बच्चों से ऐसा नहीं कह सकते,'अच्छा होता कि तुम पैदा ही नहीं हुए होते'। इस तरह की बातें कहना मौखिक दुर्व्यवहार माना जाएगा। इसे बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा। इसके अलावा पढ़ाई या एक्टिविटीज को लेकर बच्चों की अन्य भाई-बहनों से या उनके दोस्तों से तुलना करके उन्हें नीचा दिखाना या उन्हें अनदेखा करना भी गैरकानूनी होगा। फिर भी माता-पिता ऐसा कुछ करते हैं तो उन्हें क्या सजा दी जाए, इस पर अभी विचार होना है। भारी-भरकम जुर्माना भी तय किया जा सकता है। नया कानून अगले साल मार्च से लागू होगा।

    मंत्रालय की सफाई

    हम माता-पिता के अधिकार खत्म नहीं कर रहे इस मसौदे पर आपत्तियां भी आनी शुरू हो गई हैं, इस पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने तर्क दिया है कि हम माता-पिता के अधिकार खत्म नहीं कर रहे। हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि बच्चों के मानस पर बुरा प्रभाव ना पड़े, कोशिश इतनी है कि बच्चों की भावनाएं समझें और समस्याओं को बातचीत के जरिए हल करें।

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    It would be illegal to starve children on mischief, parents would be guilty; Taunting will be heavy

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    3 बच्चों की मां ने 10 महीने की बेटी को स्क्रोलर में लेकर हाफ मैराथन पूरी की, गोल्ड जीता


    न्यूयॉर्क. अमेरिका की जूलिया वेब ने 10 महीने की बेटी को स्क्रोलर में लेकर हाफ मैराथन (21.0975 किमी) पूरी की। तीन बच्चों की मां जूलिया ने ओकलाहोमा में हुई रूट 66 हाफ मैराथन एक घंटे 21 मिनट 23 सेकंड में पूरी कर रिकॉर्ड समय निकाला और गोल्ड जीता।

    उन्होंने स्क्रोलर को धक्का देते हुए सबसे जल्दी हाफ मैराथन पूरी करने की कैटेगरी में वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए दावेदारी पेश की है। दूसरे नंबर पर रहने वाली खिलाड़ी ने जूलिया से दो मिनट ज्यादा समय लिया। पूरी दौड़ के दौरान जूलिया के पति ने उनकी फोटो लीं और वीडियो बनाया।

    बेटे को गोद में लिए मेडल के साथ जूलिया वेब।

    वीडियो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स को भेजा
    अब उन्होंने यह वीडियो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स को भेज दिया है। वर्ल्ड रिकॉर्ड की समिति उनका वीडियो देखने के बाद 12 हफ्ते में फैसला करेगी। मौजूदा वर्ल्ड रिकॉर्ड एक घंटे 27 मिनट 34 सेकंड का है। यह ब्रिटेन की लिंडसे जेम्स ने 2016 में बनाया था। जूलिया की 4 और 7 साल की दो और बेटियां हैं। जूलिया अब अमेरिका की ओलिंपिक टीम के ट्रायल के लिए तैयारी करेंगी।

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    ओकलाहोमा रूट 66 हाफ मैराथन को पूरी करतीं जूलिया वेब।

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    चीन में भारतीय छात्र बीमार, गुजराती छात्रों ने ब्लॉग लिख इलाज के लिए जुटाए 22 लाख रुपए


    साबरकांठा(जतिन सुथार). चीन के नानजिंग से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा गुजरात का 18 साल काछात्र युग पटेल23 नवंबर को दोस्तों के साथ बातचीत के दौरान बेहोश होकर गिर गया। मेडिकल टेस्ट में पता चला कि उसे ब्रेन हैमरेज हुआ है। भारतीय छात्रों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया। साथ ही गुजरात में युग के परिजन को जानकारी दी। इस बीच भारतीय छात्रों ने आर्थिक मदद के लिएब्लॉग लिखा। इसके जरिए उन्होंने करीब 22 लाख रुपए जुटाए।

    युग नानजिंग के टेकोग जियनलिन ड्रम टावर अस्पताल में भर्ती है। युग साबरकांठा का रहने वाला है। वह 2018 में पढ़ाई के लिए चीन गया था। उसके पिता रमेशभाई एक निजी कंपनी में सुपरवाइजर हैं।

    पीएमओ से मदद मांगी ताकि माता-पिता को मिले पासपोर्ट
    युग नानजिंग के टेकोग जियनलिन ड्रम टावर अस्पताल में भर्ती है। यहां हर दिन 10 हजार युआन (करीब 1.10 लाख रुपए) खर्च हो रहे हैं। अब तक 33 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। युग की मां हेमलता बेन और पिता रमेश और भाई यज्ञ के पास पासपोर्ट नहीं है। उन्हें जल्द से जल्द चीन पहुंचने में मदद करने के लिए पीएमओ से मदद मांगी गई है। पासपोर्ट तैयार होने पर उन्हें चीन भेजा जाएगा।

    रक्तस्राव बंद नहीं हुआ तो दूसरी बार हुआ ऑपरेशन
    भारतीय छात्रों ने बताया कि ब्रेन हैमरेज के चलते खून का थक्का जम गया है।डॉक्टरों के मुताबिक, इन केनियल प्रेशर (आईसीपी) कंट्रोल न होने के चलते दो दिनों तक रक्तस्राव बंद नहीं हुआ, इसलिए युग का दूसरी बार ऑपरेशन करना पड़ा। उसकी हालत स्थिर है। भारतीय छात्रों ने बताया कि ब्रेन हैमरेज के चलते खून का थक्का जम गया है। रक्तस्राव न रुकने पर इलाज के लिए युग के पिता रमेशभाई से मंजूरी लेकर ऑपरेशन किया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, इन केनियल प्रेशर (आईसीपी) कंट्रोल न होने के चलते दो दिनों तक रक्तस्राव बंद नहीं हुआ, इसलिए युग का दूसरी बार ऑपरेशन करना पड़ा। उसकी हालत स्थिर है।

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    टेकोग जियनलिन ड्रम टावर अस्पताल में भर्ती भारतीय छात्र युग पटेल।

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    स्लम एरिया की बदली रंगत, अब दुर्गंध और धूल के लिए नहीं सेल्फी-फोटोग्राफी के लिए जाना जा रहा है


    लाइफस्टाइल डेस्क. दिल्ली के स्लम एरिया का वो हिस्सा जिसे लोग अक्सर नजरअंदाज करते थे वहां अब वो रुक रहे हैं और सेल्फी ले रहे हैं। रघुवीर नगर समेत दिल्ली के दूसरे स्लम एरियाज की रंगत बदल गई है। यहां घरों की दीवारों पर बनी खूबसूरत पेंटिंग ने इन्हें थोड़ा खास बना दिया है। जो चर्चा में भी है और आपको एक बार यहां रुकने पर मजबूर भी कर रही हैं।

    स्लम एरिया की रंगत को बदलने का काम किया है दिल्ली आर्ट स्ट्रीट ने। एक महीने से भी कम समय में दिल्ली आर्ट स्ट्रीट के 20 कलाकारों ने दीवारों पर खूबसूरत पेंटिंग उकेरी हैं। कलाकारों ने नेचर, धर्म और रोजमर्रा की लाइफ को दीवारों पर उकेरा है।

    दिल्ली आर्ट स्ट्रीट के संस्थापक योगेश सैनी का कहना है कि हमारा लक्ष्य स्थानीय लोगों और समाज में सकारात्मक सोच लाना था। घरों के रंगरोगन का काम दिल्ली के सांसदों के आग्रह के बाद किया गया था। जो चाहते थे ऐसे क्षेत्रों धूल और दुर्गंध के लिए नहीं अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाए।

    स्थानीय निवासी संतोष के मुताबिक, यहां हुए बदलाव से हम सब काफी खुश हैं। लोग यहां आते हैं और तस्वीर लेते हैं। समाज में अब हमें बराबरी का अहसास हो रहा है। दिल्ली स्ट्रीट आर्ट की इस पहल को काफी सराहा जा रहा है और तस्वीरें सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर रही हैं।



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    Changed slum area, now known for self-photography for foul smell and dust
    Changed slum area, now known for self-photography for foul smell and dust
    Changed slum area, now known for self-photography for foul smell and dust
    Changed slum area, now known for self-photography for foul smell and dust
    Changed slum area, now known for self-photography for foul smell and dust
    Changed slum area, now known for self-photography for foul smell and dust
    Changed slum area, now known for self-photography for foul smell and dust
    Changed slum area, now known for self-photography for foul smell and dust
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    Changed slum area, now known for self-photography for foul smell and dust
    Changed slum area, now known for self-photography for foul smell and dust

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    जलवायु परिवर्तन ने चिड़ियों का आकार बदला, शरीर छोटा हो रहा सिर्फ पंख बढ़ रहे


    लाइफस्टाइल डेस्क. दुनियाभर में चिड़ियों के शरीर का आकार बदल रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण इनका शरीर सिकुड़ रहा है सिर्फ पंख बढ़ रहे हैं। अमेरिका की मिशिगन यूनिवर्सिटी की रिसर्च में यह बात सामने आई है। रिसर्च प्रवासी चिड़ियों पर की गई है। उत्तरी अमेरिका प्रवासी घर की 52 प्रजातियों की 70,716 चिड़ियों पर हुई शोध में कई चौकाने वाली बातें सामने आई हैं। पिछले 40 सालों में इकट्ठा की गईं इन चिड़ियों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं के मुताबिक, रिसर्च से यह भी जानने की कोशिश की गई है जीव कैसे जलवायु परिवर्तन का सामना कर पाएंगे।



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    Climate change changed the shape of birds, the body is getting smaller, only the wings are growing.

    Click here to Read full Details Sources @ https://www.bhaskar.com/lifestyle/happy-life/news/climate-change-is-causing-birds-to-shrink-says-university-of-michigan-study-126215954.html

    सर्दियों में वेजिटेबल ऑयल और नीम की पत्तियों से फटी एड़ियों को बनाएं कोमल


    लाइफस्टाइल डेस्क. महिलाएं अक्सर कामकाज में व्यस्त होने के कारण एड़ियों पर ध्यान नहीं दे पातीं, जिस कारण ऐड़ी की त्वचा सख्त हो जाती है और रूखी होकर फटने लगती हैं। परवाह की कमी से एड़ियों में दरारों का बढ़ना, सूजन, दर्द और चलने में परेशानी होती है। इससे बचने के लिए कुछ आसान से घरेलू उपाय आजमा सकती हैं। ब्यूटी एक्सपर्ट प्राची सक्सेना से जानिए रूखी एड़ियों को कोमल बनाने के टिप्स...

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    The problem of torn ankles is common in winter,home remedies will help to overcome this problem

    Click here to Read full Details Sources @ https://www.bhaskar.com/health/beauty/news/ignoring-cold-ankles-may-increase-pain-and-difficulty-make-them-soft-with-vegetable-oil-and-neem-leaves-126207591.html

    पालतू कुत्तों के साथ बच्चे करते हैं ज्यादा पढ़ाई, सीखने और समझने की बढ़ती है क्षमता


    लाइफस्टाइल डेस्क.लाइफस्टाइल डेस्क. ज्यादातर पेरेंट्स पालतू कुत्तों को बच्चों की पढ़ाई के वक्त दूर रखते हैं ताकि बच्चे पढ़ाई छोड़ने उनके साथ खेलने ना लगें। लेकिन हाल ही में कनाडा के यूबीसी ओकानागन स्कूल ऑफ एजुकेशन की रिसर्च में सामने आया है कि जब बच्चों के आस-पास पालतू कुत्ते होते हैं तो उनका मन देर तक पढ़ाई में लगा रहता है और वो जल्दी सीख और याद कर पाते हैं। बच्चे पढ़ाई में ज्यादा इंट्रेस्ट दिखाते हैं।



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    Children with pet dogs grow more ability to study, learn and understand

    Click here to Read full Details Sources @ https://www.bhaskar.com/lifestyle/home-decor/news/children-with-pet-dogs-grow-more-ability-to-study-learn-and-understand-126207727.html

    सोफा कम बंक बैड और क्यूब सोफा जैसे डिजाइंस सोने और सामान रखने के लिए भी काम


    लाइफस्टाइल डेस्क. जगह की कमी और बढ़ती जरूरतों के अनुसार आजकल काफी कुछ बदलने लगा है। इन्हीं में से एक है सोफा। आजकल बाजारों में नए तकनीक वाले सोफे मौजूद हैं। ये न सिर्फ बैठने के बल्कि सोने और सामान रखने के काम भी आने लगे हैं। इसके अलावा इन्हें कई हिस्सों में भी बांटा जा सकता है। इंटीरियर एक्सपर्टसुकृति सहायसे जानिए घर पर किस तरह का सोफा रखें...

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    Designs like sofa-cum bunk beds and cube sofas will work to keep gold and accessories.

    Click here to Read full Details Sources @ https://www.bhaskar.com/lifestyle/home-decor/news/designs-like-sofa-cum-bunk-beds-and-cube-sofas-will-work-to-keep-gold-and-accessories-126207705.html

    टीवी और मोबाइल ने बच्चों की शारीरिक गतिविधियां घटाईं, खेल-खेल में बच्चों से करवाएं कसरत


    लाइफस्टाइल डेस्क. आज कल बच्चे पढ़ाई के बाद बाकी का समय तकनीक में गुजार देते हैं। इसके कारण उनकी शारीरिक गतिविधियां कम हो गई हैं। खेल-कूद या व्यायाम बच्चों के लिए उतना ही ज़रूरी है जितना बड़ों के लिए। इससे उनका शरीर मजबूत और फुर्तीला बना रहता है। खासतौर से 5 साल से 14 साल के बच्चों के लिए ये जरूरी है। ऐसे में आप बच्चों के साथ खेल-खेल में कुछ मजेदार व्यायाम कर सकते हैं।फिटनेस एक्सपर्ट आरव मिश्रा से जानिए कैसे बच्चों से खेल के दौरानकरवाएं व्यायाम...

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    TV and mobile reduce children's physical activity, get children exercised in sports and games

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    कॉर्न मसाला, मेथी ढेबरा और ज्वार का उपमा जैसी डिशेज सर्दियों में बढ़ाएंगी जुबां का स्वाद


    हेल्थ डेस्क. गर्मा-गरम सब्जी के साथ बाजरे, ज्वार और मक्के के आटे की रोटियां सर्दियों का मजा दोगुना कर देती हैं। ये अनाज स्वादिष्ठ होने के साथ-साथ सेहत के लिहाज से भी फायदेमंद है। शरीर में गर्माहट बढ़ाते हैं और पाचन क्रिया को भी दुरुस्त रखते हैं। इनकी सिर्फ रोटी ही नहीं बनती बल्कि और भी लजीज व्यंजन बनते हैं। फूड ब्लॉगर आस्था रायजादा चंद रेसिपीज आपको बता रही हैं...


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    Dishes like corn masala, fenugreek dhebra and jowar upma will enhance the taste of tongue in winter

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    नए साल के लक्ष्य तय करने के साथ बचे हुए वक्त में खुद को बेहतर बनाना भी जरूरी


    लाइफस्टाइल डेस्क. नए साल के लिए आप बहुत से प्लान बना रही होंगी। हर कोई घूमना, ब्रेक लेना, पार्टीज करना और परिवार से मिलना चाहता है। इस सबके बीच हम यह भूल जाते हैं कि मौजूदा साल में भी हमने बहुत कुछ किया है और ऐसा बहुत कुछ है जिसके लिए हमें आभारी होना चाहिए। बच्चों में भी इस भावना हो बढ़ावा देना जरूरी है कि जो अच्छा होता है उसके लिए हम शुक्रगुजार हों। जितना जरूरी 2020 यानी नए साल के लिए लक्ष्य तय करना है, उतना ही जरूरी है कि जाते हुए साल का भी आनंद लें। आप ऐसा करेंगी तो बच्चे भी इसका महत्व समझेंगे। यहांkidsstoppress.com की एडिटर मानसी जवेरी ऐसी ही पांच चीजें बता रही हैं,जिन्हें बचे हुए साल में अपनाकर न सिर्फ खुद के लिए कुछ बेहतर करेंगी, बल्कि बच्चों को भी कुछ सीखने मिलेगा। यूं तो इसके लिए 27 अंक का कोई महत्व नहीं है, लेकिन चूंकि नए साल में 27 दिन रह गए हैं और कोई मात्रा तय करना ठीक होता है, इसलिए हम 27 तय कर रहे हैं।

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    Along with setting new year's goals, it is also important to improve ourselves in the remaining time

    Click here to Read full Details Sources @ https://www.bhaskar.com/lifestyle/relationship/news/along-with-setting-new-years-goals-it-is-also-important-to-improve-ourselves-in-the-remaining-time-126207444.html

    67 लाख फॉलोअर्स वाली बौनी बिल्ली 'लिल बब' की मौत, नासा ने भी श्रद्धांजलि देकर कहा- अंतरिक्ष में मिलेंगे


    वॉशिंगटन.सोशल मीडिया पर फॉलो की जाने वाली सबसे मशहूर बिल्लियों में से एक अमेरिका की बौनी बिल्ली 'लिल बब' की रविवार को मौत हो गई। 8 सालकी की लिल बब के फेसबुक,इंस्टाग्राम, ट्विटर, टम्बरलर और यूट्यूबपर 67 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। इसके अलावा, इस बिल्ली की अपनी वेबसाइट और खुद का ऑनलाइन शॉपिंग स्टोर भी है।

    कई शारीरिक परेशानियों से पीड़ित इस बिल्ली के सम्मान में एक नेशनल फंड बनाया गया था। इस फंड में इसकी मदद से विशेष जरूरतों वाले जानवरों की मदद के लिए करीब 5 करोड़ रुपए जुटाए गए हैं। नासा ने भी इंस्टाग्राम पर बिब कोश्रद्धांजलि दी। लिखा, "अंतरिक्ष मेंमिलेंगे। प्यारी बब। आपकी यात्रा सुरक्षित रहे।"

    'हड्डी के संक्रमण से जूझ रही थी'

    लिल बब के मालिक माइक ब्रिडावस्की ने फेसबुक और इंस्टाग्रामपर बिल्ली की याद में एक पोस्ट लिखकर कहा, "वह शनिवार के रात अपने परिवार के साथ खुशी-खुशी बिस्तर में गई थी। लेकिन, रविवार सुबह अचानकहमारे जागने से पहले ही वह अपनी नींद में शांति से गुजर गई। मैं हमेशा उसके स्वास्थ्य के बारे में पूरी तरह से पारदर्शी रहा हूं, और यह कोई रहस्य नहीं था कि वह लगातार और हड्डी के संक्रमण से जूझ रही थी।"

    कचरे के ढेर में मिली थी

    • ब्रिडावस्की को लिल बब 21 जून 2011 कोइंडियाना में कचरे के ढेर में मिली थी। यह बिल्लीअपने बौने कद और बाहर निकलती जीभ जैसे खास फिजिकल फीचर्स के लिए मशहूर थी। वह कुछ जेनेटिक विकार से भी पीड़ित थीऔर इन्हीं सब बातों के चलतेबिल्ली इंटरनेट पर सेलेब्रिटी बन गई। टीवी चैनलों पर उसके कई शोज और इंटरव्यू हुए।उसे कई मशहूर टीवी हस्तियों से मिलने का मौका भीमिला।
    • ब्रिडावस्की सोशल मीडिया पर नियमित रूप से इस बौनी बिल्ली के बारे में पोस्ट करते थे और 'गुड जॉब, बब' के साथ कहते थे कि हमतमाम कमियों के बावजूद इस बिल्ली पर गर्व करते हैं।लिल बब से बिछड़ने को लेकर ब्रिडावस्की ने कहा कि, हमने जरा भी नहीं सोचा था कि सेहत संबंधी बिना कोई चेतावनी संकेत दिए अचानक ऐसी चली जाएगी। अपनी इंस्टा पोस्ट में उन्होंने कहा कि 'मैंसचमुच मानता हूं उसने स्वेच्छा से अपना शरीर छोड़ने का निर्णय लिया ताकि हमारे परिवार को उसके बारे में कोई मुश्किल फैसला न करना पड़े।'


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    Famous internet cat 'Lil Bab' with 30 lakh facebook and Instagram followers dies in sleep, raised 5 crores for animals
    Famous internet cat 'Lil Bab' with 30 lakh facebook and Instagram followers dies in sleep, raised 5 crores for animals
    Famous internet cat 'Lil Bab' with 30 lakh facebook and Instagram followers dies in sleep, raised 5 crores for animals
    Famous internet cat 'Lil Bab' with 30 lakh facebook and Instagram followers dies in sleep, raised 5 crores for animals
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    भव्य और आधुनिक परिवेश के साथ ही म्यूजियम, पार्क और शॉपिंग मॉल के लिए जाना जाता है शंघाई शहर


    लाइफस्टाइल डेस्क. चीन का शंघाई शहर अपने भव्य और आधुनिक परिवेश के साथ ही संग्रहालयों, उद्यानों, पार्क और शॉपिंग मॉल के लिए भी जाना जाता है। चहल-पहल से भरा यह शहर दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करता है। चीन का शहर शंघाई अपनी मजबूत अर्थव्यवस्था के साथ-साथ खूबसूरत इमारतों, परिदृश्यों और सांस्कृतिक विविधता के लिए भी जाना जाता है। शंघाई चाइना का सबसे बड़ा और व्यासायिक शहर है, जो चीन के मध्य स्थित है। यह शहर अपनी गगनचुम्बी इमारतों, नदियों, शंघाई टॉवर, ओरिएंटल पर्ल टॉवर के लिए विख्यात है। खरीदारी के लिए नेनजिंग रोड प्रमुख है। मुद्रा युआन है और पेमेंट ज्यादातर नकद या मोबाइल फोन से होता है। चीन के नागरिकों को अपनी मातृभाषा पर गर्व है। प्रत्येक स्थान पर चाइनीज भाषा ही बोली जाती है। चीनी नागरिकों को अंग्रेजी से कोई लगाव नहीं है, इसीलिए यहां ट्रांसलेटर एप की बहुत जरुरत होती है। इसी तरह चीन में कचरा फेंकने के लिए चार कलर कोड के ड्रम प्रत्येक स्थान पर रखे जाते हैं। जिसमें नागरिक वेस्ट और कचरा डालते हैं। इस कारण गंदगी फैलने का खतरा नहीं होता।कुछ वक्त पहले इंदौर की डॉ. साधना सोडानी चीन गई थीं, यहां उन्होंने अपना ट्रेवल एक्सपीरियंस शेयर किया...

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    Known for its grand and modern surroundings as well as museums, gardens, parks and shopping malls

    Click here to Read full Details Sources @ https://www.bhaskar.com/lifestyle/happy-life/news/known-for-its-grand-and-modern-surroundings-as-well-as-museums-gardens-parks-and-shopping-malls-126199744.html

    पहाड़ों से गिरते झरने, टापू से टकराती महासागर की लहरों ने हवाई द्वीप को दिलाया सबसे खूबसूरत आईलैंड का खिताब


    लाइफस्टाइल डेस्क. हमारी दुनिया में कई शानदार जगह हैं। कहीं ऊंचे पहाड़ हैं, तो कहीं बड़े वॉटरफॉल्स। समुद्र के बीच बने कुछ अनोखे टापू पर्यटकों को खूब आकर्षित करते हैं।प्रशांत महासागर में स्थित हवाई द्वीप समूह का माउई आईलैंड दुनिया के सबसे खूबसूरत टापूओं में से एक हैं। इसे हवाई द्वीप समूह का गोल्डन चाइल्ड भी कहा जाता है। घने जंगल, स्वर्ण की तरह चमकती तटीय मिट्टी, पहाड़ों से गिरते झरने, पहाड़ों की ही ओट से झांकती सूरज की किरणें और टापू से टकराती महासागर की लहरें ऐसा आभास कराती हैं मानो प्रकृति एक खूबसूरत फूल की तरह खिल उठी हो। इसे एक बार दुनिया के सबसे अच्छे आईलैंड का खिताब मिल चुका है। इस आईलैंड में कई रिसॉर्ट्स और होटल्स हैं। ऑनलाइन बुकिंग कराकर आप यहां यादगार दिन बिता सकते हैं।

    कैसे पहुंचें : हवाई के लिए भारत से कई उड़ानें उपलब्ध हैं। राजधानी नई दिल्ली से हवाई के लिए वनस्टॉपेज फ्लाइट के साथ ही मुंबई और चेन्नई से भी आपके लिए फ्लाइट्स उपलब्ध हैं। आप ऑनलाइन बुकिंग करा सकते हैं। किराया प्रतिव्यक्ति 85 हजार से एक लाख रुपए के बीच है।

    कहां रुकें : यहां शानदार रिसॉर्ट्स और होटल्स हैं। आप 15 हजार से 1 लाख रुपए तक खर्च करके लग्जरी रूम्स ले सकते हैं।



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    Waterfalls falling from the mountains; make the island of Hawaii even more beautiful
    Waterfalls falling from the mountains; make the island of Hawaii even more beautiful
    Waterfalls falling from the mountains; make the island of Hawaii even more beautiful

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    71 साल के बुजुर्ग ने टेलीकॉम कंपनी से टोल फ्री नंबर पर 24 हजार बार कॉल कर शिकायत की, गिरफ्तार


    लाइफस्टाइल डेस्क. जापान में एक 71 साल के बुजुर्ग को टोल फ्री नंबर पर 24 हजार बार फोन करने पर गिरफ्तार किया गया है। घटना साइतामा शहर की है। बुजुर्ग का नाम एकिटोशी ओकामोटो है।उन पर आरोप है कि पिछले दो सालों में उन्होंने एक टेलीकॉम कंपनी की खराब सर्विसेज को लेकर कई शिकायती फोन कर उन्हें परेशान किया है।



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    एकिटोशी ओकामोटो ने टेलीकॉम कंपनी को एक दिन में करीब 33 और एक हफ्ते में 411 कॉल्स किए।

    Click here to Read full Details Sources @ https://www.bhaskar.com/lifestyle/happy-life/news/71-year-old-man-made-24-thousand-calls-to-telecom-company-arrested-126199899.html

    प्रोटीन को भारतीय जरूरी नहीं मानते, 73% लोग इसकी कमी से जूझ रहे; 93% को इसके फायदे तक पता नहीं


    हेल्थ डेस्क. आयरन और कैल्शियम की तरह भारतीयों में प्रोटीन की भी कमी है। 73% शहरी आबादी में प्रोटीन का स्तर मानक से काफी कम है। खानपान में इसे क्यों शामिल करना चाहिए, 93%लोगों को यह भी पता नहीं है। सबसे चौंकाने वाली बात है कि भारतीय प्रोटीन को महत्व ही नहीं देते।उनका मानना है कि यह सिर्फ जिम जाने वालोंके लिए जरूरी है। इंडियन मार्केट रिसर्च ब्यूरो के हालिया सर्वे में यह बात सामने आई है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 7 शहरों में हुए सर्वे में भारतीयों का मानना है कि डाइट में प्रोटीन का इस्तेमाल वजन घटाने के लिए किया जाता है। 2018 में इनबॉडी-आईपीएसओएस की रिसर्च के मुताबिक, 71% भारतीयों की मांसपेशियां कमजोर हैं। मानक के मुकाबले शरीर में 68% तक प्रोटीन की कमी है। नेशनल सैंपल सर्वे (2011-12) के मुताबिक, ग्रामीण इलाके में 56.5 ग्राम और शहरी इलाके के भारतीय 55.7 ग्राम प्रोटीन लेते हैं।

    रोजाना कितना प्रोटीन जरूरी
    स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में काम कर रहे डॉ. नंदन जोशी कहते हैं- शारीरिक रूप सेसक्रिय न रहना और मानक से कम प्रोटीन शरीर में पहुंचने से युवाओं की मांसपेशियों को कमजोर हो रही हैं। 30 साल की उम्र में मांसपेशियां क्षतिग्रस्त होना शुरू होती हैं। हर 10 साल में 3-5% तक मांसपेशियां डैमेज होती हैं। रोजाना एक्सरसाइज और प्रोटीन इसे रिपेयर करने का काम करते हैं और एक्टिव रखतेहैं। किसी भी इंसान को अपने वजन के मुताबिक प्रोटीन लेना चाहिए। जैसे आपका वजन 60 किलो है तो रोजाना 60 ग्राम प्रोटीन डाइट में लेना चाहिए।

    कमी कैसे पूरी करें
    डाइटीशियन और क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. नीतिशा शर्मा बताती हैं कि मांसाहारी हैं तो डाइट में मीट, चिकन, अंडे ले सकते हैं। शाकाहारियों के लिए दूध, फलियों की सब्जियां, मूंगफली, नट्स और दालें बेहतर विकल्प हैं। एक ही जगह पर दिनभर का ज्यादातर समय बिताना, शरीर सक्रिय न रखना और प्रोटीन का घटता स्तर मांसपेशियों को कमजोर कर रहा है। बचपन से लेकर बुढ़ापे तक, प्रोटीन जीवन के हर पड़ाव के लिए जरूरी है।

    सबसे ज्यादा प्रोटीन की कमी लखनऊ वालों में
    इंडियन मार्केट रिसर्च ब्यूरो के एक अन्य सर्वे में देश के प्रमुख शहरों में प्रोटीन का स्तर जांचा गया। सर्वे में पाया गया 90% लखनऊ के लोगों में प्रोटीन की कमी है। दूसरे पायदान पर दो शहर अहमदाबाद और चेन्नई हैं, यहां की 84% आबादी प्रोटीन की कमी से जूझ रही है। तीसरे स्थान पर विजयवाड़ा (72%) और चौथे पर मुंबई (70%) है। वहीं, दिल्ली में यह आंकड़ा 60 फीसदी है। इस सर्वे में 1800 लोग शामिल किए और उनके खानपान का विश्लेषण किया गया।

    इंडियन डाइटिक एसोसिएशन के मुताबिक, भारतीयों को खानपान से जरूरत का मात्र 50 फीसदी की प्रोटीन मिल पा रहा है। प्रोटीन बच्चों के विकास के अलावा उनके सोचने-समझने की क्षमता को बेहतर बनाता है। यह मांसपेशियों के लिए जितना जरूरी है, उतना ही शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाने के लिए भी अहम है। इसके अलावा स्किन और बालों को खूबसूरत और हेल्दी बनाने के लिए शरीर में पर्याप्त प्रोटीन का होना जरूरी है।

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    Indians do not consider protein necessary, 73% of people are struggling with its deficiency; 93% do not even know its benefits

    Click here to Read full Details Sources @ https://www.bhaskar.com/health/healthy-life/news/indians-do-not-consider-protein-necessary-73-of-people-are-struggling-with-its-deficiency-93-do-not-even-know-its-benefits-126199925.html

    माता-पिता की मौत के बाद दादी ने भी साथ छोड़ा, अब खुद खेती कर पेट पालता है 10 साल का बच्चा


    लाइफस्टाइल डेस्क. 10 साल का डैंग वैन ख्यूएन वियतनाम के एक गांव में अकेला रहता है। ख्यूएन के न तो माता-पिता हैं और न ही भाई-बहन। दादी ने भी उसे अपने साथ रखने से मना कर दिया।डैंग घर संभालता है और खेतों में जाकर काम करता है। वह रोजाना स्कूल भी जाता है और अपना ख्याल खुद रखता है। कई परिवारों ने उसे गोद लेने की इच्छा जाहिर की है लेकिन डैंग ने इनकार कर दिया और खुद अकेले रहने का फैसला किया।

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    A 10-year-old boy lives alone in a broken hut after losing his family in Vietnam.
    A 10-year-old boy lives alone in a broken hut after losing his family in Vietnam.
    A 10-year-old boy lives alone in a broken hut after losing his family in Vietnam.

    Click here to Read full Details Sources @ https://www.bhaskar.com/lifestyle/happy-life/news/a-10-year-old-boy-lives-alone-in-a-broken-hut-after-losing-his-family-in-vietnam-126191681.html

    दुनिया में प्रदूषण से हर साल 70 लाख मौत, इसमें 6 लाख बच्चे भी शामिल, छोटे-छोटे उपायों से घटाएं बढ़ते मौत के आंकड़े


    हेल्थ डेस्क. प्रदूषण मौत के आंकड़े बढ़ा रहा है। दुनियाभर में हर साल 70 लाख लोगों की मौत वायु प्रदूषण से हो रही है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट कहती है, इन आंकड़ों में 6 लाख बच्चे भी शामिल हैं। हवा, पानी, फल और सब्जियों में जहर घुल रहा है। लेकिन घर में छोटी-छोटी सावधानी बरतकर इसके असर और मौत के आंकड़ों को कम किया जा सकता है। हर साल 2 दिसंबर को नेशनलपॉल्यूशन कंट्रोल डे भोपाल गैस त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों की याद में मनाया जाता है। इस मौके पर जानिए हवा में घुलते जहर के असर को कैसे कम करें...

    कैसे इंसानों तक पहुंच रहा 'जहर'
    हवा को प्रदूषित करने की बड़ी वजह है फैक्ट्री और कारखानों से निकलने वाला धुआं, एसपीएम यानी सस्पेंडेड पार्टिक्युलेट मैटर, सीसा और नाइट्रोजन ऑक्साइड आदि। जगह-जगह फेंके और जलाए जा रहे कूड़े से निकल रही गैसें हवा में मिलकर इसे जहरीला बना रही हैं। फैक्ट्रियों और कारखानों से निकला कचरा नदियों में जा रहा है जो डायरिया, टाइफॉयड और हैजा जैसी बीमारियों को फैला रहा है। प्रदूषण की हुए कई शोध बताते हैं यह न सिर्फ जान ले रहा है बल्कि बच्चों के दिमाग पर बुरा असर छोड़ रहा है, गर्भ में पल रहा भ्रूण भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। यह मिस्कैरेज का खतरा बढ़ाता है।



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    7 million deaths due to pollution in the world every year, including 6 lakh children in it, reduce the death toll by small measures

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    जिंदगी को खुशहाल बनाने के लिए संतुष्ट रहना सीखें और सकारात्मक सोच रखें


    लाइफस्टाइल डेस्क. जिंदगी को खुशहाल और तनाव से बचाने के लिए जरूरी है कि इसमें कुछ बदलाव किए जाएं, जीवन के हर पहलू को समझकर संतुष्ट रहना सीखें। सकारात्मक सोच को बनाए रखें। बदलाव जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा है, इसे स्वीकार करना ही बेहतर होगा। अपनी जिंदगी को खुशहाल बनाने के लिए कुछ बातों को स्वीकार करें और कुछ को अपनी जिंदगी से हटाएं। यहांसद्गुरु जग्गी वासुदेवजिंदगी को खुशहाल बनाने के कुछ आसान से उपाय बता रहे हैं...

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    Learn to be satisfied and positive thinking to make life happy

    Click here to Read full Details Sources @ https://www.bhaskar.com/lifestyle/happy-life/news/learn-to-be-satisfied-and-positive-thinking-to-make-life-happy-126191408.html

    दो दोस्तों ने तीन साल में एयर पॉल्यूशन कंट्रोलर ‘क्षल्’ बनाया, यह 800 फीट के प्रदूषण को कम करता है


    चंडीगढ़.वायु प्रदूषण से निपटने के लिए चंडीगढ़ के सेक्टर-27 के दो दोस्त मनोज जेना और नितिन आहलूवालिया ने एयर पॉल्यूशन कंट्रोलर बनाया है। इसका नाम क्षल् रखा है। यह एक संस्कृत शब्द है इसका मतलब टू क्लीन होता है। इसे बनाने में तीन साल में लगे। 30 लाख रुपए लागत आई। 2017 में प्रोडक्ट बनकर तैयार हुआ।

    इसे बनाने के लिए एग्जॉस्ट फैन, पाइप, सेंसर, बैटरी, बकेट आदि का इस्तेमाल किया है। 800 स्क्वायर फीट के लिए बने इस सिस्टम की लंबाई 21 फीट व चौड़ाई 2 फीट है। यह सिस्टम जगह के अनुरूप बड़ा या छोटा हो सकता है। इसका टेस्ट चंडीगढ़ पॉल्यूशन टेस्टिंग लेबोरेटरी ने लिया जो सफल रहा। अब इसका पेटेंट लेने की तैयारी है।

    पॉल्यूशन से खुद बीमार हुए तब विचार आया
    2001 में आए थे चंडीगढ़मनोज जेना और नितिन आहलूवालिया ने बताया, दोनों की दोस्ती 20 साल पुरानी है। हमने महाराष्ट्र के चंद्रपुर के कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की। वहां पर पॉल्यूशन ज्यादा होने की वजह से हमें अस्थमा हो गया। पढ़ाई खत्म करने के बाद हम बिजनेस के लिए दिल्ली आए। फिर 2001 में चंडीगढ़। खैर इलाज करवाने के बाद अब हम ठीक हैं, लेकिन दिमाग में पॉल्यूशन को कंट्रोल करने के लिए कुछ न कुछ करने की सोच ली थी। 2018 में हुए सर्वे एन्वायरनमेंट परफॉर्मेंस इंडेक्स के 180 देशों में भारत 177वें पायदान पर था। यह बेहद ही गंभीर समस्या है।

    इस तरह काम करता है पॉल्यूशन कंट्रोलर

    पॉल्यूशन कंट्रोलर को जहां इंस्टॉल किया जाएगा, वहां के पॉल्यूशन को पहले ऑब्जर्व करेगा। फिर एयर फिल्ट्रेशन का काम शुरू होगा और बची डस्ट को बकेट में रखेगा। यह डस्ट क्ले के रूप में होगी। जिसे फैक्टरी में फ्यूल बनाने के लिए काम में लाया जा सकता है। इंस्टॉल करने के आधे घंटे में एयर क्लीनिंग की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इससे बढ़ा हुआ तापमान भी कम भी होगा।

    एन्वायरनमेंट परफॉर्मेंस इंडेक्स रैंकिंग
    टाॅप पांच देश

    2018 2016
    स्विट्जरलैंड 1st 16th
    फ्रांस 2nd 10th
    डेनमार्क 3rd 4th
    माल्टा 4th 9th
    स्वीडन 5th 3rd

    बाॅटम के पांच देश

    2018 2016
    बुरुंडी 180th 168th
    बांग्लादेश 179th 173rd
    कांगो 178th 171st
    भारत 177th 141st
    नेपाल 176th 149th


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    मनोज जेना और नितिन आहलूवालिया।

    Click here to Read full Details Sources @ https://www.bhaskar.com/interesting/news/two-friends-from-chandigarh-invented-device-to-control-air-pollution-126173492.html

    संयुक्त परिवार टूटने के लिए बहू के जिम्मेदार होने की मान्यता गलत, 75% बहुओं ने माना- झगड़े से परिवार का प्रेम नहीं घटता


    अहमदाबाद (अनिरुद्ध सिंह परमार).देश में संयुक्त परिवार टूट रहे हैं और उसकी मुख्य वजह बहुएं हैं, ऐसी मान्यता पूरी तरह गलत है। आईआईटी गांधीनगर ने अहमदाबाद के 453 संयुक्त परिवारों पर किए गए सर्वे के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। सर्वे में 75% बहुओं ने माना कि संयुक्त परिवार में झगड़े होते हैं, लेकिन इस कारण परिवार के सदस्यों का आपसी प्रेम कम नहीं होता। शोधकर्ता और आईआईटी गांधीनगर की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. तनिष्ठा सामंत ने कहा कि देश में वृद्धाश्रम की बढ़ती संख्या के कारण सर्वेक्षण की यह थीम चुनी गई। इसके लिए इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल रिसर्च का भी सहयोग लिया गया। देश में इसके पहले बहुओं की भूमिका पर कोई आधिकारिक सर्वे नहीं हुआ है। इसमें 50% लोगों ने यह भी माना कि परिवार तो संयुक्त ही होना चाहिए।

    50% लोगों ने माना- परिवार संयुक्त ही होना चाहिए

    डॉ. सामंत ने कहा कि देश में 86% परिवार संयुक्त रूप से रहते हैं। इसके बावजूद वृद्धाश्रमों का प्रमाण अधिक है। मौजूदा समय के बच्चे भी मानते हैं कि आर्थिक संकट के समय परिवार के बड़े-बुजुर्ग ही मददगार साबित होते हैं। सर्वे में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और जैन धर्म के संयुक्त परिवार शामिल थे। इसमें तीन पीढ़ियों के संयुक्त परिवार में रह रहे 86% और 2 पीढ़ी के साथ रहने वाले 14% परिवार शामिल किए गए। सर्वे में बातचीत के लिए 40 साल से अधिक उम्र के लोगों को ही जवाब के लिए चुना गया था।

    DBApp



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    False recognition of daughter-in-law responsible for joint family breakdown, 75% of daughters-in-law admitted that family love does not decrease due to quarrel

    Click here to Read full Details Sources @ https://www.bhaskar.com/national/news/false-recognition-of-daughter-in-law-responsible-for-joint-family-breakdown-75-of-daughters-in-law-admitted-that-family-love-does-not-decrease-due-to-quarrel-126183924.html

    रिश्ते की मजबूती के लिए बातचीत जरूरी, कुछ दिनों तक दूर रहने से भी सुधरते हैं रिश्ते


    लाइफस्टाइल डे्सक. इस कॉलम में रिलेशनशिप एक्सपर्ट डॉ. निशा खन्ना पाठकों की समस्याओं या सवालों का जवाब भी देती हैं और उन्हें सही रास्ता भी दिखाती हैं। सवाल पूछने वाले पाठकों के नाम गोपनीय रखे जाते हैं। अगर आपके रिश्ते में भी सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है तो आपकी समस्याओं का समाधान यहां मिल सकता है।

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    Relationships improve even by staying away for a few days

    Click here to Read full Details Sources @ https://www.bhaskar.com/lifestyle/relationship/news/relationships-improve-even-by-staying-away-for-a-few-days-126183851.html

    एचआईवी पॉजिटिव लोगों ने साझा की अपने संघर्ष की सच्ची कहानियां


    लाइफस्टाइल डेस्क. जागरूकता कार्यक्रमों और सावधानियों के बावजूद एचआईवी पॉजीटिव आना... किसी भी व्यक्ति और उसके परिवार के लिए सदमे जैसा ही होता है। एड्स सुनते ही लोगों का रवैया अक्सर बदल जाता है। शारीरिक तकलीफें तो होती ही हैं, मानसिक तकलीफें उससे भी ज्यादा। एक दिसंबर वर्ल्ड एड्स डे के अवसर पर हमने ढूंढी, मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के कुछ ऐसे परिवारों की कहानियां, जहां यह वायरस भी रिश्तों में दरार न डाल सका।


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    HIV positive people shared true stories of their struggle

    Click here to Read full Details Sources @ https://www.bhaskar.com/lifestyle/happy-life/news/hiv-positive-people-shared-true-stories-of-their-struggle-126183643.html

    सिकुड़ रहा फिलीपिंस का गांव, सालों से चर्च में सभा नहीं, लहरों से लड़ते हुए बच्चे पहुंच रहे स्कूल


    लाइफस्टाइल डेस्क. फिलीपिन्स की राजधानी मनीला से 17 किमी दूर गांव सिटियो परिहान चर्चा में है। गांव का का दायरा घट रहा है। ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण जलस्तर बढ़ता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि चलने के लिए जमीन बमुश्किल नसीब होती है। बच्चे नाव के जरिए स्कूल जाते हैं। जल स्तर बढ़ने की वजह से गांव हर साल 4 सेंटीमीटर घटता जा रहा है। यहां इसका असर सबसे ज्यादा गरीब समुदायों पर दिख रहा है। संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन 2-13 दिसंबर से मैड्रिड में आयोजित किया जाएगा। समिट में संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग और यूरोप की बाढ़ को प्रमुखता से शामिल किया जाना है। फिलीपिन्स की जनता सरकार पर दबाव बना रही है कि सिटियो परिहान का मुद्दा भी समिट उठाया जाए। लोगों में सरकार के प्रति रोष है।

    नहीं बचा पीने लायक पानी

    • सिटियो परिहान गांव में भू-जल भी नहीं बचा है और अब पीने के लिए पूरा गांव एक कुएं पर निर्भर है। ज्यादातर घर पानी में डूबे हुए हैं। बिजली के खंबे नहीं लग पाए हैं। छतों पर लगे सोलर पैनल से बिजली बनाई जा रही है। यहां के लोग अपने घरों से तभी निकलते हैं जब कोई जरूरी काम हो। बाकी समय घर पर बिताना इनकी मजबूरी हो जाती है।

    • पानी भरा होने के कारण चर्च में प्रर्थना सभा का आयोजन नहीं जा रहा है। गांव के हालात 2011 में आए टायफून नेसात तूफान के बाद से ज्यादा खराब होने लगे हैं। इस तूफान में उठी समुद्री लहरें काफी ऊंची थीं, जिस वजह से घर, स्कूल और कई सरकारी इमारतें तबाह हो गईं। तूफान के बाद 50 से अधिक परिवारों ने गांव छोड़ दिया।

    • यहां रहने वालों को जिंदगी गुजर करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। समुद्री जीव यहां का मुख्य भोजन है। जो लोग यहां बच गए वो इसलिए लिए ये जगह नहीं छोड़कर जाना चाहते क्योंकि उन्होंने यहां जीना सीख लिया है। उन्हें डर है कि अगर वो शहर की तरफ गए तो भीख तक मांगनी पड़ सकती है।

    नाव के बिना जिंदगी की कल्पना नहीं

    • यहां रहने वाली 16 साल की डेनिका मार्टीनेज बताती हैं, मैं रोज सुबह अपने भाई-बहनों के साथ नाव से स्कूल जाती हूं। स्कूल पहुंचने में मुझे 30 मिनट का समय लगता है। समुद्र में उठती तेज लहरों की वजह से कभी-कभी मैं पूरी तरह से भीग जाती हूं। यहां रहना बेहद मुश्किल है लेकिन हमारे पास कोई और विकल्प नहीं है। यहां रहना खतरे से भरा है लेकिन अब हमें आदत हो गई है। बिना नाव के यहां रहने की कल्पना नहीं की जा सकती है।

    • डेनिका की मां मेरी जेन मार्टीनेज समुद्री जीव बेचने का काम करती हैं, जिन्हें उनके पति पकड़ते हैं। वह बताती हैं, यहां रहना दिन-ब-दिन तकलीफ देह होता जा रहा है। लेकिन शहर में जाकर बसना और नए सिरे जिंदगी शुरू करना संभव नहीं है। इसलिए हम गांव नहीं छोड़ पा रहे हैं।



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    A village in the Philippines was held due to global warming
    A village in the Philippines was held due to global warming
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    A village in the Philippines was held due to global warming
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    A village in the Philippines was held due to global warming
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    A village in the Philippines was held due to global warming

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    पाइप पर गैस सिलेंडर, बोतल पर टीवी भी बैलेंस कर देते हैं मोहम्मद; यूट्यूब पर वीडियो देखकर मिली प्रेरणा


    लाइफस्टाइल डेस्क. फिलिस्तीन के रहने वाले मोहम्मद अल शेनबारी किसी भी चीज को बैलेंस कर सकते हैं। मोहम्मद कहते हैं कि वे किसी भी चीज को देखकर उसका 'बैलेंस पॉइंट' ढूंढने की कोशिश करते हैं और फिर उसे बैलेंस कर देते हैं। मोहम्मद जिस तरह से चीजों को बैलेंस करते हैं, उससे गुरुत्वाकर्षण के नियम भी फेल हो जाते हैं। 24 साल के मोहम्मद का दावा है कि वे अपने दिमाग और शरीर की मदद से लगभग सभी चीजों को बैलेंस कर सकते हैं।

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    Gas cylinders on pipes, TVs on bottles also balance Mohammed; Inspired by watching video on YouTube
    Gas cylinders on pipes, TVs on bottles also balance Mohammed; Inspired by watching video on YouTube
    Gas cylinders on pipes, TVs on bottles also balance Mohammed; Inspired by watching video on YouTube
    Gas cylinders on pipes, TVs on bottles also balance Mohammed; Inspired by watching video on YouTube

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    अकेले खाना खाने का नया ट्रेंड, सोलो डाइनर्स के लिए जगह बना रहे रेस्त्रां ओनर्स


    लाइफस्टाइल डेस्क. लगभग हर शहर के रेस्त्रां में बड़े समूहों के लिए बड़ी टेबलें रखी जाती हैं। लेकिन कई रेस्त्रां सोलो डाइनर्स के लिए भी जगह बना रहे हैं। सोलो ट्रैवलिंग के साथ ही सोलो डाइनिंग ट्रेंड की शुरुआत भी हुई है। हालांकि सोलो डाइनिंग वे लोग भी करते हैं जो शहर में अकेले हैं, नए आए हैं। कुछ लोगों को अकेले बैठकर खाने का विचार डराता भी है। अकेले खाना खाते वक्त किन बातों का ख्याल रखना जरूरी है बता रही हैं वर्षा एम...


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    New trend of eating alone, restaurant owners making room for solo diners

    Click here to Read full Details Sources @ https://www.bhaskar.com/lifestyle/happy-life/news/new-trend-of-eating-alone-restaurant-owners-making-room-for-solo-diners-126175021.html

    हड्डियां मजबूत करेगा अंजीर और अनिद्रा से राहत देगा कीवी, सर्दियों में जरूरत के मुताबिक चुनें फल


    हेल्थ डेस्क. सर्दियों के मौसम में कई तरह केफल बाजार में मिलने लगते हैं। ये रसीले और बेहद स्वादिष्ट होते हैं। इन मौसमी फलों में कई गुण भी छुपे होते हैं जो हमारे शरीर को पोषण देते हैं। सर्दियों में मिलने वाले फल आंखो से लेकर मसल टिशू के लिए फायदेमंद होते हैं। फूड ब्लॉगर मानसी पुजारा से जानिए सर्दियों में मिलने वाले फलों के बारे में...



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    choose fruits according to need in winter

    Click here to Read full Details Sources @ https://www.bhaskar.com/health/food/news/kiwi-will-strengthen-bones-and-relieve-insomnia-choose-fruits-according-to-need-in-winter-126175076.html

    दुनिया में प्रवासी भारतीयों की आबादी 1.75 करोड़, मैक्सिको दूसरे और चीन तीसरे स्थान पर


    संयुक्त राष्ट्र.दुनिया में सबसे ज्यादा प्रवासी, भारतीय मूल के लोग हैं। इनकी संख्या 1.75 करोड़ है।द इंटरनेशनल आर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (आईओएम) ने अपनी ग्लोबल माइग्रेशन रिपोर्ट 2020 में यह दावा किया है। यह रिपोर्ट 2018 के आंकड़ों के आधार पर बनाई गई है। इसके मुताबिक दूसरे स्थान पर मैक्सिको (1.18 करोड़) और तीसरे पर चीन (1.07 करोड़) है। भारतीय 2015 में भी सबसे आगे थे।

    तीन साल में भारतीय प्रवासियों की संख्या में 0.1% बढ़ोतरी हुई है। इन लोगों ने अपने देश को एक साल में 5.5 लाख करोड़ रुपए भेजे हैं। यह 2015 की तुलना में 70 हजार करोड़ रुपए ज्यादा है,जबकि दुनियाभर के प्रवासियों ने अपने देशों में 49 लाख करोड़ रुपए भेजे।

    दुनिया में प्रवासियों की संख्या करीब 27 करोड़

    दुनिया में प्रवासियों की संख्या करीब 27 करोड़ है। प्रवासियों का सबसे बड़ा देश अमेरिका है। यहां करीब 5.1 करोड़ प्रवासी हैं। यह आंकड़ा दुनिया की आबादी का 3.5% है। इसका मतलब यह है कि अमूमन किसी भी देश में 96.5 % लोग स्थानीय या मूल निवासी ही हैं। प्रवासियों में से आधे से अधिक यानी 14.1 करोड़ यूरोप और उत्तर अमेरिका महाद्वीप में रहते हैं। प्रवासियों में 52 % पुरुष हैं। करीब दो तिहाई यानी 16.4 करोड़ प्रवासियों को रोजगार की तलाश है।

    ग्रीन कार्ड पाने के लिए कतार में दूसरे नंबर पर भारतीय
    भारत के करीब 2.27 लाख लोगों को अमेरिका में वैध स्थायी निवास की अनुमति का इंतजार है। ये लोग परिवार प्रायोजित ग्रीन कार्ड पाने के लिए कतार में हैं। इस सूची में मैक्सिको के सबसे ज्यादा 15 लाख लोग हैं। इसके बाद भारत और फिर 1.80 लाख के साथ चीन का नंबर है। ये वे लोग हैं, जिनके परिवार का कोई सदस्य अमेरिकी नागरिक है। अब ये भी वहां बसना चाहते हैं।

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    Highest migrant Indians in the world, with a population of 1.75 crores, Mexico second and China third

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    स्वीडन के एक गांव में तैयार ही होने वाली चीज का स्वाद आज भी रहस्य, मान्यता; उल्का पिंड गिरने से ऐसा हुआ


    लाइफस्टाइल डेस्क . स्वीडन के बुर्टरास्क गांव में तैयार की जाने वाली चीज को रहस्य करार दिया गया है। इसेस्थानीय भाषा में वास्टरबॉटेंसॉस्ट कहते हैं। एक साल में इसका 4 हजार टन तक निर्माण किया जाता है। यह अपने खास किस्म के स्वाद के लिए जानी जाती है। वास्टरबॉटेंसॉस्ट की कीमत अन्य चीज के मुकाबले दोगुनी है। इस क्रीमी टेक्सचर वाले चीज को देश के छोटे से गांव बुर्टरास्क की एक फैक्ट्री में ही बनाया जाता है। दिलचस्प बात ये है कि इसे कई बार गांव से बाहर बनाने की कोशिश की गई लेकिन वो स्वाद नहीं आ पाया। ऐसा क्यों, इस पर स्थानीय लोगों की अलग-अलग मान्यताएं हैं।



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    Vasterbottensost cheese is made in a small village, so far no one has made it outside the village

    Click here to Read full Details Sources @ https://www.bhaskar.com/lifestyle/happy-life/news/vasterbottensost-cheese-is-made-in-a-small-village-and-nobody-knows-why-126168006.html

    दुनिया की सबसे मजबूत जैकेट,दावा; स्टील से 15 गुना ज्यादा स्ट्रॉन्ग और गोलियों से बचाने में भी सक्षम


    लाइफस्टाइल डेस्क. डच ब्रांड वॉलीबेक ने दुनिया की सबसे मजबूत जैकेट बनाई है। दावा है कि यह स्टील से 15 गुना ज्यादा स्ट्रॉन्ग है। इसे खास किस्म के फायबर डायनीमा से तैयार किया गया है। यह सर्द और बर्फीले मौसम से से बचाती है और तापमान माइनस 50 डिग्री सेल्सियस जाने पर भी सर्दी का अहसास नहीं होने देती। टेस्टिंग में इसकी पुष्टि हो चुकी है।

    वॉलीबेक एडवेंचर स्पोर्ट्स के कपड़े बनाने के लिए जानी जाती है। जो काफी मजबूत माने जाते हैं। कंपनी का कहना है कि हालिया तैयार हुई जैकेट दूसरे एरामिड फायबर से 40 गुना ज्यादा मजबूत है। इसे तैयार करने में ऐसे फायबर का इस्तेमाल किया गया है जिसे एंटी-बैलेस्टिक व्हीकर आर्मर में किया जाता है।

    आमतौर पर जैकेट को हल्का बनाने के लिए पॉलिस्टर या नायलॉन का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन इससे तैयार होने वाले कपड़ाेंको आसानी से कटने का खतरा रहता है। लेकिन हालिया जैकेट 100 फीसदी डायनीमा फाबर से तैयार की गई है जो दुनिया का सबसे मजबूत फायबर है।

    जैकेट का वजन 2.5 किलो है और दशकों तक इस्तेमाल की जा सकती है। कंपनी का कहना है कि जांच के दौरान इसके फायबर इतने मजबूत थे कि टेस्टिंग मशीन भी टूट गई थी। बंदूक की गोलियां भी इसे नहीं भेद पाई।

    इस जैकेट में फायबर की पर्तें और बढ़ाई जाएं यह बंदूक की गोली को रोक सकती है। एडवेंचर एक्टिविटी करने वालों के लिए यह काफी राहत देने वाली है। जैकेट का दाम 70 हजार रुपए रखा गया है। वॉलीबेक ने इससे पहले ऐसी पैंटबनाई थी जिसे 100 साल तक इस्तेमाल किया जा सकता है।



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    The world's strongest jacket, the company claims; 15 times more efficient than steel and also able to protect from bullets

    Click here to Read full Details Sources @ https://www.bhaskar.com/lifestyle/happy-life/news/the-worlds-strongest-jacket-the-company-claims-15-times-more-efficient-than-steel-and-also-able-to-protect-from-bullets-126168124.html

    दुल्हन का लुक हो सादगी और राजसी से सजीला


    लाइफस्टाइल डेस्क. शादी यानी कई दिनों तक चलने वाला खास इवेंट। ढेर सारी रस्में, कई फंक्शन और उतने ही ज्यादा सजने-संवरने के मौके। हर दिन, हर फंक्शन के लिए अब अलग-अलग लुक्स अपनाए जा रहे हैं। ड्रेस, मेकअप और एसेसरीज, सबका ख्याल रखना होता है। किसी भी शादी में सगाई, संगीत, मेहंदी, कॉकटेल पार्टी और आखिरी में शादी का दिन, ये सारे इवेंट होते हैं। ड्रेस और मेकअप के तो कई ऑप्शन मौजूद हैं लेकिन एसेसरी के लेटेस्ट ट्रेंड्स को लेकर सबसे ज्यादा कंफ्यूजन रहता है। दुल्हन का लुक हर एक सेरेमनी के साथ सादगी से सजीला तक और फिर आखिर में राजसी हो जाना चाहिए। इस बार हमने ज्वेलरी एक्सपर्ट और मीनाकारी ज्वेलरी के लिए मशहूर सुनीता शेखावत से जाना कि किस मौके पर कौन-सी एसेसरी सबसे अच्छा ऑप्शन होगा।

    सगाई के लिए क्लीन लुक

    शादी के फंक्शंस का पहला पड़ाव सगाई है। इसमें क्लीन लुक इन दिनों ट्रेंड में है। क्लीन या सादगीभरे लुक के लिए आप कानों में चांदबाली पहन सकती हैं। यह सिंपल होने के बावजूद काफी फैशनेबल भी लगेगी।

    मेहंदी में ट्रेडिशनल लुक

    इस मौके लिए पारंपरिक लुक ही सबसे बेहतर होता है। मेहंदी सेरेमनी में दुल्हन हाथफूल और मांगटीका पहन सकती है। साथ में गले में रंगबिरंगा चोकर (गले से चिपके रहने वाले हार का प्रकार) पहनना भी इन दिनों ट्रेंड में है। इससे पूरी तरह पारंपरिक लुक मिलता है।

    संगीत में नेकलेस पर जोर

    संगीत सेरेमनी यानी डांस और मस्ती का मौका। संगीत सेरेमनी के लिए कानों में खूबसूरत स्टड (छोटी, कान से चिपकी हुई बालियां) पहनी जा सकती हैं। साथ में स्टेटमेंट लॉन्ग नेकलेस पहनिए। यह कई लेयर वाला हो तो ज्यादा अच्छा, ताकि जब आप खुशी में झूमें तो संग में नेकलेस भी लहराता नजर आए।

    कॉकटल पार्टी में शार्प लुक

    शादी स्पेशल कॉकटेल पार्टी एक अलग मूड का इवेंट होता है। यह बाकी सेरेमनीज से शांत और एलीगेंट इवेंट है। इसके लिए आप कानों में शोल्डर डस्टर्स (कान के लंबे झुमकों का प्रकार) पहन सकती हैं। साथ में कलाई पर स्टेटमेंट कफ पहना जा सकता है। इससे आपको शार्पलुक मिलेगा, जो इस इवेंट के लिए परफेक्ट होता है।

    शादी रॉयल लुक का मौका

    यह सबसे ज्यादा सजने और रॉयल लुक अपनाने का मौका होता है। इसमें सबकुछ रॉयल लगना चाहिए। इस मौके पर अब सिंपल सोने के हारों की जगह एक-दूसरे से मेल खाते चोकर और लेयर्ड नेकलेस पहनना ट्रेंड में है। साथ में बड़े इयरिंग्स, माथा पट्टी, टीका और वेस्ट बेल्ट भी काफी पहने जा रहे हैं। साथ ही कलाईयों को उभारने वाली चूड़ियां पहनिए। इन सबके कॉम्बिनेशन से ही आपको आपके सबसे खास दिन के लिए रॉयल लुक मिलेगा।



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    Special accessories for every wedding ceremony

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    सर्दियों में गर्ल्स की पहली पसंद सेलर पैंट, फार्मल और कैजुअल तरह से पहनें


    लाइफस्टाइल डेस्क. विंटर में एंकल फीट ट्राउजर्स और स्किन टाइट जींस के बजाय गर्ल्स सेलर पैंट पहनना ज्यादा पसंद कर रही हैं। इनकी खास बात यह है कि इन्हें फार्मल और कैजुअल दोनों तरह की ड्रेस के रूप में कैरी किया जा सकता है।

    एनिमल प्रिंटेड


    वाइड लेग इन पैंट को फ्रंट साइज में चौड़ा रखा जाता है। कुछ पैंट में कमर पर चौड़ा टाइट बेल्ट होता है और उसके नीचे से प्लीट्स या स्किन टाइट पैंट डिजाइन की जाती है। विंटर के लिए ये ट्राउजर वेल्वेट और वूलन में भी उपलब्ध हैं। गर्ल्स ऑफिस में फॉर्मल लुक के लिए इन्हें शर्ट या टॉप के साथ पहन रही हैं।


    प्लेन सेलर पैंट


    ये पैंट सेटिन और क्रेप फेब्रिक में सबसे ज्यादा पसंद की जाती हैं, क्योंकि इन फैब्रिक में फॉलिंग लुक मिलता है। वाइड लेग स्टाइल में प्लेन सेलर पैंट खासतौर से पसंद की जा रही हैं। इनके साथ फ्रील स्लीव्स विंटर क्रॉप टॉप कैरी कर स्टाइलिश लुक पा सकती हैं।

    क्रॉप्ड स्टाइल


    डेनिम लवर गर्ल्स अगर कुछ नया स्टाइल ट्राय करना चाहती हैं तो क्रॉप्ड वाइड लेग सेलर पैंट उनके लिए परफेक्ट ऑप्शन है। इस थ्री फोर्थ वाइड लेग पैंट को स्टाइलिश श्रग या जैकेट्स के साथ पहनना उन्हें फैशन दीवा बना सकता है।

    चेक्स बनी पसंद

    कैजुअल लुक के लिए चेक्स वाली सेलर पैंट उपयुक्त है। विंटर में इन ट्राउजर को लेदर जैकेट के साथ कैरी करना ट्रेंड में है। बाइकर या बॉम्बर लेदर जैकेट के साथ गर्ल्स इस तरह की हाई वेस्ट वाइड लेग ट्राउजर पहनना पसंद कर रही हैं। स्टाइलिश लुक के लिए ये स्टाइल गर्ल्स में बहुत पॉपुलर है।

    हाई वेस्टेड पैंट


    कंफर्ट का अहसास कराने वाली इस तरह की पैंट आप कैजुअल से लेकर आउटिंग के दौरान पहन सकती हैं। इसे कंट्रास्ट में या मैचिंग टॉप के साथ पहनकर आप अपने स्टाइल को बढ़ा सकती हैं। कूल और स्टाइलिश लुक के लिए इस तरह की ड्रेस के साथ डिजाइनर स्कार्फ कैरी कर सकती हैं।



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    Sailor pants are the first choice of girls in winter, worn in formal and casual manner.

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    दोस्त की बारात में हैंडसम दिखना है तो यूं अपडेट करें अपना वार्डरोब


    लाइफस्टाइल डेस्क. अगर आप दोस्त की बारात में छा जाना चाहते हैं तो अपने वार्डरोब को अपडेट करना सीखें। ये लेटेस्ट फैशन ट्रेंड आपको सबसे अलग दिखाने में मदद करेंगे। हम बता रहे हैं कुछ ऐसे कपड़ों के बारे में जिनकी वेडिंग सीजन के दौरान आपको शॉपिंग करना ही चाहिए।

    ब्लू जींस


    इस कलर की जींस कई रंगों की टीशर्ट पर अच्छी लगती है। पार्टी में इसे स्टाइलिश टॉप के साथ पहन सकते हैं। इसके साथ ब्लेजर या जैकेट भी सूट करते हैं। बॉयज इसे कैजुअल वियर के तौर पर ट्राय करें। इसके साथ वॉच जैसी एसेसरीज आपकी पर्सनालिटी निखारने में मदद करती है।

    लेदर जैकेट


    लेदर की जैकेट किसी लड़के के पास न हो, तो स्टाइल में कमी रह ही जाती है। इसके लिए आप काला या हलका ब्राउन कलर चुन सकते हैं। अगर आपकी टीशर्ट नॉर्मल सी भी है तो ये जैकेट आपको हैंडसम लुक देगी। इसके साथ मफलर या कैप पहनकर अपने लुक को बढ़ाया जा सकता है।

    पोलो शर्ट


    पोलो शर्ट में लगभग हर लड़का बहुत स्मार्ट लगता है। हाफ स्लीव्स की स्पोर्टी लुक देने वाली इस टीशर्ट में आपके बाइसेप्स भी शो होते हैं। इसके ब्रॉड कॉलर आपको स्मार्ट लुक देते हैं। नेवी और काले रंग की पोलो शर्ट आप पर खूब सूट करेगी। अगर शादी दिन के समय है और कुछ समझ नहीं आ रहा तो पोलो टी शर्ट को जींस के साथ पहनकर जा सकते हैं।

    व्हाइट शर्ट

    लड़कों पर सफेद रंग की शर्ट बहुत जंचती है। एक ऐसी शर्ट तो आपकी अलमारी में होनी ही चाहिए। इस कलर की राउंड नेक लेयर्ड टी-शर्ट भी आपकी स्मार्टनेस बढ़ाने में मदद करेगी। अगर आप सिंपल और स्टाइल का मिक्सचर चाहते हैं तो ऐसे शर्ट को ब्लेजर के साथ पहन सकते हैं। इस मौसम में व्हाइट के अलावा ब्लैक शर्ट भी ऑन डिमांड है।

    सूट


    शादी में जाने के लिए सूट सबसे अच्छे विकल्प में से एक है। अगर आप सूट में ट्रेंडी लुक चाहते हैं तो शर्ट के बजाय प्रिटेंड टी-शर्ट और फॉर्मल शूज के बजाय व्हाइट स्नीकर्स पहनकर देखें। इससे आप एकदम स्टाइलिश दिखेंगे। हालांकि सूट के कलर का चयन अपने स्किन टोन के हिसाब से करें।



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    Update your wardrobe if you want to look handsome in friend's wedding

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    थैंक्सगिविंग का नया ट्रेंड, पार्टियों में परिचितों के बजाय अकेले युवा-बुजुर्ग और अजनबियों को बुला रहे लोग


    वॉशिंगटन(एलिसन क्रुएगर). अमेरिका में थैंक्सगिविंग का नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। अब लोग परिचितों के अलावा अजनबियों को भी इसका हिस्सा बनाने लगे हैं। वजह काफी सकारात्मक है। आज की पीढ़ी ऐसे लोगों को अपने जश्न में शामिल कर उन्हें भी अहसास कराना चाहती है कि वे अकेले नहीं हैं। दरअसल अमेरिका में अकेले, परिवार से अलग रह रहे लोगों या बुजुर्गों की संख्या ज्यादा है। ऐसे लोगों के अकेलेपन, खालीपन को दूर करने का विचार दोनों ही पक्षों के लिए फायदेमंद बनकर उभर रहा है।

    एडम नाओर और उनकी दोस्त ने मैनहट्‌टन स्थित अपने अपार्टमेंट पर थैंक्सगिविंग डे डिनर के लिए बाकायदा विज्ञापन दिया। इसमें कहा गया कि हर उस अकेले व्यक्ति का स्वागत है, जिसे अधिक सामाजिक-मजेदार डिनर करना हो। नोआर कहते हैं, उनका परिवार कैलिफोर्निया में रहता है, दोस्त का परिवार जर्मनी में रहता है। इसलिए हम अपनी खुशी में ऐसे लोगों को शामिल करना चाहते हैं, जो अकेले रहते हैं।

    एक जैसी विचारधारा के लोग अपने आप जुड़ते हैं
    नोआर की तरह कई लोग घर में छोटा आयोजन करते हैं, जबकि कुछ बड़े आयोजन करते हैं। नए ट्रेंड के असफल होने की गुंजाइश भी है। पहली बार आने वाले लोग असहज, अकेलापन महसूस कर सकते हैं, लेकिन इन पार्टियों में एक जैसी विचारधारा के लोग अपने आप जुड़ जाते हैं। अब अमेरिकी अपनी छुटि्टयां अपने बच्चों या परिचितों के बजाय एकसमान विचारधारा के लोगों के साथ बिताना चाहते हैं।

    पार्टी में 50 में से 20 लोग अजनबी थे
    जीसले सोटो ने थैंक्सगिविंग फीस्ट के लिए 50 मेहमानों को बुलाया। उनमें से 20 लोग ऐसे हैं, जिनसे वे कभी नहीं मिली हैं। जीसले शाकाहारी हैं। ऐसे में परिवार के साथ खाने में असहज महसूस करती हैं। इसलिए उन्होंने शाकाहारी लोगों को बुलाना शुरू कर दिया।

    सूची में 80 साल तक की मेहमान शामिल
    सारा स्कॉट हिचिंग्स पिछले पांच साल से लोगों को थैंक्सगिविंग डे पर रेडिट के जरिए न्योता देती हैं। वे कहती हैं, मेरे मेहमानों में 80 वर्षीय महिला भी है। इस साल उनके यहां 80 लोग जुटे। अमेरिकी मानते हैं कि परिवार या दोस्तों के साथ जश्न कभी पुराने मुद्दों पर कड़वाहट ला देता है। लेकिन अनजानों के मामले में मनमुटाव की संभावना नहीं रहती।

    (दैनिक भास्कर से विशेष अनुबंध के तहत)



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    The new trend of Thanksgiving, people calling alone young people and strangers instead of acquaintances at parties

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    सर्दियों में गर्ल्स की पहली पसंद है सेलर पैंट, फार्मल और कैजुअल तरह से पहनी जाती है


    लाइफस्टाइल डेस्क. विंटर में एंकल फीट ट्राउजर्स और स्किन टाइट जींस के बजाय गर्ल्स सेलर पैंट पहनना ज्यादा पसंद कर रही हैं। इनकी खास बात यह है कि इन्हें फार्मल और कैजुअल दोनों तरह की ड्रेस के रूप में कैरी किया जा सकता है।

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    Sailor pants are the first choice of girls in winter, worn in formal and casual manner.

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    फ्यूजन खाने का बढ़ रहा चलन, छत्तीसगढ़ के पारम्परिक व्यंजनों में चखें विदेशी स्वाद


    हेल्थ डेस्क. पारम्परिक व्यंजनों में विदेशी स्वाद का तड़का अधिकतर पसंद किया जाता है। इसे फ्यूजन कहा जाता है जो काफी समय से चलन में भी है। कुछ ऐसे ही फ्यूजन छत्तीसगढ़ के पारम्परिक व्यंजनों में लेकर आए है।फूड ब्लॉगर नीलम अग्रवाल बता रही हैं देसी व्यंजन में विदेशी स्वाद के कुछ टिप्स...


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    Fusion food trend, taste exotic flavor in traditional cuisine of Chhattisgarh

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    तरोताजा महसूस करना हो या फेस क्लीनिंग, वाइप्स हमेशा रहते हैं मददगार; इसे घर पर भी बना सकते हैं


    लाइफस्टाइल डेस्क. वाइप्स का इस्तेमाल युवतियां अक्सर करती हैं। कुछ तो इन्हें अपने पर्स में हमेशा साथ रखती हैं, ताकि जब भी थकान महसूस हो या मेकअप छुड़ाना हो तो इनका इस्तेमाल किया जा सके। लेकिन हर बार इन्हें खरीदना जेब पर भारी पड़ता है। इसलिए हम घर में आसानी से बनाए जाने वाले वाइप्स के बारे में बता रहे हैं। ये रसायन मुक्त हैं और कारगर भी। कंचन राजावत बता रही हैं घर पर वाइप्स बनाने के कुछ आसान टिप्स...

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    Wipes are always helpful if you want to feel refreshed or to make cleanliness easier

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    छोटे पेंडेंट और स्मार्ट स्टड जैसी सिंपल जूलरी से वर्किंग वुमन और स्टूडेंट्स पाएं एलिगेंट लुक


    लाइफस्टाइल डेस्क. कॉलेज और ऑफिस जाने वाली गर्ल्स हल्की-फुल्की जूलरी पहनना पसंद करती हैं। पर हल्के में भी क्या कुछ पहना जाए इसे लेकर कन्फ्यूजन रहती है। जूलरी डिजाइनरसाची सिंह बता रही हैं किस तरह की सिंपल डिजाइन्स वाली जूलरी पहनकर एलिगेंट लुक जा सकती हैं...

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    Working women with simple jewelery like small pendants and smart studs, college students can give themselves an elegant look

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    बीमार होने पर स्टूडेंट्स अपनी जगह रोबोट को क्लास में भेज सकेंगे, नोट भी बना पाएंगे


    लाइफस्टाइल डेस्क. आने वाले वक्त में स्टूडेंट्स बीमार होने पर अपनी जगह रोबोट को क्लास में भेजकर पढ़ाई कर सकेंगे। इस पर जापान के वैज्ञानिक काम कर रहे हैं। इनके मुताबिक, "छात्र की जगह रोबोट को क्लास में भेजा जा सकेगा। छात्र हॉस्पिटल या घर से टेबलेट की मदद से उसे कंट्रोल कर सकेंगे। रोबोट कैमरे से कक्षा में बताई गई बातें स्टूडेंट से लाइव साझा करेगा।वे नोट भी बना सकेंगे और लेक्चर समझ सकेंगे।" फिलहाल इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है। प्रयोग सफल होने पर इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा।



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    तस्वीर साभार : ऑरी लेबोरेट्री

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    इंडोनेशिया में शादी के लिए कोर्स अनिवार्य, फेल हुए तो छिन जाएगा विवाह का अधिकार


    जकार्ता.शादी को लेकर अमूमन कहा जाता है कि यह ऐसा लड्‌डू है, जिसे खाने वाला भी पछताता है और नहीं खाने वाला भी। इंडोनेशिया में इन दिनों शादी को लेकर खूब चर्चाएं हो रही हैं। दरअसल, यहां सरकार प्री-वेडिंग कोर्स शुरू करने जा रही है। इसमें शादी करने जा रहे जोड़ाें को शादी के बाद जिंदगी में होने वाले बदलावों के बारे में शिक्षित किया जाएगा। इन्हें सेहत का ध्यान रखने, बीमारियों से बचने और बच्चों की देखभाल की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि ये जोड़े सफल दांपत्य जीवन शुरू कर सकें। शादी लायक उम्र के हाे चुके सभी युवाओंके लिए यह काेर्स अनिवार्य है। फेल हाेने वालाें काे सरकार शादी का अधिकार नहीं देगी।

    इंडोनेशिया के अखबार ‘जकार्ता पोस्ट’ के मुताबिक, यह कोर्स 2020 में शुरू होगा और मुफ्त में कराया जाएगा। तीन महीने का यह कोर्स इंडोनेशिया के मानव विकास और सांस्कृतिक मंत्रालय ने धार्मिक और स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर तैयार किया है। स्वास्थ्य विभाग की डायरेक्टर जनरल किराना प्रितसरी ने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। पहले भी विभाग शादी लायक युवक-युवतियों को प्रशिक्षित करता रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब यह पूरे देश में लागू किया जा रहा है।

    'शादी एक बड़ी जिम्मेदारी'

    कोर्स बिल्कुल सरल है, लेकिन अगर कोई जोड़ा इसमें फेल हो जाता है, तो इंडोनेशिया की सरकार उन दोनों से शादी का अधिकार छीन लेगी। इस तरह के विवाह पूर्व कार्यक्रम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी जोड़ा वैवाहिक जीवन को संभालने और माता-पिता बनने के लिए भावनात्मक और शारीरिक रूप से कितना तैयार है। इंडोनेशिया के मानव विकास और सांस्कृतिक मामलों के मंत्री मुहाजिर एफेंदी ने कहा कि हर कोई शादी करना चाहता है, लेकिन परिवार चलाना एक अलग बात है। इस कोर्स में केवल शादी को सफल बनाने के नुस्खे ही नहीं बताए जाएंगे,बल्कि बच्चों की देखभाल करना, बीमारियों से बचाव और स्वास्थ्य का ख्याल रखना भी सिखाया जाएगा।

    मंत्री ने कहा- लोग जिम्मेदार रहें इसलिए यह कोर्स लागू किया गया है
    इंडोनेशिया के मानव विकास मंत्री मुहाजिर एफेंदी ने कहा कि कोर्स अनिवार्य इसलिए किया है, ताकि लोग शादी के बाद पूरी तरह जिम्मेदार रहें। 3 महीने तक चलने वाले कोर्स में घरेलू जीवन की हर बारीकी बताई जाएगी, जिसमें घर के आर्थिक हालात जैसा विषय भी शामिल होगा। कोर्स पूरा होने के बाद सर्टिफिकेट के जरिए जोड़ों को शादी की मंजूरी दी जाएगी।



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    Indonesian government makes couples compulsory 3-month course before marriage, failing which marriage will be denied

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    अनोखा रेस्तरां, जहां खाने के साथ मछलियों से पेडिक्योर भी कराएं


    लाइफस्टाइल डेस्क.इंडोनेशिया की सांस्कृतिक राजधानी योग्यकर्ता में एक ऐसा रेस्त्रां भी है,जहां खाना खाने के साथ फिश स्पा का आनंद भी उठाया जा सकता है। रेस्त्रां का नाम सोटो कॉकरो केमबेंग है। यह इंडोनेशिया के पारंपरिक खाने के लिए मशहूर है। रेस्त्रां को बगीचे के बीचों-बीच बनाया गया है।दावा है कि यहां का माहौल लोगों का तनाव दूर करने में मदद करेगा।



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    The trend of growing tourism tourism, enjoy eating here and get pedicures done by the fish floating in the water.
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